इमरान खान ने ही नहीं, 5 और PM ने भी उड़ाए महंगे उपहार, नियम बदलने को मजबूर हुई शहबाज सरकार

new toshakhana policy: उपहारों की स्वीकृति और निपटान के लिए 8 मार्च को नए नियम को मंजूरी दी गई। इसमें यह भी है कि 300 अमरीकी डालर से अधिक मूल्य के सभी उपहारों को राज्य संपत्ति के रूप में तोशेखान में जमा करना होगा।

new toshakhana policy

पाकिस्तान के तोशेखान केस को लेकर बवाल मचा हुआ है। इमरान खान को गिरफ्तार करने में लाहौर और इस्लामाबाद पुलिस की हालत खराब हो रही है। पाकिस्तान के गृहमंत्री ने दावा किया है कि आज रात में किसी भी कीमत पर इमरान खान की गिरफ्तारी हो सकती है। इस बीच शहबाज सरकार ने तोशेखान मामले में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के मुताबिक प्रधानमंत्री, मंत्रियों और अधिकारियों को 300 डॉलर से अधिक कीमत का विदेशी सरकार का कोई भी उपहार खुद के पास रखने से रोक दिया है।

उपहार में बस किताबें छोड़ीं

दरअसल मंगलवार को कैबिनेट डिवीजन की वेबसाइट पर 2002 से 2023 तक के तोशखाना का 466 पेज का रिकॉर्ड जारी किया गया है। इसके अनुसार, परवेज मुशर्रफ, शौकत अजीज, यूसुफ रजा गिलानी, नवाज शरीफ, आसिफ अली जरदारी और इमरान खान ने पीएम पद पर रहते हुए सैकड़ों उपहार ले लिए। सरकार द्वारा तोशाखाना से लिए गए उपहारों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने के बाद हर तरफ इस मुद्दे की चर्चा हो रही है। नवाज शरीफ से लेकर इमरान खान तक, सभी पूर्व शासकों ने तोशखाने में केवल उपहार में दी हुई 9 पुस्तकें छोड़ी हैं।

बीस फीसदी चुकाना होता था मूल्य

इससे पहले ये इन नेताओं को उस नियम का लाभ मिल रहा था, जो किसी भी उपहार को उसकी कीमत का बीस फीसदी भुगतान करने के बाद अपने पास रखने की अनुमति देता है। अब नए नियम के मुताबिक, तीन सौ डॉलर तक के उपहारों को प्राप्तकर्ता द्वारा उसके बाजार मूल्य के अनुसार उचित भुगतान के बाद अपने पास रखने की अनुमति दी जाएगी।

30 दिनों के भीतर जमा करना होगा

नई नीति में ये भी कहा गया है कि सरकारी अधिकारियों को मिलने वाले सभी उपहारों की कीमत चाहे जो भी हो, उन्हें उपहार मिलने के 30 दिनों के भीतर या विदेश यात्रा के मामले में पाकिस्तान लौटने की तारीख से 30 दिनों के भीतर तोशखाना में 'रिपोर्ट' और 'जमा' किया करना होगा। हालांकि, नई नीति में खराब होने वाली वस्तुओं के उपहारों के प्रति उदारता दिखाई गई है जिन्हें 'रिपोर्ट किए बिना या जमा किए बिना' अपने पास रखा जा सकता है।

इमरान को सऊदी में मिला कीमती उपहार

यह मुद्दा तब सुर्खियों में आया, जब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने सऊदी क्राउन प्रिंस द्वारा दी गई एक कीमती घड़ी बेच दिया था और चुनाव आयोग (ईसीपी) से इसकी बिक्री का खुलासा नहीं किया। इसके बाद विपक्षी नेता की शिकायत पर चुनाव आयोग ने कार्रवाई करते हुए उन्हें पिछले साल अयोग्य घोषित कर दिया और उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला शुरू किया गया था।

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