ब्रिटेन की राजनीति पर चरमपंथी मुसलमानों का कब्जा, यहूदी समर्थक ब्रिटिश सांसदों को प्राइवेट गार्ड दे रहे सुनक
ब्रिटेन के राजनेताओं को गाजा युद्ध में इजराइल का समर्थन करने की एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। ब्रिटेन के कई सासंदों को कट्टरपंथी मुसलमानों से जान की धमकियां मिल रही हैं। यही वजह है कि कई ब्रिटिश सांसदों को निजी अंगरक्षक नियुक्त करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हाल में ही 3 ब्रिटिश महिला सांसदों को अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराई गई है। हालांकि इन सांसदों के नाम का खुलासा अभी नहीं किया गया है। प्रधानमंत्री ऋषि सनक ने ब्रिटिश सांसदों को सीधे धमकियों के बाद एक बयान जारी कर कहा कि देश के लोकतांत्रिक और बहुआस्था वाले मूल्य चरमपंथियों की वजह से खतरे में पड़ रहे हैं।

सांसदों को जान से मारने की धमकियों का सामना करने के कारण, आगामी ब्रिटिश आम चुनाव में बड़ी भीड़ के बीच प्रचार करना जोखिम भरा होगा। वहीं, ब्रिटिश राजनेता ही हिंसा के खतरे में नहीं हैं। बल्कि आम लोग भी इससे इतने ही प्रभावित हैं।
जिस लंदन को दुनिया का सबसे विकसित शहर कहा जाता था अब वह अपने अपराध के लिए जाना जाने लगा है। मोपेड पर चाकू लेकर चलने वाले युवा गिरोह महंगी घड़ियाँ, मोबाइल फोन और अन्य सामान छीन ले रहे हैं। कई भारतीय पर्यटक मध्य लंदन में दिनदहाड़े लूटे जाने की शिकायत कर चुके हैं।
हाल ही में पूर्व विश्व मुक्केबाजी चैंपियन आमिर खान को बंदूक की नोक पर पूर्वी लंदन में लूट लिया गया था। इसमें उन्हें अपनी 70,000 पाउंड की फ्रैंक मुलर घड़ी गंवानी पड़ी थी। लंदन को अपराध से भरे महानगर में तब्दील करने के लिए जिस व्यक्ति को दोषी ठहराया जा रहा है, वह मेयर सादिक खान हैं। उनके राज में लंदन में अपराध बढ़ गया है।
ब्रिटिश पर्यटन अधिकारियों ने लंदन पुलिस को चेतावनी जारी की है कि विदेशी छुट्टियां मनाने वालों के पास लंदन के अलावा यूरोप में घूमने के लिए अधिक सुरक्षित शहर हैं और पर्यटकों के लिए शहर को सुरक्षित बनाने के लिए और अधिक कार्रवाई की आवश्यकता है।
लंदन की जनसांख्यिकी तेजी से बदल रही है। नवीनतम जनगणना के अनुसार, ब्रिटिश गोरे अब लंदन की आबादी का केवल 30 प्रतिशत हैं। लंदन में स्थायी रूप से रहने वाले अन्य यूरोपीय श्वेतों की संख्या अन्य 20 प्रतिशत है। शेष 50 प्रतिशत भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन और कैरेबियन के जातीय अल्पसंख्यक हैं।
लंदन अपने इतिहास में पहली बार श्वेत-अल्पसंख्यक शहर बनने जा रहा है। सिर्फ 100 साल पहले, लंदन में 98 फीसदी लोग गोरे हुआ करते थे। ब्रिटेन में, विशेष रूप से लंदन और अन्य बड़े शहरों में इस्लामवादियों की भारी उपस्थिति, ब्रिटिश सांसदों के लिए आम चुनाव से पहले ही खतरे को बढ़ा सकती है।
पिछले साल ही इजराइल पर हमले के बाद मध्य लंदन में फिलिस्तीन समर्थक रैली में लगभग 100,000 लोग शामिल हुए थे। इस दौरान इन लोगों को जिहाद के नारे लगाते हुए सुना गया था। दरअसल लंदन की पुलिस पर आरोप लगा था कि उन्होंने जिहाद के समर्थन में नारे लगाते लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
इससे पहले पूर्व ब्रिटिश गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने दावा किया था कि ब्रिटेन को इस्लामवादी चला रहे हैं। दरअसल, लंदन इस्लामी चरमपंथियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन गया है। पाकिस्तान मूल के मेयर सादिक खान, जो 2016 से पद पर हैं, पर इस्लामवादियों के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप है क्योंकि वह मेयर चुनावों में मुस्लिम वोटों पर भरोसा करते हैं।
ऐसा दावा किया जाता है कि भारत की तरह, ब्रिटेन में भी मुसलमान गुटों में वोट करते हैं। पिछले हफ्ते ग्रेटर मैनचेस्टर के एक शहर रोशडेल में हुए उपचुनाव में विवादास्पद राजनेता जॉर्ज गैलोवे की जीत से यह उजागर हुआ था। इस उपचुनाव के परिणामों से पता चला कि गाजा युद्ध ब्रिटिश राजनीति को कितनी गहराई से प्रभावित कर रहा है।
जनमत सर्वेक्षणों में लेबर पार्टी को कंजर्वेटिव पार्टी पर 15 प्रतिशत से अधिक की बढ़त मिल रही है। ऐसे में लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर को भावी ब्रिटिश प्रधानमंत्री माना जा रहा है। इस बीच हुआ ये कि कीर स्टार्मर ने यहूदी विरोधी टिप्पणी के कारण अपनी लेबर पार्टी के उम्मीदवार अजहर अली को सस्पेंड कर दिया।
चुनाव में इसका फायदा जॉर्ज गैलोवे को मिला। लेबर उम्मीदवार के लिए पार्टी के समर्थन के अभाव में, गैलोवे ने जोरदार जीत हासिल की। मुस्लिमों ने गैलोवे का जमकर समर्थन किया। गैलावे ब्रिटेन की छोटी वर्कर्स पार्टी का नेतृत्व करते हैं, और फिलिस्तीन के एक मजबूत समर्थक हैं।
गैलोवे के पक्ष में के पक्ष के जबरदस्त समर्थन ने कीर स्टार्मर को चिंतित कर दिया और उन्हें बाद में इसके लिए माफी तक मांगनी पड़ी। इस साल के अंत तक ब्रिटेन में चुनाव होने की संभावना है। इसी बीच गैलोवे अपनी खतरनाक राजनीति से स्टार्मर और सुनक दोनों के लिए परेशानी बनते जा रहे हैं।
अपनी पार्टियों के मतभेदों को किनारे रखते हुए, स्टार्मर और सुनक इजराइल का समर्थन करने के लिए एक साथ आए हैं, जो युवा ब्रितानियों, श्वेत और जातीय अल्पसंख्यकों दोनों को अलग-थलग कर सकता है। यह आम चुनाव के नतीजे को कम पूर्वानुमानित बना सकता है।












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