Imran Khan: चुनाव आयोग ने इमरान खान से छीना चुनाव चिन्ह, 'कप्तान' ने जेल से भरा पर्चा, लड़ पाएंगे इलेक्शन?
Pakistan Election 2024: पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) ने शुक्रवार शाम को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) से उसका सालों पुराना चुनाव चिन्ह 'बल्ला' छीन लिया है, जो एक ऐसा चुनाव चिन्ह था, जो इसके संस्थापक इमरान खान के पूर्व क्रिकेट जीवन को दर्शाता है।
अपने सुरक्षित फैसले की घोषणा करते हुए, मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान राजा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय ईसीपी पीठ ने पीटीआई के अंतर-पार्टी चुनावों को भी गैरकानूनी घोषित कर दिया है।

पाकिस्तान चुनाव आयोग का ये फैसला उस वक्त आया है, जब फरवरी महीने में होने वाले चुनाव को लेकर पाकिस्तान में कल (22 दिसंबर) नामांकन का आखिरी दिन था और इमरान खान ने जेल से ही नामांकन दाखिल किया है।
वहीं, चुनाव आयोग ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के अंदरूनी चुनाव को पीटीआई के पूर्व सदस्य अकबर एस बाबर की याचिका पर गैर-कानूनी घोषित किया है, जिन्होंने दावा किया था, कि पीटीआई ने नियमों के मुताबिक चुनाव नहीं कराया है।
इमरान खान पर चौतरफा हमला
इलेक्शन कमीशन का ये फैसला पूर्व सत्ताधारी पार्टी (पीटीआई) के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि यह 8 फरवरी के चुनावों से पहले सैन्य प्रतिष्ठानों से कड़ा संघर्ष कर रही है। इसके संस्थापक इमरान खान, जो जेल में बंद होने के बाद भी काफी ज्यादा लोकप्रिय हैं और जो अभी भी अपने भाषणों से मतदाताओं को पीटीआई के पक्ष में बनाए हुए हैं, वो कई महीनों जेल में बंद हैं और इस्लामाबाद हाईकोर्ट की तरफ से तोशाखाना मामले में झटका खाने के बाद भी उन्होंने जेल से ही चुनावी नामांकन भरा है।
इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने इमरान खान को निचली अदालत से मिली सजा को सस्पेंड करने की उनकी याचिका खारिज कर दी है।
लिहाजा, उनके ऊपर चुनाव लड़ने को लेकर लगा पांच सालों का प्रतिबंध अभी भी मौजूद है, जो चुनाव आयोग ने लगा रखा है। लिहाजा, ज्यादा संभावना इस बात की है, कि इमरान खान के नामांकन को चुनाव आयोग रद्द कर सकता है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले साइफर मामले में इमरान खान की जमानत याचिका मंजूर कर ली है, फिर भी उनकी रिहाई जल्द होने के आसार नहीं हैं।
चुनाव चिन्ह छीनने के चुनाव आयोग के आदेश में कहा गया है, कि "पीटीआई ने हमारे निर्देशों का पालन नहीं किया है... और पीटीआई प्रचलित संविधान, 2019 और चुनाव अधिनियम, 2017 और चुनाव नियम, 2017 के अनुसार अंतर-पार्टी चुनाव कराने में नाकाम रही है।"
जियो न्यूज ने बताया था, कि चुनावों को गैरकानूनी घोषित किए जाने के साथ, बैरिस्टर गोहर अली खान, जिन्होंने इमरान खान की जगह पार्टी के अध्यक्ष का पद संभाला था, वो अब पार्टी के शीर्ष प्रमुख नहीं हैं।
ऐसा लगता है, कि पार्टी के पास समय की भी कमी है, क्योंकि नामांकन पत्र जमा करने की विस्तारित समय सीमा रविवार को समाप्त हो रही है और पार्टी के पास ईसीपी के फैसले के खिलाफ अदालतों में जाने के लिए केवल एक दिन (शनिवार) है।
पीटीआई ने बार-बार शिकायत की है, कि उसे निशाना बनाया जा रहा है और उसे चुनाव में जाने से रोका जा रहा है। हालांकि, इलेक्शन कमीशन ने कहा है, कि वो कोई भेदभाव नहीं कर रहा है।
हालांकि, जिस तरह से इलेक्शन कमीशन बर्ताव कर रहा है, उससे साफ पता चलता है, कि इलेक्शन कमीशन की कोशिश किसी भी तरह से इमरान खान को चुनाव लड़ने से रोकना है।
इमरान खान को बनाया जा रहा निशाना?
राजनीतिक विश्लेषक मजहर अब्बास ने कहा, कि चुनाव आयोग ने किसी भी राजनीतिक दल के आंतरिक चुनावों को "कभी भी" गैरकानूनी घोषित नहीं किया है, लिहाजा ऐसा लगता है, कि पीटीआई पर "हमला हो रहा है।"
उन्होंने कहा, कि "ऐसा कभी नहीं हुआ है। चुनाव चिन्ह वापस ले लिए गए हैं, लेकिन यह पहली बार है, कि ईसीपी ने किसी पार्टी के अंतर-पार्टी चुनावों पर आदेश दिया है।" अब्बास ने कहा, कि "पार्टियों ने वैकल्पिक तरीकों का विकल्प चुना है, जैसा कि 1985 के चुनावों में हुआ था। इसलिए पीटीआई को भी एक रणनीति बनानी होगी।"
उन्होंने कहा कि "सोशल मीडिया की शक्ति से, यदि पीटीआई के उम्मीदवार स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ते हैं, तो पार्टी उनके प्रतीकों और लोगों के नामों के बारे में जानकारी प्रसारित कर सकती है। लेकिन एक बात निश्चित है- यह चुनाव पीटीआई के लिए कठिन होता जा रहा है।"
हालांकि, इलेक्शन कमीशन के फैसले के खिलाफ पीटीआई ने राहत पाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की है, जिसपर फैसला आज आने की उम्मीद है, लेकिन यदि आज की समय सीमा समाप्त हो जाती है, तो बल्ला प्रतीक प्राप्त करने के लिए वे कुछ नहीं कर सकते हैं।
पीटीआई नेता बैरिस्टर गोहर ने जियो न्यूज को बताया, "हम चुनावों का बहिष्कार नहीं करेंगे... हमारे पास प्लान बी है।"
ईसीपी के पूर्व सचिव कंवर मुहम्मद दिलशाद ने जियो न्यूज को बताया कि आयोग के आदेश के बाद, पीटीआई के उम्मीदवारों को आम चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवारों के रूप में भाग लेना होगा।
उन्होंने कहा, "चूंकि पीटीआई के इंट्रा-पार्टी चुनाव तीसरी बार खारिज कर दिए गए, इसलिए इसके (पीटीआई के) उम्मीदवारों को स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ना होगा।"












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