पाकिस्तान ने किया हाइपरसोनिक मिसाइल होने का दावा, भारत से पहले कैसे हासिल किया युद्ध बदलने वाला हथियार?
Pakistan Hypersonic Missiles: हाइपरसोनिक मिसाइल वो हथियार है, जिसे अपने बेड़े में शामिल करने के लिए अमेरिका संघर्ष कर रहा है और पिछले दो सालों में अमेरिका के दो टेस्ट नाकाम हो चुके हैं, लेकिन पाकिस्तान ने अचानक दावा किया है, कि उसने हाइपरसोनिक मिसाइल शक्ति हासिल कर ली है।
पाकिस्तान वायु सेना (पीएएफ) का दावा है, कि हाइपरसोनिक शक्ति उसके पास है। पाकिस्तान का ये दावा उस वक्त आया है, जब ईरान ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर मिसाइल हमले किए हैं और पाकिस्तानी एयरफोर्स की तरफ से जवाबी कार्रवाई की गई है।

आपको बता दें, कि हाइपरसोनिक स्पीड वो होती है, जब किसी ऑब्जेक्ट की स्पीड मैक-5 की होती है, और इस स्पीड को अभी तक अमेरिका, चीन और रूस ही हासिल कर पाया है, जबकि भारत इस स्पीड के करीब पहुंच चुका है। और यही वजह है, कि पाकिस्तान के दावे पर सवाल उठ रहे हैं।
पाकिस्तान के दावों पर क्यों हैं सवाल?
हाइपरसोनिक मिसाइलों तभी काम करते हैं, जब उनमें काफी ज्यादा शक्ति वाले एयर पावर ब्रीदिंग इंजन लगाए जाते हैं। हाइपरसोनिक स्पीड से अत्यधिक युद्धाभ्यास वाले हथियारों को लॉन्च करने की क्षमता किसी भी देश की ताकत को काफी ज्यादा मारक बना देती है। क्योंकि, दुनिया में अभी जो भी एयर डिफेंस सिस्टम हैं, उनमें अभी हाइपरसोनिक स्पीड को ट्रैक करने की क्षमता नहीं है।
लिहाजा, पाकिस्तान का ये दावा काफी दिलचस्प है, क्योंकि पाकिस्तान बढ़ते कर्ज से जूझ रहा है, ऐसे में इस टेक्नोलॉजी पर अरबों डॉलर खर्च करना असंभव सरीखा है।
पाकिस्तानी एयरफोर्स ने इस सप्ताह दावा किया है, कि हाइपरसोनिक मिसाइलों जैसी नई तकनीक के शामिल होने से उसकी युद्धक क्षमताओं को बढ़ावा मिला है।
भारतीय वायु सेना विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर कहा है, कि किसी मिसाइल के 'हाइपरसोनिक' होने का दावा "भ्रामक" हो सकता है, क्योंकि लगभग सभी बैलिस्टिक मिसाइलें, अपनी उड़ान के दौरान किसी न किसी बिंदु पर हाइपरसोनिक गति प्राप्त कर लेती हैं।
पाकिस्तानी एयरफोर्स ने एक बयान में कहा है, कि "जे-10सी लड़ाकू जेट, मानव रहित हवाई प्रणाली, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध मंच, अत्याधुनिक एकीकृत वायु रक्षा का अधिग्रहण सिस्टम, एयर मोबिलिटी प्लेटफॉर्म, उच्च से मध्यम वायु रक्षा (एचआईएमएडी) और हाइपरसोनिक मिसाइल क्षमताओं ने अभूतपूर्व गति से पीएएफ की युद्ध क्षमताओं को बढ़ाया है।"
पाकिस्तान के दावे पर इसलिए भी सवाल हैं, क्योंकि ईरानी मिसाइल पाकिस्तानी सीमा में घुसकर हमला कर देते हैं, लेकिन पाकिस्तानी एयर डिफेंस सिस्टम उसे ट्रैक तक नहीं कर पाया।
इसके अलावा, पिछले साल जब भारत की स्वदेश निर्मित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस गलती से दाग दी गई थी और पाकिस्तान के एक आबादी रहित इलाके में मिसाइल जा गिरी थी, तब भी पाकिस्तानी डिफेंस सिस्टम भारतीय ब्रह्मोस को ट्रैक नहीं कर पाया था।
हालांकि, बाद में पाकिस्तान ने दावा किया था, कि उसने उत्तर भारत में वायु सेना अड्डे, सिरसा से एक "सुपरसोनिक प्रोजेक्टाइल" के प्रक्षेपण को ट्रैक किया। लेकिन ट्रैकिंग के दावे के बावजूद पाकिस्तान मिसाइल को रोक नहीं सका था।
