ओजोन परत में सुधार के संकेत- संयुक्त राष्ट्र
ओजोन परत की दिन ब दिन गिरती हालात देख कर दुनिया चितिंत हो आई थी, लेकिन अब इससे जुड़ा एक सकारात्मक रिजल्ट सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र के एक अध्य्यन में बताया गया है कि ओजोन परत में सुधार के संकेत देखने को मिल रहे हैं। आपको बता दें, ओजोन परतें हमें सूर्य की पैराबैंगनी(अल्ट्रावॉयलेट) किरणों से बचाती है।

संयुक्त राष्ट्र के अध्य्यन में दावा किया गया है कि ओज़ोन की परत में अंटार्कटिका के ऊपर हर साल दिखने वाले छेद का बड़ा होना भी रुक गया है। साल 2006 में इस छेद को काफी बड़ा पाया गया था। जिसके बाद तमाम राष्ट्रों ने इस ओर सक्रिय कदम उठाए थे। रिपोर्ट के अनुसार, इस छेद के सिकुड़ने में एक दशक का समय लगेगा।
1970 में वैज्ञानिकों ने माना कि ओजोन परत की जर्जर होती स्थिति का कारण फ्रिज एवं अन्य उपकरणों में इस्तेमाल होने वाला गैस सीएफ़सी (क्लोरो फ़्लोरो कार्बन) है। इसके बाद सीएफसी गैसों के इस्तेमाल पर रोक लगाने का शुरुआत किया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि ओज़ोन को हानि पहुंचाने वाली सीएफ़सी गैसों को चलन से बाहर करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण ही यह संभव हो पाया है।
डब्ल्यूएमओ के महासचिव माइकल जाऱॉड ने कहा, 'ओज़ोन परत को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए उपाय ही इस पर्यावरणीय सफलता के पीछे के बड़े कारण हैं।' उन्होंने कहा, 'क्लिक करेंजलवायु परिवर्तन जैसी इससे भी बड़ी समस्याओं से निपटने में ऐसी ही तत्परता और एकता दिखाने के लिए यह हमें प्रोत्साहित करता है।'












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