क्या है अल कादिर ट्रस्ट मामला, जिसमें इमरान ठहराए गए दोषी, पत्नी बुशरा बीबी के साथ मिलकर हड़पे करोड़ों रुपए

एक पाकिस्तानी अदालत ने मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा को उनके प्रधानमंत्री पद के दौरान अल कादिर भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराया है। 72 वर्षीय इमरान खान और उनकी पत्नी कई अन्य मामलों में पहले से ही जेल की सजा काट रहे हैं।

अल कादिर मामले की सुनवाई रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अदियाला जेल में हुई, जिसकी अध्यक्षता न्यायाधीश नासिर जावेद राणा ने की। जैसे ही खान और बुशरा अदालत कक्ष में दाखिल हुए, न्यायाधीश ने उन्हें आरोप पत्र पढ़ा।

 Imran Khan, his wife Bushra Bibi in Al Qadir Trust

इस दौरान न्यायधीष ने रिश्वत के रूप में जमीन लेने के आरोप में उन्हें दोषी ठहराया। हालांकि इमरान खान और उनकी पत्नी ने इस मामले में खुद को निर्दोष बताया। इमरान खान को भ्रष्टाचार के आरोप में उन्हें पहले ही दो मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है, जिसने उन्हें 10 साल तक राजनीति में भाग लेने से अयोग्य घोषित कर दिया था।

क्या है अल कादिर ट्रस्ट केस?

इमरान खान को भ्रष्टाचार के जिस मामले में दोषी ठहराया गया है वो दरअसल अल कादिर ट्रस्ट यूनिवर्सिटी से जुड़ा है। अपने शासन में इमरान खान, उनकी पत्नी बुशरा बीबी और उनके करीबी सहयोगी जुल्फिकार बुखारी और बाबर अवान ने अल-कादिर प्रोजेक्ट ट्रस्ट का गठन किया था, जिसका उद्देश्य पंजाब के झेलम जिले की सोहावा तहसील में 'गुणवत्तापूर्ण शिक्षा' प्रदान करने के लिए अल-कादिर यूनिवर्सिटी की स्थापना करना था।

अब इमरान खान और उनके नजदीकी लोगों पर आरोप है कि उन्होंने दान दी गई जमीन के दस्तावेज में हेरफेर किया था। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि यूनिवर्सिटी के लिए इमरान और उनकी बीवी ने जमीन को गैर कानूनी तरीके से हड़प लिया और दोनों ने पाकिस्तान के सबसे अमीर शख्स मलिक रियाज को गिरफ्तारी के नाम पर धमकाकर अरबों रुपये की जमीन अपने नाम करा ली।

ट्रस्ट को 2021 में अल-कादिर यूनिवर्सिटी नाम के निर्माणाधीन संस्थान के लिए दान के नाम पर लाखों रुपए मिले, जिसका उद्घाटन 5 मई, 2019 को इमरान खान ने किया था। यह घोटाला तब सामने आया जब ये खुलासा हुआ कि ट्रस्ट द्वारा 180 मिलियन पाकिस्तानी रुपये प्राप्त किए गए थे, जबकि रिकॉर्ड में लगभग 8.52 मिलियन पाकिस्तानी रुपये का खर्च दिखाया गया था।

पाकिस्तानी उद्योगपति रियाज हुसैन, उनके बेटे अहमद अली रियाज, मिर्ज़ा शहजाद अकबर और जुल्फी बुखारी भी इस मामले में संदिग्धों में से हैं, लेकिन जांच और उसके बाद की अदालती कार्यवाही में शामिल होने के बजाय, वे फरार हो गए थे। बाद में उन्हें अपराधी घोषित कर दिया गया।

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