इससे पहले 26 फरवरी 2019 को, भारतीय वायु सेना (IAF) के 16 मिराज लड़ाकू विमानों ने 30,000 फीट की ऊंचाई से भारतीय सीमा को पार किया और पाकिस्तान के अंदर घुसकर बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के शिविर पर हमला किया था, और उस वक्त भी पाकिस्तान भारतीय फाइटर जेट्स को ट्रैक नहीं कर पाया था।
इसलिए, पाकिस्तानी एयरफोर्स के दावे को शेखी बघारने के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि यह प्रशंसनीय है, कि भारत के साथ रुक-रुक कर सैन्य झड़पों में उलझा चीन, पाकिस्तान को अपने आम दुश्मन पर दबाव बनाए रखने के लिए उच्च तकनीक वाले हथियार बेचने की कोशिश कर रहा है।
और पाकिस्तान ने इसी महीने कहा है, कि वो चीन से फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट खरीद रहा है और एक्सपर्ट्स का कहना है, कि 2014 में बने इस चीनी विमान को अभी तक किसी भी देश ने नहीं खरीदा है और ना ही इसे चीनी एयरफोर्स ने ही खरीदा, फिर भी पाकिस्तान इसे खरीद रहा है। लिहाजा, इस जेट की क्षमता को शक पैदा करती है, साथ ही सवाल ये भी हैं, कि क्या चीन, ये फाइटर जेट जबरदस्ती पाकिस्तान को भेज रहा है।
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज थिंक टैंक के सैन्य विश्लेषक टिमोथी राइट ने डिफेंस न्यूज की एक रिपोर्ट में कहा है, कि पाकिस्तान द्वारा संदर्भित हाइपरसोनिक मिसाइल, CM-400AKG (YJ-12) होने की संभावना है, जिसे पाकिस्तान ने पांच साल पहले चीन से JF-17 थंडर जेट के तौर पर हासिल किया था।
क्या हाइपरसोनिक मिसाइलें अजेय हैं?
जैसा कि चीन और रूस दावा करते हैं, हाइपरसोनिक मिसाइलें अंतिम अजेय हथियार नहीं हो सकती हैं। कम से कम, अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान तो ऐसा ही मानता है।
हाइपरसोनिक मिसाइलें रूस और चीन के शस्त्रागार में अपनी ताकत दिखाने के नए घातक हथियार हैं। हालांकि, यूक्रेन-रूस युद्ध ने रूस ने कई हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, बावजूद वो युद्ध जीत नहीं पाया है, लिहाजा हाइपरसोनिक मिसाइलों के अजेय होने दावा अब मिथल लगने लगा है, बशर्ते उसमें परमाणु बम ना हो।
रूसी हाइपरसोनिक लंबी दूरी की Kh-47 किंजल मिसाइल या 'डैगर' ने लंबे समय से देश के विरोधियों के बीच डर पैदा किया है। लेकिन, डर का वो तिलस्म भी मई 2023 में टूट गया, जब अमेरिकन पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम ने रूसी किंजल मिसाइल को हवा में मार गिराया।
वहीं, चीन ने इंडो-पैसिफिक में अपनी "ब्लू ड्रैगन" रणनीति के स्टार्ट करने का संकेत देने के लिए अपनी नवीनतम लंबी दूरी की हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल, डोंगफेंग -27 का टेस्ट करने का दावा किया है और एक वीडियो से पता लगता है, कि उसने अमेरिकी विमान वाहक समूह को नष्ट करने के लिए एक सैन्य अभ्यास भी आयोजित किया था।
भारत भी हाइपरसोनिक तकनीक पर भी काम कर रहा है और उसने हैदराबाद में परीक्षण के लिए एक पवन सुरंग बनाई है। भारत ने एयर ब्रीदिंग स्क्रैमजेट इंजन द्वारा संचालित पूर्णतः स्वदेशी हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी प्रदर्शक वाहन का पहला सफल परीक्षण किया है। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने 7 सितंबर 2020 को इसकी घोषणा की थी।












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