Explainer: पाकिस्तान पर 128 अरब डॉलर का कर्ज, फिर भी चीन से चाहिए और ऋण.. जिन्ना के देश का क्या होगा?
Pakistan Debt News: पाकिस्तान चारों तरफ से संकट से जूझ रहा है और 1947 में इस्लाम के नाम पर बनाए गये इस देश के ऊपर अब 128 अरब डॉलर से ज्यादा का कर्ज हो गया है, जिसकी वजह से पाकिस्तानी विदेशी मुद्रा भंडार करीब करीब साल भर से खाली चल रहे हैं।
इन सबसे बीच चीन ने अपने सबसे बड़े ऋणदाताओं में से एक, चीन से फिर से वित्तीय राहत मांगी है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अनवारुल हक काकर की कार्यवाहक सरकार ने चीन से एक साल के लिए 2 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता मांगी है। काकर की सरकार ने चीनी प्रधान मंत्री ली कियांग से अनुरोध किया है, कि 23 मार्च 2024 को, जब पाकिस्तान के बैंक में जमा चीनी ऋण की अवधि पूरा हो, तो चीन उस ऋण को रोल ओवर कर दे। यानि, वो पैसा चीन फिर से पाकिस्तान को दे दे।
अपने उत्पादन से कहीं अधिक उपभोग करने वाला पाकिस्तान एक ऐसा देश बना हुआ है, जो अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के बजाय अपने बढ़ते घाटे को और ज्यादा ऋणों से पूरा करता है। पाकिस्तान को अगले तीन वर्षों में अरबों का ऋण चुकाना होगा, लेकिन इसका विदेशी मुद्रा भंडार में इतने ही डॉलर बचे हैं, जिससे वो कुछ हफ्तों तक देश की जरूरतों को पूरा कर सकता है।
पाकिस्तान, चीन से कुल 4 बिलियन डॉलर के ऋण की सुरक्षित जमा राशि अपने खाते में लेने में कामयाब रहा है।
कर्ज के समंदर में डूबता पाकिस्तान
पाकिस्तान के कुल सार्वजनिक ऋण में उसका घरेलू और विदेशी ऋण दोनों शामिल हैं। पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में पाकिस्तान के ऋण और देनदारियों का एक व्यापक अनुमान, घरेलू और विदेशी सहित, कुल 77.104 ट्रिलियन रुपये था, जो एक साल पहले 59.772 ट्रिलियन रुपये था।
पाकिस्तान के अगर घरेलू और विदेशी, दोनों ही कर्ज को जोड़ दिया जाए, तो ये कर्ज 280 अरब डॉलर का हो जाता है। वहीं, पाकिस्तान को अपने हर दिन का खर्च चलाने के लिए 14 अरब पाकिस्तानी रुपये ऋण लेना पड़ता है। लिहाजा, लोन के इस आंकड़े में हर दिन इजाफा होता है। इससे पाकिस्तान में रहने वाला हर व्यक्ति लगभग 55,000 रुपये का कर्जदार हो गया है!
पाकिस्तान के विदेशी कर्ज की तुलना एक गुब्बारे से की जा सकती है, जो फूटने की आशंका के साथ लगातार फूलता जा रहा है। सितंबर 2023 में, पाकिस्तान का विदेशी ऋण पिछली तिमाही के 124.6 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में अब 128.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। सभी तिमाहियों के सभी आंकड़े समान रूप से आश्चर्यजनक हैं।
अपने बढ़ते बजट घाटे को पूरा करने और अपने घरेलू ऋण को चुकाने की लागत को कवर करने के लिए, पिछली शहबाज शरीफ की पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट सरकार ने घरेलू स्रोतों, जैसे वाणिज्यिक बैंकों से भारी उधार लिया था।
पिछले साल 15 सितंबर को पाकिस्तानी स्टेट बैंक ने अपने बयान में कहा था, कि पाकिस्तान के पास कुल विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ 6.9 अरब डॉलर ही बचा है।

टॉप-10 कर्ज लेने वाले देशों में पाकिस्तान
127 अरब पाकिस्तान दुनिया के टॉप-10 देशों में शामिल हो गया है, जिसने सबसे ज्यादा विदेशी कर्ज ले रखा है। इस महीने की शुरुआत में, आईएमएफ कार्यकारी बोर्ड ने पाकिस्तान के लिए 700 मिलियन डॉलर की ऋण की किस्त जारी की है, जो उस 1.9 अरब डॉलर में से है, जिसको लेकर पिछले साल मई में समझौता किया गया था।
पाकिस्तान ने कर्ज माफ करने के लिए बीजिंग से बार-बार अनुरोध किया है। 2022 में, पाकिस्तान ने चीन से अपने 6.3 अरब डॉलर के ऋण को जून 2023 में मैच्योर होने पर काफी ज्यादा ब्याज दर पर वापस पाकिस्तान को ऋण देने का अनुरोध किया था।
मार्च 2023 में, चीन ने पाकिस्तान को कुछ राहत देते हुए 2 अरब डॉलर का ऋण रोलओवर कर दिया और जुलाई 2023 में पाकिस्तान ने 1.3 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त ऋण पाकिस्तान को दिया। जिसे हाल ही में पाकिस्तानी सरकार ने चीन को वापस किया है।
हालांकि, चीनी ऋण का रोअवर तत्काल राहत जरूर देता है, लेकिन आने वाले सालों में ऋण का ये आंकड़ा और ज्यादा बढ़ जाता है। पिछले कुछ सालों से चीन जो भी ऋण पाकिस्तान को देता है, उसका ब्याज दर वर्ल्ड बैंक की तुलना में काफी ज्यादा होता है, क्योंकि पाकिस्तान की क्रेडिट रेटिंक काफी खराब हो चुकी है।
इसके अलावा, चीन ने पाकिस्तान को ख्वाब दिखाया था, कि सीपीईसी प्रोजेक्ट से अगले 15 सालों में पाकिस्तान में 60 अरब डॉलर का विदेशी निवेश पहुंचेगा, लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा। चीन से पाकिस्तान में निवेश नहीं, बल्कि अरबों डॉलर का कर्ज पहुंचा, वो भी 7 प्रतिशत की ब्याज दरों पर, लिहाजा चायना-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा, उन्नति नहीं, बल्कि पाकिस्तान के लिए बर्बादी का गलियारा बन गया है।












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