सऊदी अरब का इनकार तो मोदी सरकार का करारा वार, दोस्ती में दादागिरी नहीं चलेगी!

कच्चे तेल को लेकर भारत और सऊदी अरब में तनातनी बढ़ गई है। भारत ने सऊदी अरब से कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने को कहा था, जिसे सऊदी अरब ने इनकार कर दिया।

नई दिल्ली/रियाद: कच्चे तेल को लेकर भारत और सऊदी अरब सरकार में तनातनी बढ़ती नजर आ रही है। सऊदी सरकार की तरफ से कच्चे तेल को लेकर भारत को बड़ा झटका दिया गया है जिसके बाद भारत ने भी सऊदी अरब पर बड़ा पलटवार करने की तैयारी कर ली है। मोदी सरकार ने सऊदी अरब को करारा जबाव देने की कड़ी तैयारी कर ली है और माना जा रहा है कि मोदी सरकार की प्लानिंग से सऊदी अरब को बहुत बड़ा खामियाजा आने वाले वक्त में भुगतना पड़ेगा।

सऊदी अरब ने किया इनकार

सऊदी अरब ने किया इनकार

सऊदी अरब और भारत के बीच काफी अच्छे संबंध रहे हैं और मोदी सरकार के कार्यकाल में दोनों देश काफी करीब भी आए हैं। मोदी सरकार के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच कई करार भी हुए हैं वहीं कश्मीर मुद्दे पर सऊदी अरब ने भारत का ही साथ दिया है। लेकिन, कच्चे तेल को लेकर भारत और सऊदी अरब के बीच तनातनी का माहौल बन गया है। सऊदी अरब क्राउन प्रिंस और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच पिछले हफ्ते टेलीफोनिक बातचीत हुई थी, जिसमें दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और भी ज्यादा मजबूत बनाने की बात की थी। पीएम मोदी ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से उस वक्त बात की थी जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने क्राउन प्रिंस से बात करने से इनकार कर दिया था। लेकिन, बावजूद इसके सऊदी अरब ने कच्चे तेल को लेकर भारत को झटका दिया है।

भारत को झटका

भारत को झटका

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सऊदी क्राउन प्रिंस की बातचीत के बाद तेल को लेकर दोनों देशों के बीच गंभीर मतभेत पनप गये हैं। दरअसल, मोदी सरकार किसी भी तरह से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी लाना चाहती है, जिसके लिए भारतीय तेल कंपनियों को ज्यादा से ज्यादा तादाद में तेल चाहिए। भारत सबसे ज्यादा कच्चे तेल की आयात ओपेक देशों से करता है, जिसमें सऊदी अरब शामिल है। भारत सऊदी अरब से सबसे ज्यादा कच्चे तेल की खरीदारी करता है लेकिन सऊदी अरब ने कच्चे तेल के उत्पादन में कमी कर दी है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ा है। भारत ज्यादा कच्चे तेल की आयात करना चाहता है जो उसे सऊदी अरब से मिल नहीं रहा है। ऐसे में भारत सरकार की तरफ से सऊदी अरब से कच्चे तेल के उत्पादन में इजाफा करने की मांग की गई थी, जिसे सऊदी अरब सरकार ने खारिज कर दिया।

सऊदी अरब से नहीं मिली रियायत

सऊदी अरब से नहीं मिली रियायत

दरअसल, भारत सरकार को उम्मीद थी कि उसके अनुरोध पर सऊदी अरब कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा देगा और जिससे भारत कच्चे तेल की आयात बढ़ा सकता है। लेकिन, सऊदी अरब ने भारत से कहा कि उसने पिछले साल जो तेल खरीदा है, पहले उस तेल को खर्च करे। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अजीज से जब भारत के अनुरोध के बारे में पूछा गया तो उन्होंने भारत के अनुरोध को खारिज कर देने की बात कह दी थी। सऊदी अरब का इनकार भारत के लिए बहुत बड़ा झटका था। भारत ने ईरान से कच्चे तेल की आपूर्ति कम करके सऊदी अरब से आयात को बढ़ा दिया था। लेकिन सऊदी अरब ने कच्चे तेल का उत्पादन कर अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में काफी इजाफा ला दिया है और उसी का असर है कि भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमत काफी ज्यादा है, जिसे मोदी सरकार कम करना चाहती है लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही है।

अब भारत लेगा बदला

अब भारत लेगा बदला

भारत विश्व के उन टॉप देशों में शामिल है, जो सबसे ज्यादा कच्चे तेल की आयात करता है और खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था कच्चे तेल पर ही निर्भर है। लेकिन, सऊदी अरब के इनकार के बाद अब भारत ने ओपेक प्लस देशों पर निर्भरता कम करने का ऐलान कर दिया है। यानि, भारत सरकार की तरफ से कहा गया है कि वो अब सऊदी अरब समते खाड़ी देशों से कच्चे तेल की आयात कम देगा और उसकी जगह दूसरे विकल्पों की तरफ ध्यान देगा। ओपेक देशों ने भारत की अपील को दरकिनार किया, लिहाजा अब ओपेक को भारत बड़ा झटका देने जा रहा है। माना जा रहा है कि अगर ओपेक प्लस से भारत ने कच्चे तेल का आयात कम कर दिया तो ओपेक को काफी नुकसान होगा। भारत सरकार ने सऊदी अरब से कच्चे तेल की आयात कम करने का फैसला ले लिया है।

