पाकिस्तान में रद्द हो जाएगा चैंपियंस ट्रॉफी और SCO समिट? शहबाज शरीफ की सरकार के हाथ पैर फूले

Pakistan News: पाकिस्तान जोर-शोर से चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन की तैयारियां कर रहा है, लेकिन ऐसा लगता है, कि उसका सपना अधूरा ही रह जाएगा। बलूचिस्तान में आतंकवादियों ने जिस तरह से आतंकी हमले करने शुरू किए हैं, उससे पाकिस्तान में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन पर भी ग्रहण लग सकते हैं।

पिछले महीने के अंत में बलूचिस्तान में अलगाववादियों के कॉर्डिनेटेड हमलों में 70 से ज्यादा लोग मारे गए थे और इन आतंकवादियों ने सरकारी बलों और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत परियोजनाओं को निशाना बनाया है।

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पाकिस्तान के गृह मंत्री ने कहा है, कि इन हमलों का मकसद शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन को बाधित करना था और 2025 में होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी को प्रभावित कर सकता है। इस टूर्नामेंट के लिए पाकिस्तान आने वाले भारतीय खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं जताई गई हैं।

बलूचिस्तान, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और जो बलूच लोगों का घर है, वो लंबे समय से अलगाववादी विद्रोह का केंद्र रहा है। अपने विशाल प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद, यह क्षेत्र आर्थिक रूप से वंचित बना हुआ है। और अब यहां के लोगों ने पूरी ताकत से आजादी की मांग करनी शुरू कर दी है। अलग बलूचिस्तान की मांग ने शहबाज शरीफ की सरकार को बेचैन कर दिया है।

सीपीईसी परियोजनाओं पर प्रभाव

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बेल्ट एंड रोड पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका मकसद चीन के साथ बेहतर व्यापार और दक्षिण एशिया में ज्यादा एकीकरण के लिए पाकिस्तान के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना है। CPEC राजमार्गों, रेलवे, पाइपलाइनों और ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से चीन के झिंजियांग क्षेत्र को पाकिस्तान के बलूचिस्तान में ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हमलों की निंदा करते हुए कहा है, कि अलगाववादियों का मकसद सीपीईसी परियोजनाओं को बाधित करना है। बलूचिस्तान में चीन द्वारा वित्तपोषित हवाई अड्डे का उद्घाटन सुरक्षा चिंताओं के कारण स्थगित कर दिया गया है। यह हवाई अड्डा राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बेल्ट एंड रोड पहल के तहत पाकिस्तान के विकास कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण घटक है।

पाकिस्तान में एक के बाद होते हमले

बलूचिस्तान में पिछले कई सालों में सबसे ज्यादा आतंकवादी हमले हुए हैं, और पिछले महीने हुए हमल में 100 से ज्यादा लोगों के मारे गये थे। CPEC का केंद्रबिंदु होने के बावजूद इस क्षेत्र में स्थानीय लोगों के रहने की स्थिति में बहुत कम सुधार हुआ है। इसके कारण ग्वादर के निवासियों के अधिकारों की मांग करते हुए "ग्वादर को हक दो" जैसे आंदोलन शुरू हुए हैं।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने सीपीईसी परियोजनाओं पर चर्चा करने के लिए चीन का दौरा किया था। हालांकि, इस गलियारे ने पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति को प्रभावित किया है और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं। बलूचिस्तान में चल रहा उग्रवाद इन विकास प्रयासों के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है।

हाल ही में हुए हमले पाकिस्तान के सामने अपनी विकास परियोजनाओं को सुरक्षित रखने और स्थानीय शिकायतों को दूर करने में आने वाली चुनौतियों को रेखांकित करते हैं। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, क्योंकि अधिकारी चल रहे संघर्षों के बीच सुरक्षा और प्रगति सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं।

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चैंपियंस ट्रॉफी करवाने का टूट सकता है सपना

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान को 2025 की शुरुआत में बहुप्रतीक्षित चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी भी करनी है, जिस पर भी असर पड़ सकता है।

पाकिस्तान के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज राशिद लतीफ ने हाल ही में कहा है, कि इस बात की "पचास प्रतिशत चांस" है कि भारत, पाकिस्तान का दौरा करेगा, जबकि पूर्व स्पिनर दानिश कनेरिया ने भारतीय खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। कनेरिया ने 'स्पोर्ट्स तक' से कहा, कि "पाकिस्तान की स्थिति को देखिए। मेरा कहना है कि भारतीय टीम को पाकिस्तान नहीं जाना चाहिए।"

उन्होंने कहा, कि "पाकिस्तान को इस बारे में सोचना चाहिए, फिर आईसीसी अपना फैसला लेगा, और सबसे ज्यादा संभावना है, कि यह एक हाइब्रिड मॉडल होगा और यह दुबई में खेला जाएगा।"

वहीं, चीन के पैसों से बने हवाई अड्डे के उद्घाटन को रोक देना पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा झटका है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बेल्ट एंड रोड पहल का हिस्सा यह हवाई अड्डा पाकिस्तान के व्यापक विकास कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसमें ग्वादर में नए 200 मिलियन डॉलर के हवाई अड्डे के पास एक गहरे पानी के बंदरगाह का निर्माण भी शामिल है।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पहले 14 अगस्त को चीनी अधिकारियों के साथ हवाई अड्डे का उद्घाटन करना था। लेकिन अधिकारियों के मुताबिक, जातीय बलूच अधिकार समूह की तरफ से आयोजित धरना प्रदर्शन के कारण कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।

'ग्वादर को हक' दो आंदोलन

सीपीईसी के केंद्र में बलूचिस्तान में एक गहरे समुद्र का बंदरगाह ग्वादर है, जिसे दक्षिण-पश्चिमी चीन और अरब सागर के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार लिंक के रूप में देखा जाता है। क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर के रूप में प्रचारित होने के बावजूद, CPEC बलूचिस्तान के लिए दोधारी तलवार बन गया है।

बलूचिस्तान में ग्वादर है, जो एक गहरे समुद्र का बंदरगाह है और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का केंद्रबिंदु है, जिसे दक्षिण-पश्चिमी चीन और अरब सागर के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार लिंक के रूप में देखा जाता है।

जबकि ग्वादर बंदरगाह को सीपीईसी का 'क्राउन ज्वेल' माना जाता है, लेकिन स्थानीय आबादी ने अपने जीवन स्तर में बहुत कम सुधार देखा है। स्वच्छ पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवा जैसी बुनियादी सुविधाएं अभी भी दुर्लभ हैं। बंदरगाह के विकास ने ग्वादर के मछली पकड़ने वाले समुदाय को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसमें समुद्र तक सीमित पहुंच के कारण कई लोग अपनी आजीविका खो रहे हैं।

इन्हीं दिक्कतों के खिलाफ नवंबर 2021 में "ग्वादर को हक दो" आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें हजारों स्थानीय लोगों ने अपने अधिकारों और बंदरगाह के लाभों से मिलने वाले हिस्से के लिए विरोध प्रदर्शन किया है। ऐसे में चैंपियंस ट्रॉपी पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।

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