Pakistan Fear: 'भारत-इजरायल के बीच में पिसेगा पाक'? ख्वाजा को सता रहा इस बात का डर
Pakistan Fear: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों ने पाकिस्तान की टेंशन बढ़ा दी है। पाकिस्तान और ईरान के बीच 900 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सीमा साझा करते हैं, इसलिए यह झड़प सीधे तौर पर पाकिस्तान की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिति को प्रभावित कर रहा है। इसी बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि ईरान में चल रही जंग एक ज़ायोनी (यहूदी) योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद पाकिस्तान को एक जागीरदार राष्ट्र (Vassal Nation) में बदलना है। इसके साथ ही आसिफ ने भारत पर भी निशाना साधा है।
पाकिस्तान के क्यों फूल रहे हाथ-पांव?
ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी कि अगर इस जंग में इजरायल को जीत मिलती है, तो अफगानिस्तान, भारत और ईरान मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ एक साझा रणनीति बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पाकिस्तान के लिए सुरक्षा चुनौतियां और बढ़ जाएंगी। आसिफ के मुताबिक, भविष्य में ये देश पाकिस्तान को कमजोर करने के इरादे से काम कर सकते हैं।

अफगानिस्तान और भारत से पहले ही तनाव
पाकिस्तान पहले से ही तालिबान-शासित अफगानिस्तान के साथ दुश्मनी मोल लेकर पछता रहा है। ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हालात खुले युद्ध जैसे हो चुके हैं। इसके अलावा पाकिस्तान मई 2025 में भारत के साथ एक छोटे युद्ध का सामना भी कर चुका है। ऐसे में ईरान के साथ बढ़ता तनाव पाकिस्तान के लिए और ज्यादा मुसीबत भरा हो सकता है।
ख्वाजा की घबराहट का कारण समझें
ईरान की सीमा पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से लगती है। यह इलाका दशकों से विद्रोह और अस्थिरता का केंद्र रहा है। यहां आए दिन पाकिस्तान आर्मी को निशान बनाकर स्ट्राइक की जाती है। हर साल सिर्फ इसी इलाके में पाकिस्तानी फौज के सैंकड़ों जवान मारे जाते हैं। वहीं, बलूची लोग खुद को अब पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानते और अपने आप को एक अलग देश के तौर पर पेश करते हैं। इसीलिए जो हिस्सा पहले से ही पाकिस्तान के कंट्रोल के बाहर उसकी सीमा एक ऐसे इलाके से लगना जहां इजरायल का कंट्रोल हो, इससे बुरा पाकिस्तान के लिए कुछ नहीं हो सकता। यही बात है जो ख्वाजा साहब को घबराहट दे रही है।
यहूदियों से घबराए ख्वाजा
ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए ज़ायोनीवाद (यहूदी मातृभूमि आंदोलन) पर आरोप लगाया कि 1948 में इजरायल के गठन के बाद से इस्लामी दुनिया में हुई कई जंगों में इसकी डायरेक्ट या इनडायरेक्ट भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम दुनिया में बड़े युद्धों के पीछे इसी विचारधारा का हाथ रहा है।
आसिफ ने यह भी दावा किया कि दुनिया के बड़े देश ज़ायोनीवाद की बंधक बन चुकी हैं। उनके मुताबिक, दशकों से ज़ायोनी ताकतें वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करती रही हैं। उन्होंने इसे ग्लोबल पावर स्ट्रक्चर पर गहरा प्रभाव बताकर पेश किया।
अमेरिका के खिलाफ ख्वाजा का बयान
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध तेहरान की बातचीत की इच्छा के बावजूद उस पर थोपा गया युद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी स्थिति यहूदियों द्वारा प्लान किया गया है ताकि इजरायल का प्रभाव धीरे-धीरे पाकिस्तान की सीमाओं तक फैल सके। ख्वाजा का ये बयान सीधे-सीधे अमेरिका के खिलाफ है, क्योंकि अमेरिका भी इस युद्ध में एक पक्ष है।
पाकिस्तान को जागीरदार राज्य बनाने की साजिश
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर इजरायल इस युद्ध में विजयी होता है, तो भारत, अफगानिस्तान और ईरान मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ एक साझा एजेंडा अपना सकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे पाकिस्तान असुरक्षित हो जाएगा और अंततः उसे जागीरदार राज्य (जिस राज्य का कंट्रोल किसी और के पास हो) में बदलने की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने पाकिस्तान के लगभग 250 मिलियन (25 करोड़) नागरिकों से इस कथित साजिश को पहचानने की अपील की।
न्यूक्लियर वाली गीदड़ भभकी
ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान की न्यूक्लियर क्षमता को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि यह ताकत देश को ज़ायोनियों से बचाने का एक बड़ा सुरक्षा कवच है। उन्होंने 1998 में हुए न्यूक्लियर टेस्ट में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की भूमिका को भी याद किया, जिसने पाकिस्तान की न्यूक्लियर क्षमता को औपचारिक रूप से साबित किया था।
मिडिल ईस्ट में जंग के बीच ख्वाजा की घबराहट
ख्वाजा आसिफ की ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब अमेरिका और इजरायल एक तरफ और ईरान दूसरी तरफ अब तक सबसे तेज सैन्य टकराव में उलझे हुए हैं। यह जंग अमेरिकी और इजरायली हमलों से शुरू हुई, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत पूरी टॉप धार्मिक और सैन्य लीडरशिप ही साफ हो गई है।
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