लैंगिक समानता के मामले में पाकिस्तान दुनिया का दूसरा सबसे बदतर देश, भारत में क्या है स्थिति?
इस्लामाबाद, 14 जुलाईः पाकिस्तान को लैंगिक समानता के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे खराब मुल्क माना गया है। विश्व आर्थिक मंच की एक रिपोर्ट से पाकिस्तान में महिलाओं की स्थिति की एक गंभीर तस्वीर का खुलासा हुआ है। पाकिस्तान को 146 देशों की इस लिस्ट में 145 वें नंबर पर रखा गया है।

दूसरा सबसे खराब देश पाक
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) की ओर से बुधवार को जारी नवीनतम ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट में पाकिस्तान को लैंगिक समानता के मामले में दूसरे सबसे खराब देश के रूप में स्थान दिया गया है। इस लिस्ट में लैंगिक समानता के मामले में शीर्ष पांच देशों में क्रमशः आइसलैंड, फिनलैंड, नॉर्वे, न्यूजीलैंड और स्वीडन हैं, जबकि पांच सबसे खराब देशों में अफगानिस्तान, पाकिस्तान, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, ईरान और चैड का स्थान है।

महिलाओं के साथ भेदभाव
आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान में 107 मिलियन महिलाएं हैं। पाकिस्तान में वैश्विक लिंग अंतर 56.4 फीसदी है। पाकिस्तान उन पांच देशों में शामिल है जहां लैंगिक अंतर पांच फीसदी से अधिक है। कतर, अरबैजान, चीन और भारत इसमें शामिल अन्य देश हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां महिलाओं की वरिष्ठ, प्रबंधकीय और विधायी भूमिकाओं में सबसे छोटा हिस्सा मात्र 4.5 प्रतिशत है।

बांग्लादेश सबसे अच्छा
अन्य मापदंडो में भी पाकिस्तान की रैंकिंग देश की दयनीय स्थिति को उजागर करती है। आर्थिक भागीदारी औऱ अवसर के मामले में पाकिस्तान 145वें, शैक्षिक प्राप्ति में 135 वें, स्वास्थ्य और उत्तरजीविता में 143वां और राजनीतिक सशक्तिकरण में यह देश 95वें स्थान पर है। पाकिस्तान को दक्षिण एशिया में भी दूसरे सबसे खराब देश के रूप में स्थान दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश महिलाओं के लिए इस क्षेत्र में सबसे अच्छा देश है। बांग्लादेश को इस लिस्ट में 71वां स्थान मिला है। इसके बाद नेपाल, श्रीलंका, मालदीव, भूटान, भारत, ईरान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान हैं।

भारत की स्थिति भी खराब
भारत इस लिस्ट में बहुत आगे नहीं है। वह भी पाकिस्तान के आस-पास ही है। द. एशिया में भारत से बेहतर स्थान पर बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, मालदीव व भूटान जैसे देश हैं। भारत का इस लिस्ट में 135 वां स्थान है। जबकि नेपाल 96, श्रीलंका 110, मालदीव 117 व भूटान इस लिस्ट में 126वें स्थान पर है। एक साल पहले 2021 में भारत 156 देशों की लिस्ट में 140वें स्थान पर था।

बराबरी में अभी लगेंगे 132 साल
रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में वैश्विक लिंग अंतर 68.1 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है। विश्व आर्थिक मंच ने चेताया है कि कोरोनाकाल के बाद उपजी स्थिति से जीवनयापन के संकट से पूरी दुनिया में महिलाओं के प्रभावित होने की संभावना सबसे ज्यादा है। श्रम बल में आगे लैंगिक अंतर बढ़ने के बाद इसे कम करने में 132 साल और लगेंगे। हालांकि, 2021 में लैंगिक समानता हासिल करने में 136 साल लगने की संभावना जताई गई थी।
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