Pakistan: आसिम मुनीर पाक आर्मी अफसरों पर फूटा गुस्सा, अफगानिस्तान से पिटाई के बाद आग बबूला हुए फील्ड मार्शल
Pakistan: रावलपिंडी में, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने डूरंड रेखा पर अफगान तालिबान के हमलों के बाद एक आपातकालीन बैठक बुलाई। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में हुई इस बैठक में पेशावर के कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उमर अहमद बोखारी, दक्षिणी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राहत नसीम अहमद खान, और इंटर-सर्विसेज़ इंटेलिजेंस (डीजी आईएसआई) के महानिदेशक आसिम मलिक सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया गया।
डूरंड लाइन पर पिटाई के बाद झल्लाए मुनीर
मुनीर ने अपने सीनियर कमांडरों को पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर "खुफिया विफलता" और "इंटेलिजेंस इनपुट की कमी" के लिए कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कथित तौर पर हर एक अधिकारी से डिटेल में जवाब मांगे, यह सवाल करते हुए कि इतने बड़े हमले की पहले से खुफिया जानकारी क्यों नहीं मिली और तत्काल जवाबी कार्रवाई के लिए सैन्य सहायता तैयार क्यों नहीं थी। खुफिया सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान पाकिस्तान सेना प्रमुख का लहजा सख्त था, वे अधिकारियों को फटकार रहे थे।

इंटेलिजेंस इनपुट न होने से मुनीर आगबबूला
मुनीर ने सवाल किया, "खुफिया जानकारी कहां थी? इतनी बुरी तरह से हारने के पीछे क्या कारण है?" उन्होंने प्रभावी रणनीति की गैरमौजूदगी पर भी सवाल उठाए, जिससे तालिबान के अचानक हमले को रोकने में मदद मिलती। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, फील्ड मार्शल मुनीर ने सभी सीनियर कमांडरों को सात दिनों के भीतर चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के कार्यालय में एक डिटेल रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया, जिसमें चूक, कारण और आगे की रणनीति बताना होगी।
बॉर्डर पर सुरक्षा को लेकर भी हड़काया
उन्होंने सभी क्षेत्रों में कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने और "आगे होने वाले किसी भी नुकसान से बचने के लिए सभी मोर्चों पर जरूरी उपाय" करने के लिए नए आदेश भी जारी किए। मुनीर ने जनरलों को याद दिलाया कि "पाकिस्तान युद्ध में है," आंतरिक और बाहरी दोनों मोर्चों पर सुरक्षा जरूरी है।
क्या-क्या बना मुनीर की चुनौती?
उन्होंने कथित तौर पर सभा को बताया, "हम कब तक अनगिनत युवा सैनिकों और नागरिकों का बलिदान करते हुए एक सॉफ्ट स्टेट बने रहेंगे? यह कार्रवाई करने का समय है।" सूत्रों ने बताया कि अफगान तालिबान ने सात मोर्चों - अंगूर अड्डा, बाजौर, कुर्रम, दीर, चित्राल, खैबर पख्तूनख्वा में वज़ीरिस्तान, और बहाराम चाह और बलूचिस्तान में चमन- से भारी तोपखाने के हमले किए, जिससे पाकिस्तानी सेनाएं अप्रत्याशित रूप से फंस गईं।
बुरी तरह फेल हुआ खुफिया तंत्र
इन हमलों के बाद खुफिया जानकारी जुटाने और सीमा की तैयारी में गंभीर कमियां उजागर हुईं। आसिम मुनीर ने साफ-साफ कहा कि "फौज को कंट्रोल करना होगा, साथ ही सोच का दायरा बढ़ाएं कि दुश्मन की अगली चाल क्या हो सकती है ताकि ऐसी बड़ी चूक दोबारा ना हो।"
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