Pakistan Embarrassment: मुनीर चले थे जंग में चौधरी बनने, ईरान ने उछाल दी टोपी, पाकिस्तान की फिर हुई बेइज्जती

Pakistan Embarrassment: ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों के बाद पाकिस्तान में गरीबी जैसा माहौल है। लोगों को गैस के सिलेंडर नहीं मिल रहे, वाहनों के लिए पेट्रोल-डीजल की कतारें लगी हैं, खाड़ी से आने वाले सामान की किल्लत हो गई है और मात्र 25 दिन की बिजली बची है। बावजूद इसके, पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ मिडिल ईस्ट के जंग शांतिदूत बनने का सपना देख रहे हैं। हालांकि इन सब के बीच पाकिस्तान की जबरदस्त बेइज्जती हो रही है।

पाक की दलाली को ईरान की साफ 'न'

पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि उनका देश यानी पाकिस्तान इस जंग का स्थायी समाधान निकालने के लिए दोनों पक्षों की मेज़बानी करने को तैयार है। लेकिन ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया और साफ कहा कि उसने किसी भी ऐसी बातचीत में हिस्सा नहीं लिया है। जिससे पाकिस्तान के हवा-हवाई दावा फुस्स हो गया।

Pakistan Embarrassment Asim Munir Shehbaz Sharif

कैसे अचानक बीच में आया पाकिस्तान?

करीब एक महीने तक युद्ध चलने के बाद इस्लामाबाद ने खुद को न्यूट्रल ग्राउंड के रूप में पेश किया था। लेकिन जैसे ही उसे लगा कि सही मौका है चौधरी बनने का, तो पाकिस्तानी नेताओं ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच मैसेज का आदान-प्रदान शुुरु कर दिया। जिसके बाद आसिम मुनीर ने ट्रंप और ईरानी लीडरशिप से संपर्क बढ़ा लिया। साथ ही ईरान को 15 प्वॉइंट का वाली अमेरिकी शर्तें ईरान को देने की कोशिश की, लेकिन ईरान ने उसकी सभी शर्तों को सिरे से खारिज कर दिया।

धरा रह गया मुस्लिम उम्माह का लीडर बनने का सपना

ईरान के साथ जंग के दौरान पाकिस्तान खुद को मुस्लिम दुनिया के लीडर के रूप में प्रोजेक्ट करना चाहता था। लेकिन ईरान ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया। ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बगाही ने अमेरिकी प्रस्तावों को मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि पाकिस्तान की बैठकों में ईरान शामिल ही नहीं है। इसके अलावा, मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने भी साफ कहा कि पाकिस्तान की पहल में उनकी कोई भागीदारी नहीं है। जिससे पाकिस्तान को एक और झटका लगा।

पाकिस्तान के लिए क्या दांव पर है?

अगर युद्ध लंबा चलता है तो पाकिस्तान के लिए हालात मुश्किल हो सकते हैं। एक्सपर्ट की मानें तो शरणार्थी और चरमपंथी बलूचिस्तान में घुस सकते हैं, जिससे सुरक्षा खतरे बढ़ेंगे। पाकिस्तान की 85% से ज्यादा ऊर्जा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से आती है। सरकार पहले ही 4 दिन का वर्क वीक लागू कर चुकी है और स्कूल-कॉलेज ऑनलाइन हो चुके हैं। साथ ही, पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ डिफेंस एग्रीमेंट भी चिंता का कारण है। अगर बढ़ते ईरानी हमलों के बीच सऊदी युद्ध में उतरता है तो पाकिस्तान को भी ईरान पर हमला करना होगा। इससे भारत और अफगानिस्ता के साथ-साथ उसके लिए एक और वॉर फ्रंट खुल सकता है।

घर में घिर रहा पाकिस्तान

युद्ध के बीच पाकिस्तान विपक्षी दल और जनता दोनों ने सरकार और आर्मी को निशाने पर लिया है। सामान की बढ़ती कीमतें और एनर्जी सप्लाई की चेन टूटने पाकिस्तान में अकाल जैसे हालात बनने की पूरी संभावना है। अगर ये युद्ध दो महीने और चला तो पाकिस्तान में खाने-पीने के लाले पड़ सकते हैं। इसलिए पाकिस्तान के इस कदम से जनता में खासी बेचैनी है।

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