इस्लामाबाद थिंक टैंक की पाकिस्तान को लेकर रिपोर्ट ने डराया.. हालात ऐसे होंगे, कि श्रीलंका संकट लगेगा छोटा!
Pakistan Economy: पाकिस्तान में 8 फरवरी को चुनाव हुए थे और अब करीब दो हफ्तों का वक्त होने वाला है, जब देश में नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है। नवाज शरीफ, जो कई महीनों से प्रधानमंत्री बनने की रेस में थे, वो अपना पांव पीछे खींच चुके हैं।
वहीं, बिलावल भुट्टो ने भी प्रधानमंत्री बनने से इनकार करते हुए शहबाज शरीफ को बाहर से समर्थन देने की घोषणा कर दी, बावजूद इसके शहबाज शरीफ सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। रिपोर्ट है, कि शहबाज शरीफ हर हाल में चाहते हैं, कि बिलावल भुट्टो सरकार का हिस्सा बने, लेकिन वो कन्नी काट रहे हैं।

लिहाजा, पाकिस्तान से लेकर इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स तक पूछ रहे हैं, कि आखिर पाकिस्तान में कोई प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए तैयार क्यों नहीं हो रहा है, तो इस्लामाबाद स्थित एक थिंक टैंक, तबडलैब की रिपोर्ट से इसका पता चलता है।
हर हाल में डिफॉल्ट होगा पाकिस्तान
तबडलैब की रिपोर्ट के हालिया विश्लेषण रिपोर्ट में कहा गया है, पाकिस्तान ऋण जाल में इस तरह से उलझ गया है, कि अब वो हर हाल में डिफॉल्ट करेगा। रिपोर्ट में कहा गया है, कि ये ऋण अब विस्फोट कर चुका है और अब पाकिस्तान के लिए अब इस ऋण को मैनेज करना संभव नहीं रहा है, लिहाजा आईएमएफ का पैकेज भी उसे नहीं बचा सकता है।
थिंक टैंक ने कहा है, कि पाकिस्तान एक विनाशकारी स्थिति में फंस गया है, जहां से देश की हालत विकराल हो सकती है।
दूसरी तरफ, पाकिस्तान की कर्ज चुकाने की क्षमता के बारे में बढ़ती चिंताओं के बीच चुनावी धांधली ने स्थिति और खराब कर दी है। जिसकी वजह से अगर नई सरकार का गठन होता है, तो उसके लिए आईएमएफ से कर्ज लेना करीब करीब असंभव हो जाएगा। वहीं, अगर शहबाज शरीफ प्रधानमंत्री बनते हैं, तो उनके पास जनता का समर्थन नहीं होगा, ऐसे में देश चलाना और भी ज्यादा मुश्किल होगा।
चुनावी नतीजे में धांधली की रिपोर्ट आने के बाद से देश का शेयर बाजार भी लुढ़क चुका है, जिसकी वजह से प्रधान मंत्री पद के संभावित उम्मीदवार शहबाज शरीफ ने IMF बेलआउट की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है।
पाकिस्तान पर कैसे बढ़ता गया कर्ज?
1- पाकिस्तान का प्रति व्यक्ति ऋण 2011 में 823 डॉलर से 36% बढ़कर 2023 में 1,122 डॉलर हो गया है।
2- इसी समय सीमा के दौरान, पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति जीडीपी 2011 में 1,295 डॉलर से 6% गिरकर 2023 में 1,223 डॉलर हो गई।
3-पाकिस्तान में कर्ज और इनकम की वृद्धि का असर ये हुआ है, कि देश को अतिरिक्त उधार लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
4- साल 2011 में पाकिस्तान में एक बच्चा करीब 70 हजार 778 रुपया कर्ज लेकर जन्म लेता था, जबकि 2023 में ये आंकड़ा 3 लाख 341 रुपये हो चुका है, जो आपात स्थिति को दर्शाता है।
पाकिस्तान का डिफॉल्ट करना क्यों है तय
1- पाकिस्तान को इस साल 25 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना है, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ 7 अरब डॉलर के करीब है।
2- 2011 के बाद से पाकिस्तान का विदेशी कर्ज लगभग दोगुना हो गया है, जबकि उसका घरेलू कर्ज छह गुना बढ़ गया है।
3- वित्त वर्ष 2024 के लिए पाकिस्तान के ऊपर 49.5 अरब डॉलर का ऋण मैच्योर हो रहा है, जिसमें 30 प्रतिशत सूद है और इसमें आईएमएफ और द्विपक्षीय ऋण शामिल नहीं है।
4- अस्थिर उधार और खर्च के पैटर्न के कारण पाकिस्तान की ऋण प्रोफ़ाइल को चिंताजनक माना जाता है।
जीशान सलाहुद्दीन और अम्मार हबीब खान द्वारा लिखित तबडलैब रिपोर्ट में कहा गया है, कि पाकिस्तान के बाहरी और घरेलू कर्ज में 2011 के बाद से उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। बाहरी कर्ज और देनदारियां लगभग दोगुनी होकर 125 अरब डॉलर तक पहुंच गई हैं, जबकि घरेलू कर्ज छह गुना बढ़ गया है। ब्याज भुगतान अब पहले की तुलना में सकल घरेलू उत्पाद का एक बड़ा हिस्सा बनता है, जो ऋण भार की गंभीरता को उजागर करता है।
पाकिस्तान का भविष्य क्या होगा?
तबडलैब के विश्लेषण से संकेत मिलता है, कि अगर सरकारी स्तर पर क्रांतिकारी और ऐतिहासिक सुधार कदम उठाए गये, तो ठीक, वरना देश की स्थिति विकराल हो जाएगी। लेकिन, दिक्कत ये है, कि गठबंधन सरकार कोई भी कठोर फैसला नहीं ले पाएगी।
तबडलैब रिपोर्ट में कहा गया है, "मौजूदा परिस्थिति परिवर्तनकारी बदलाव की मांग करता है। जब तक यथास्थिति में व्यापक सुधार और नाटकीय बदलाव नहीं होंगे, पाकिस्तान और गहराई में डूबता रहेगा, और डिफॉल्ट होना तय हो जाएगा।"












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