पाकिस्तान में बिजली बिल से हाहाकार, 56 रुपये प्रति यूनिट को और बढ़ाने की तैयारी, IMF का राहत देने से इनकार
Pakistan Electricity Bill: पाकिस्तान में आम लोगों के घरों में बिजली बिल हजारों-हजार रुपये का आ रहा है। जरा सोचिए, अगर आपके शहर में बिजली बिल 56 रुपये प्रति यूनिट हो, तो आपका क्या हाल होगा? दिक्कत बस इतनी भर नहीं, पाकिस्तान में 7 रुपये प्रति यूनिट बिजली बिल में और इजाफा होने वाला है, यानि नई कीमत बहुत जल्द बढ़कर 63 रुपये प्रति यूनिट हो सकती है।
इस हिसाब से अगर कोई परिवार 100 यूनिट बिजली इस्तेमाल करता है, तो उसका बिल मौजूदा कीमत के हिसाब से 5600 रुपये, 200 यूनिट पर 11 हजार से ज्यादा, 300 यूनिट पर करीब 17 हजार और 400 यूनिट पर करीब 23 हजार का बिजली बिल आएगा।

पाकिस्तान में बिजली बिल से हाहाकार
औसतन एक परिवार में कम से कम 200 यूनिट बजली का इस्तेमाल एक महीने में हो जाता है।
लिहाजा, पाकिस्तान में बिजली बिलों के खिलाफ भारी प्रदर्शन किया जा रहा है और सरकार ने बिजली बिलों पर सब्सिडी देने का एक प्रपोजल अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को भेजा था, जिसे आईएमएफ ने खारिज कर दिया है।
जियो न्यूज के मुताबिक, आईएमएफ ने किसी भी टैरिफ समायोजन या अतिरिक्त सब्सिडी के प्रावधान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जबकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने दलील दी थी, कि बिजली बिल की वसली उम्मीदों के स्तर तक पहुंच गया है।
एक तरह जहां पाकिस्तान सरकार की सब्सिडी देने की कोशिश फेल हो गई है, वहीं दूसरी तरफ ऊर्जा विभाग ने आईएमएफ को बिजली बिल 78 रुपये प्रति यूनिट और बढ़ाने की अनुमति मांग ली है, और आईएमएफ से मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान में बिजली बिल 63 रुपये प्रति यूनिट हो जाएगी।
पाकिस्तान के कई पत्रकारों ने बिजली बिल सोशल मीडिया पर शेयर किया है और वो बिल 20-20 हजार रुपये से ज्यादा है।
वहीं, हजारों में आ रहे बिजली बिल और 300 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा हो चुके पेट्रोल के दाम को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन ने पिछले सप्ताह पाकिस्तान को हिलाकर रख दिया था, जब हजारों लोग शहर की सड़कों पर उतर आए और अपने बिजली के बिलों में आग लगानी शुरू कर दी।
पिछले तीन महीनों में बिजली की कीमत दोगुनी होकर लगभग 56 रुपये प्रति किलोवाट हो गई है। पेट्रोल की कीमतें जून में 262 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर इस महीने 305 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं। वहीं, चीनी का रेट करीब 200 रुपये प्रति किलो हो गया है।
पाकिस्तान राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल से जूझ रहा है, मुद्रास्फीति की दर रिकॉर्ड 36.4% है और प्रधान मंत्री इमरान खान पिछले साल अप्रैल में अविश्वास प्रस्ताव के बाद अपदस्थ हो गए थे। देश पिछले साल भी बाढ़ से तबाह हुआ था, जिससे देश का अधिकांश हिस्सा जलमग्न हो गया था।
पिछले हफ्ते कराची में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया, जब उपयोगिता कंपनी के-इलेक्ट्रिक (केई), जो शहर में बिजली पैदा करती है और वितरित करती है, उसके एक कर्मचारी पर गुस्साई भीड़ ने हमला कर दिया।
वीओए के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में, ऊर्जा विभाग ने प्रदर्शनकारियों द्वारा हमलों की धमकियों के बाद अपने कर्मचारियों और प्रतिष्ठानों के लिए पुलिस सुरक्षा का अनुरोध किया है।
व्यापारियों के संगठन ऑल कराची ताजिर इत्तेहाद के अध्यक्ष अतीक मीर ने कहा, "भूख लोगों की हालत खराब कर देती है।"
विरोध प्रदर्शन सप्ताहांत में चरम पर पहुंच गया, जब इस्लामवादी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के आह्वान के जवाब में पूरे पाकिस्तान में दुकानें और बाजार बंद हो गए। माना जाता है कि शुक्रवार और शनिवार को बंद से देश को अनुमानित 10 अरब रुपये (£25 मिलियन) का नुकसान हुआ।












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