Pahalgam Terror Attack: "अगर पानी नहीं बहेगा, तो खून बहेगा" सिंधु जल समझौते पर बिलावल भुट्टो की गीदड़ धमकी
Pahalgam Terror Attack: पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी ने हाल ही में पहलगाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने के निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया दी। एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा,"मैं भारत को साफ-साफ बता देना चाहता हूं - सिंधु हमारी है और हमेशा हमारी ही रहेगी। अगर इसमें पानी नहीं बहेगा, तो खून बहेगा - या तो हमारा या उनका।"
उन्होंने भारत पर यह भी आरोप लगाया कि वह अपनी आंतरिक सुरक्षा की विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान को बलि का बकरा बना रहा है। सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) दक्षिण एशिया के सबसे टिकाऊ और ऐतिहासिक जल समझौतों में से एक मानी जाती है। यह समझौता 19 सितंबर 1960 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच हुआ था।

1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई ऐतिहासिक सिंधु जल संधि
इस समझौते की शर्तों के मुताबिक, भारत को पूर्वी नदियाँ - रावी, ब्यास और सतलुज - मिलीं, जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियाँ - सिंधु, झेलम और चिनाब - आवंटित की गईं। संधि में जल बंटवारे के अलावा, इन नदियों के प्रयोग, प्रबंधन और किसी भी विवाद के समाधान के लिए एक विस्तृत रूपरेखा दी गई है।
भारत ने 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई ऐतिहासिक सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty - IWT) पर पुनर्विचार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल के बंटवारे को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता रही है, जिसने दशकों तक दोनों देशों के संबंधों में स्थिरता बनाए रखी। युद्धों के समय भी यह संधि कायम रही है।
इस संधि की सबसे अहम बात यह है कि इस संधि में न तो कोई समाप्ति की अवधि है और न ही कोई पक्ष इसे एकतरफा रूप से रद्द कर सकता है। अगर किसी तरह का विवाद उत्पन्न होता है, तो अनुच्छेद IX के तहत एक त्रिस्तरीय समाधान व्यवस्था मौजूद है - पहले प्रयास में स्थायी सिंधु आयोग के ज़रिए, अगर समाधान न निकले तो एक तटस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति, और अंतिम उपाय के रूप में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय का सहारा लिया जाता है।
सिंधु जल संधी पर संकट
- 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध
- स्थिति: इन युद्धों के दौरान भी यह संधि लागू रही और दोनों देशों ने इसका उल्लंघन नहीं किया।
- 1999 - कारगिल युद्ध
- स्थिति: पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम उल्लंघन और घुसपैठ के बावजूद भारत ने जल प्रवाह नहीं रोका।
- 2001 और 2008 के आतंकी हमले (जैसे संसद हमला और मुंबई हमला)
- स्थिति: आतंकवाद के कारण भारत में संधि रद्द करने की मांग तेज हुई थी।
- 2016 - उड़ी आतंकी हमला
- स्थिति: पाकिस्तान-प्रेरित आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,
- "रक्त और पानी एक साथ नहीं बह सकते।"
- 2019 - पुलवामा आतंकी हमला
- स्थिति: भारत ने बगलीहार और रतले जैसी परियोजनाओं को लेकर ठोस रुख अपनाया।
- 2023 - भारत ने संधि की पुनर्समीक्षा की मांग की
- स्थिति: भारत ने विश्व बैंक को पत्र लिखकर पाकिस्तान की आपत्ति जताने की आदत को लेकर चिंता जताई।
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