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राहुल गांधी को जयशंकर का जवाब, बोल- चीन ने आज नहीं, 1962 में ही उस जमीन पर कब्जा किया था

एस जयशंकर ने कहा कि विदेशी अखबार भारत सरकार के लिए नकारात्मक भाव के साथ 'हिन्दू राष्ट्रवादी' जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं लेकिन अमेरिका और यूरोप की सरकारों को कभी क्रिश्चियन राष्ट्रवादी नहीं कहा जाता।

jaishankar china land issue

File Image

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है। एस जयशंकर ने कहा कि कुछ लोग चीन मुद्दे को लेकर झूठ फैला रहे हैं जो कि राजनीति के लिए सही नहीं है। विदेश मंत्री जयशंकर ने सिंधु जल विवाद को लेकर भी सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि ये तकनीकि मामला है, दोनों देशों के अधिकारी इसे लेकर बात करेंगे।

झूठ फैला रहा विपक्ष

झूठ फैला रहा विपक्ष

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर पुणे में अपनी अंग्रेजी किताब "द इंडिया वे: स्ट्रैटेजीज फॉर एन अनसर्टेन के मराठी अनुवाद 'भारत मार्ग' के विमोचन समारोह में पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे। इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग चीन मुद्दे को लेकर, कुछ जमीन की बात करते हुए झूठ फैला रहे हैं जो उन्होंने 1962 में लिया था। राजनीति के लिए ये सही नहीं है। उन्होंने कहा कि वे ऐसे हावभाव व्यक्त कर रहे हैं जैसे ये हाल ही में हुआ हो। जयशंकर ने कहा कि मुझे पता है कि वे भी राजनीति कर रहे हैं।

चीन ने 1962 में ही ले ली थी जमीन

चीन ने 1962 में ही ले ली थी जमीन

विदेश मंत्री ने कहा कि कई बार वे कुछ जमीन को लेकर बात करते हैं जो चीन ने 1962 में ही ले लिया था। लेकिन वे ये सच नहीं बोलते। उन्होंने कहा कि वे आपके सामने ऐसा दिखाएंगे जैसे ये चीज कल ही हुई हो। उन्होंने कहा कि भारत की जमीन पर चीनी कब्जे को लेकर अगर उनकी जानकारी में कोई कमी है, तो वे फौज या फिर इंटेलिजेंस से बात करेंगे। राहुल गांधी पर तंज करते हुए उन्होंने तंज करते हुए कहा कि मैं चीनी राजदूत को बुलाकर जानकारी नहीं मांगता।

सिंधु जल समझौते पर कही ये बात

सिंधु जल समझौते पर कही ये बात

जयशंकर ने जल बंटवारे को लेकर जुड़े सवाल का जवाब देते हुए कहा- पाकिस्तान में इस समझौते को लेकर क्या स्थिति है, इसके बारे में सबके सामने कुछ भी कहने का हक मुझे नहीं है। यह उनका टेक्निकल मैटर है। दोनों ही देशों के अधिकारी सिंधु जल संधि को लेकर बातचीत कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारत की तुलना पांडवों से की। पांडवों का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह वे अपने रिश्तेदारों का चयन नहीं कर सकते थे, उसी तरह से हम भी अपने पड़ोसी का चयन नहीं कर सकते।

क्रिश्चियन राष्ट्रवादी क्यों नहीं कहा जाता?

क्रिश्चियन राष्ट्रवादी क्यों नहीं कहा जाता?

एस जयशंकर ने कहा कि विदेशी अखबार भारत सरकार के लिए नकारात्मक भाव के साथ 'हिन्दू राष्ट्रवादी' जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं लेकिन अमेरिका और यूरोप की सरकारों को कभी क्रिश्चियन राष्ट्रवादी नहीं कहा जाता। ऐसे शब्द केवल हमारे लिए ही इस्तेमाल किए जाते हैं। उन्होंने आगे कहा- अगर हम पिछले 9 सालों को देखें, तो इसमें कोई संशय नहीं है कि आज की सरकार और राजनीति दोनों ही राष्ट्रवादी है। इसमें कुछ गलत नहीं है। विदेशों में राष्ट्रवादी लोगों ने ही अपने देशों को आगे बढ़ाया है और बुरे हालातों से बाहर निकाला है।

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