सऊदी अरब को बड़ा झटका

सऊदी अरब को बड़ा झटका

भारत, चीन और जापान के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी तेल आयात करता है। रॉयटर्स के मुताबिक भारत सरकार ने फैसला किया है कि अब सऊदी अरब से तेल कम खरीदा जाए। रिपोर्ट के मुताबिक मई तक भारत सरकार सऊदी अरब से तेल आयात करने में एक चौथाई तक कटौती कर देगी। सऊदी अरब के लिए ये एक बड़ा झटका होगा। क्योंकि, अगर भारत तेल खरीदना बंद करता है तो फिर सऊदी अरब से तेल खरीदेगा कौन? दरअसल, ओपेक प्लस देशों द्वारा कच्चे तेल के प्रोडक्शन में लाई गई कटौती से कच्चे तेल का रेट 70 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचा है और उसी का असर है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत आसमान तक पहुंच चुकी हैं।

अमेरिका से तेल खरीदेगा भारत

अमेरिका से तेल खरीदेगा भारत

भारत सरकार ने फैसला किया है कि मई महीने तक भारत सऊदी अरब से कच्चे तेल की आयात में एक चौथाई की कमी कर देगा और अमेरिका से तेल खरीदना शुरू कर देगा। भारतीय ऑयल रिफाइनरीज ने अब अमेरिका से ज्यादा से ज्यादा तेल आयात करने का फैसला लिया है, जिसकी कीमत कम है। दरअसल, अमेरिकन क्रूड ऑयल हल्का होता है और इसमे सफ्लर की मात्रा काफी कम होती है। मोदी सरकार ने सऊदी अरब से विनती की थी लेकिन भारत की विनती ठुकराने का खामियाजा अब सऊदी अरब को भुगतना पड़ेगा। क्योंकि, भारत जैसा ग्राहक विश्व का कोई भी देश नहीं खोना चाहता है। इतना बड़ा दुश्मन होकर चीन ने भी भारत के साथ व्यापार में कोई कमी नहीं की है।

भारत की तेल कैपिसिटी

भारत की तेल कैपिसिटी

रिपोर्ट के मुताबिक भारत की रिफाइनरी कैपिसिटी 5 मिलियन बैरल रोजाना की है। जिसमें 60 फीसदी से ज्यादा कंट्रोल सरकारी तेल कंपनियों की है। भारत की सरकारी तेल कंपनियां 14.8 मिलियन बैरल तेल एक महीने में सऊदी अरब से आयात करती है, जिसे मई तक घटाकर 10.8 मिलियन बैरल लाने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही भारत सरकार ये भी प्लान कर रही है कि तेल को लेकर मिडिल ईस्ट देशों पर निर्भरता कम की जाए।

इराक से सबसे ज्यादा तेल आयात

इराक से सबसे ज्यादा तेल आयात

भारत अपनी जरूरत का सबसे ज्यादा कच्चे तेल की आपूर्ति इराक से करता है। 2017-18 से पहले भारत तेल के लिए सबसे ज्यादा सऊदी अरब पर निर्भर रहता था। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ कॉमर्शियल इंटेलीजेंस एंड स्टैटिस्टिक्स (DGCIS) के आंकड़ों के मुताबिक इराक ने 2018-2019 वित्तवर्ष में भारत को 4.66 करोड़ टम कच्चा तेल बेचा। यह 2017-18 के मुकाबले 2 प्रतिशत ज्यादा था

दूसरे नंबर पर अमेरिका

दूसरे नंबर पर अमेरिका

भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने का फैसला ले लिया है। जिसके बाद सऊदी अरब को पीछा छोड़ अमेरिका भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश बन जाएगा। सिर्फ फरवरी महीने में ही अमेरिका से भारत को 48 फीसदी ज्यादा तेल निर्यात किया गया है। अब अमेरिका हर दिन भारत को 5.45 लाख बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति रोजाना करता है। अमेरिका से भारत अपनी जरूरत का 14 फीसदी कच्चे तेल का आयात अब अमेरिका से करने लगा है। वहीं, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने पश्चिम अफ्रीका, वेनेजुएला, मिडिल ईस्ट, अमेरिका और कनाडा से क्रूड ऑयल मंगाने का टेंडर जारी कर दिया है। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब से जनवरी महीने में भारत ने 36% कम तेल खरीदा है। वहीं, अमेरिका से भारत का तेल व्यापार दोगुना बढ़ गया है। पिछले साल भारत ने अपनी आयात का 86% कच्चा तेल ओपेक प्लस देशों से खरीदा था, जिसमें 19 फीसदी आयात सिर्फ सऊदी अरब से किया गया था।

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