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शोधकर्ताओं को मिला 790 चोटों के साथ 3000 साल पुराना कंकाल, सच्चाई ऐसी जो बन गई बड़ी उपलब्धि

सेटो इनलैंड सी, जून 28: जापान में सेटो इनलैंड सी के पास वैज्ञानिकों को एक पुरातात्विक जगह पर 3000 साल पुराना एक मानव कंकाल मिला है, जिसे शोधकर्ताओं की ओर से इसे इंसान पर शार्क के हमले का अब तक का सबसे पुराना शिकार माना जा रहा है। वैज्ञानिकों को मिला यह कंकाल एक वयस्क पुरुष का बताया जा रहा है, जिसके कई फ्रैक्चर और वी आकार के नुकीले निशान समेत 790 चोटें हैं। यहां तक की उसका दायां पैर भी गायब है।

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    Japan में 3000 साल पुराने Skeleton पर रिसर्च, Shark ने किए थे 790 बार वार । वनइंडिया हिंदी
     1370 से 1010 ईसा पूर्व का कंकाल

    1370 से 1010 ईसा पूर्व का कंकाल

    दरअसल, जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजिकल साइंस में प्रकाशित रिसर्च के बाद शोधकर्ताओं के एक अंतरराष्ट्रीय समूह ने ओकायामा प्रीफेक्चर इलाके में सुकुमो पुरातात्विक स्थल पर एक कब्रगाह से खोदे गए कंकाल के साथ जो हुआ था उस पर फिर से रिसर्च करने का प्रयास किया। इस दौरान उनके विश्लेषण के अनुसार कंकाल एक युवा से लेकर मध्यम आयु वर्ग के व्यक्ति का था, जो संभवतः 1370 से 1010 ईसा पूर्व के बीच की बताया जा रहा है।

    शरीर के अलग हो गए पैर, 800 गंभीर चोट

    शरीर के अलग हो गए पैर, 800 गंभीर चोट

    सुकुमो में खुदाई से निकले कंकाल को 'नंबर 24' के नाम से जाना जाता है। उसके शरीर को लगभग 800 गंभीर चोटों का सामना करना पड़ा, जो शार्क के हमले की विशेषता थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह इंसानों पर शार्क के हमले का सीधा प्रमाण है। हमले के निशानों को देखते हुए शोधकर्ताओं का मानना ​​​​है कि हमला बहुत हिंसक था, वहीं यह भी कहना है की उस शख्स की मौत जल्दी नहीं हुई थी या तो ज्यादा खून बहने से या फिर सदमे से उनकी जान गई थी। वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि उनका दाहिना पैर गायब था और दफनाने के वक्त उनका बायां पैर उनके शरीर के ऊपर उल्टी स्थिति में रखा गया था।

    टाइगर शार्क या व्हाइट शार्क का हमला!

    टाइगर शार्क या व्हाइट शार्क का हमला!

    लाइव साइंस के अनुसार शोधकर्ताओं ने पेपर में लिखा कि आदमी उस समय साथियों के साथ मछली पकड़ रहा होगा, उस वक्त शार्क के हमले की चपेट में आया होगा। शरीर पर मिले दांतों के निशान के यह साफ होता है कि मौत के लिए टाइगर शार्क या व्हाइट शार्क जिम्मेदार हो सकती है। इसके अलावा रिसर्च के नतीजों में यह भी सामने आया कि शरीर पर मिले घावों से पता चलता है कि वह हमले के बाद जीवित था।

    पुरातत्वविदों का एक दुर्लभ उदाहरण

    पुरातत्वविदों का एक दुर्लभ उदाहरण

    जर्मनी के जेना में मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर द साइंस ऑफ ह्यूमन हिस्ट्री के पुरातत्वविद्, सह-लेखक मार्क हडसन ने एक बयान में कहा कि पुरातात्विक अभिलेखों में शार्क का ऐसा हमला शायद ही कभी देखा जाता है। यह खोज न केवल प्राचीन जापान पर एक नया दृष्टिकोण प्रदान करती है बल्कि पुरातत्वविदों का एक दुर्लभ उदाहरण भी है, जो प्रागैतिहासिक समुदाय के जीवन को पुनर्निर्माण करने में सक्षम है। यानी की यह एक शोधकर्ता की बड़ी उपलब्धि है, जिससे प्राचीन जापान के लोगों की जीवनशैली को समझने में मदद मिलेगी।

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