‘हम इतिहास में सही के साथ हैं,’ यूक्रेन युद्ध में चीन का रूस को खुला समर्थन, अमेरिकी धमकी बेअसर
यूक्रेन युद्ध के बीच में चीन ने कहा है कि यह "इतिहास में सही के साथ" है, भले ही वैश्विक दबाव मास्को को अलग करने के लिए बढ़ता जा रहा है।
बीजिंग/वॉशिंगटन, मार्च 20: यूक्रेन युद्ध में चीन ने खुले तौर पर रूस का समर्थन कर दिया है और अमेरिकी धमकी एक बार फिर से चीन के सामने बेसअर साबित हो गई है। अमेरिका ने चीन को धमकी दी थी, कि अगर उसने रूस की मदद की, तो फिर उसे भी गंभीर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा, जिसके जवाब में अब चीन ने कहा है कि, 'वह इतिहास में सही के साथ है'।

‘इतिहास में सही के साथ’
यूक्रेन युद्ध के बीच में चीन ने कहा है कि यह "इतिहास में सही के साथ" है, भले ही वैश्विक दबाव मास्को को अलग करने के लिए बढ़ता जा रहा है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपनी ताजा टिप्पणी में कहा है कि, 'चीन की स्थिति ज्यादातर देशों की इच्छा के अनुरूप है। चीन कभी भी किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा और किसी भी निराधार आरोप और संदेह का विरोध करेगा। समय साबित करेगा कि चीन के दावे इतिहास के सही तरफ हैं।" चीन के विदेश मंत्री की ये टिप्पणी यूक्रेन युद्ध के बीच काफी अहम है, क्योंकि अमेरिका ने इससे पहले भारत को लेकर एक बयान में कहा था कि, 'इतिहास तय करेगा, कौन किसके साथ है'।

बाइडेन ने दी थी चेतावनी
आपको बता दें कि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शुक्रवार को शी जिनपिंग के साथ एक वीडियो कॉल के दौरान चीनी राष्ट्रपति को 'परिणाम भुगतने' की चेतावनी दी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि, अगर चीन यूक्रेन पर अपने हमले में मास्को को कोई भौतिक समर्थन देता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। हालांकि, चीन ने युद्ध को लेकर चिंता जरूर जताई है और नाटो देशों से रूस के साथ बातचीत करने का आह्वान किया है। हालांकि, यूक्रेन पर आक्रमण और हमले को लेकर अभी तक चीन ने रूस पर हमला करने के लिए अभी तक ना ही निंदा की है और ना ही रूस को दोषी ठहराने की कोशिश की है। चीनी विदेश मंत्री के एक बयान के अनुसार, शी जिनपिंग द्वारा भेजा गया सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह था, कि "चीन हमेशा विश्व शांति बनाए रखने के लिए एक ताकत की तरह काम कर रहा है"।

रूस पर प्रतिबंध अपमानजनक
वहीं, रूस को समर्थन का संकेत देते हुए चीनी उप विदेश मंत्री ले युचेंग ने शनिवार को मास्को पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को "अपमानजनक" कहा है। बीजिंग के अनुसार, रूस के पास वैध 'सुरक्षा चिंताएं' हैं, और उसने संघर्ष को समाप्त करने के लिए डिप्लोमेटिक समधान खोजने का आग्रह किया है। आपको बता दें कि, 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, जिसे पश्चिमी देशों ने युद्ध बताते हुए रूस को प्रतिबंधों के जाल में बांध दिया है। रूस को वैश्विक पेमेंट सिस्टम 'स्विफ्ट' से भी बाहर कर दिया गया है। जबकि, पश्चिमी देशों ने तेल छोड़कर... रूस के साथ करीब करीब हर तरह के संबंध तोड़ दिए हैं।

जब इतिहास लिखा जाएगा....
आपको बता दें कि, अमेरिका ने रूस से भारत के तेल खरीदने को लेकर भी इतिहास लिखे जाने का हवाला दिया था। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने पिछले हफ्ते अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रिपोर्टर्स से बात करके हुए कहा है कि, "किसी भी देश के लिए हमारा संदेश यह है, कि हमने जो प्रतिबंध लगाए हैं, हम सभी उन प्रतिबंधों का पालन करें, जो अनुशंसित हैं।" वहीं, जब भारत द्वारा रियायती कच्चे तेल की रूसी पेशकश को स्वीकार करने की संभावना के बारे में एक रिपोर्ट के बारे में पूछा गया, तो व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने कहा कि, "मुझे नहीं लगता कि यह (प्रतिबंधों) का उल्लंघन होगा।" व्हाइट हाउस की तरफ से आगे कहा गया कि, "लेकिन यह भी सोचें कि जब इतिहास की किताबें इस वक्त के बारे में लिखा जाएगा, तो आप कहां खड़ा होना चाहते हैं?

रूस पर भारी आक्रामक अमेरिका
रूसी नेतृत्व के लिए समर्थन एक आक्रमण के लिए समर्थन है, जो स्पष्ट रूप से विनाशकारी प्रभाव डाल रहा है''। आपको बता दें कि, भारत ने यूक्रेन पर रूसी आक्रमण का समर्थन नहीं किया है। नई दिल्ली ने लगातार सभी हितधारकों से बातचीत के जरिए मतभेदों को सुलझाने की अपील की है। हालांकि, इसने रूस के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के सभी प्रस्तावों में वोटिंग में गैर-हाजिर रहने का विकल्प चुना। वहीं, अमेरिका के सांसदों की तरफ से भी लगातार भारत पर प्रेशर बनाने की कोशिश की जा रही है और भारतीय मूल के अमेरिकी सांसदों ने भी भारत सरकार से रूस की निंदा करने की मांग की है। लेकिन, चीन ने साफ कर दिया है, कि वो अमेरिका के प्रेशर में नहीं आएगा और वो रूस का ही साथ देगा।

रूस का चीन पर बयान
इस बीच, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि, चीन के साथ रूस का सहयोग पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की वजह से 'और मजबूत होगा'। लावरोव ने शनिवार को एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान कहा, "ऐसे समय में जब पश्चिम स्पष्ट रूप से उन सभी नींवों को कमजोर कर रहा है जिन पर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था आधारित है, हमें दो महान शक्तियों के रूप में यह सोचने की जरूरत है कि इस दुनिया में कैसे आगे बढ़ना है।"












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