जहां से सुभाष चंद्र बोस ने दिया ‘दिल्ली चलो’ का नारा, वह स्थान बनेगा सिंगापुर का राष्ट्रीय स्मारक
सिंगापुर, 09 अगस्तः सिंगापुर में आज 57वां राष्ट्रीय दिवस मनाया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर सिंगापुर में प्रतिष्ठित हरित स्थल 'पडांग' को 75वां 'राष्ट्रीय स्मारक' घोषित किया जाएगा। पडांग ही वह जगह है, जहां से नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जुलाई 1943 में 'दिल्ली चलो' का नारा दिया था। यह प्रतिष्ठित स्थल सिंगापुर के 74 अन्य राष्ट्रीय स्मारकों की लिस्ट में शामिल होने वाला पहला हरा-भरा और खुला स्थान होगा।

संरक्षित किया जाएगा स्मारक
सिंगापुर के राष्ट्रीय विरासत बोर्ड (NHB) ने सोमवार को कहा कि स्मारक को संरक्षित किया जाएगा। स्मारक संरक्षण अधिनियम के तहत इसके सशक्त राष्ट्रीय, ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व को देखते हुए इसे उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान की जाएगी। संस्कृति, समुदाय और युवा मंत्री एडविन टोंग ने सोमवार को कहा, 'पडांग सिंगापुर की ऐतिहासिक यात्रा के लिए एक वसीयतनामा के रूप में खड़ा है, जो हमारी सिंगापुर की पहचान को दर्शाता है और दुनिया में हमारी जगह को दर्शाता है।'
'पडांग' से जुड़ा है देश का इतिहास
पडांग नामक यह स्थान सिंगापुर के इतिहास में महत्वपूर्ण कई मील के पत्थरों के संग जुड़ा हुआ है। यहां पर 12 सितंबर 1945 को सिंगापुर में जापानियों के औपचारिक आत्मसमर्पण का जश्न मनाने वाली विजय परेड का आयोजन हुआ था। इसके अलावा 3 जून 1959 को पहली पूर्ण निर्वाचित विधानसभा की विजय रैली, मलय में जन्मे पहले राज्य प्रमुख के रूप में यूसुफ इशाक के शासन की स्थापना, राष्ट्रीय प्रतीकों का तीन दिसंबर, 1959 को अनावरण तथा नौ अगस्त 1966 को राष्ट्रीय दिवस परेड का उद्घाटन शामिल है।
पडांग सबसे पुराने स्थलों में से एक
पडांग सिंगापुर के सबसे पुराने सार्वजनिक मनोरंजन या समारोह स्थलों में से एक है। यह प्रारंभिक औपनिवेशिक काल से खेल आयोजनों की मेजबानी करता रहा है। सिंगापुर के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में दक्षिण एशियाई अध्ययन के प्रमुख प्रोफेसर राजेश राय ने पडांग के आजाद हिन्द फौज (INA) के साथ संबंध के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि सिंगापुर में भारतीय समुदाय के लिए पडांग का विशेष महत्व है, क्योंकि यहां पर अंग्रेजों ने जब अपनी पहली चौकी स्थापित की तब भारतीय सिपाहियों ने भी अपना सबसे पहला कैंप स्थापित किया था।
राजेश राय ने सोमवार को बताया, 'यह पडांग ही था, जहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने हजारों आईएनए सैनिकों और स्थानीय भारतीय आबादी के लिए कई भाषण दिए थे। यहीं पर उन्होंने 'दिल्ली चलो' का नारा भी दिया था और 'झांसी की रानी' नामक रेजिमेंट की स्थापना की थी। युद्ध खत्म होने से ठीक पहले बोस ने पडांग के दक्षिणी किनारे पर आईएनए स्मारक की स्थापना की थी।
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