Pakisan: शहबाज शरीफ को मिला दलाली का ईनाम, सऊदी ने भेजी कर्जे की दूसरी किस्त, फिर भी हाल-बेहाल
Pakisan की खस्ता हाल इकोनॉमी को तिनके का सहारा मिल गया है। बीते दिनों, पाक का हाल ऐसा था कि जिस सेरेना होटल में अमेरिका-ईरान की पीस टॉक कराई थी उसके पैसे देने तक की रकम नहीं थी। इसी बीच पाकिस्तानी सरकार को सऊदी अरब के वित्त मंत्रालय से 1 अरब अमेरिकी डॉलर मिले हैं। यह रकम 20 अप्रैल, 2024 की वैल्यू डेट के साथ दी गई है।
कर्ज के दबाव में बेहाल पाकिस्तान
यह फंड ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अपनी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करने में हालत खराब हो रही है। सरकार को समय पर कर्ज चुकाने का दबाव है और उसे अपने ग्लोबल पार्टनर्स को बड़े पेमेंट करने पड़ रहे हैं, जिससे देश का खजाना लगातार खाली हो रहा है। एक तरह से आप ये कह सकते हैं कि पाकिस्तानी की इकॉनोमी अब दूसरे देशों से मिलने वाली उधारी पर टिकी है।

3 अरब डॉलर पैकेज की दूसरी और आखिरी किस्त
यह 1 अरब डॉलर की राशि दरअसल सऊदी अरब द्वारा दिए गए कुल 3 अरब डॉलर के पैकेज की दूसरी और आखिरी किस्त है। इससे पहले 2 अरब डॉलर की पहली किस्त 15 अप्रैल, 2024 को पाकिस्तान को मिल चुकी थी। यह पूरा पैकेज पाकिस्तान की कमजोर होती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए दिया गया है और इसका सीधा असर देश की वित्तीय स्थिति पर पड़ता है।
SBP ने क्या कहा अपने बयान में?
SBP (स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान) ने अपने आधिकारिक बयान में साफ कहा, "हमें सऊदी अरब के वित्त मंत्रालय से 20 अप्रैल, 2024 की वैल्यू डेट के साथ 1 अरब डॉलर मिले हैं।" इस रकम के साथ 3 अरब डॉलर की पूरी प्रतिबद्धता पूरी हो गई है, जिसका मकसद पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को कुछ समय के लिए मजबूत करना है।
IMF के कर्ज तले दबा पाक
हालांकि यह पैसा मिलने से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन पाकिस्तान के लिए स्थिति अभी भी आसान नहीं है International Monetary Fund (IMF) के साथ चल रहे प्रोग्राम के तहत देश को कड़े आर्थिक नियमों का पालन करना पड़ रहा है। ऐसे में यह फंड एक अस्थायी सहारा है ताकि पाकिस्तान अपने पेमेंट बैलेंस को संभाल सके।
खत्म की कगार पर विदेशी मुद्रा कोष
Dawn की रिपोर्ट के मुताबिक, 27 मार्च तक पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 16.4 अरब डॉलर था। यह स्तर लगभग तीन महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद अर्थव्यवस्था पर दबाव कम नहीं हुआ है। पाकिस्तान की परेशानी तब और बढ़ गई जब वह United Arab Emirates (UAE) से 3.5 अरब डॉलर की सुविधा को बढ़ाने के लिए कोई समझौता नहीं कर सका। इस वजह से देश के बाहरी बफर पर दबाव और बढ़ गया है और आर्थिक स्थिति और ज्यादा कमजोर होती दिख रही है।
7 साल में पहली बार ऐसी विफलता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पिछले 7 सालों में पहली बार हुआ है जब पाकिस्तान इस तरह की डील फाइनल करने में असफल रहा है। इस घटना ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं और आने वाले समय में फंडिंग की कमी का खतरा बढ़ गया है।
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