इतना गर्म पहले कभी नहीं हुआ समंदर, टूटे पिछले सारे रिकॉर्ड, धरती को उठाना होगा भारी नुकसान
दुनिया के कई देश भयंकर गर्मी का सामना कर रहे हैं। लोग गर्मी से झुलस रहे हैं। सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है। जलस्रोत सूख रहे हैं। जंगलों में आग लग रही है। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ईरान, अमेरिका, कनाडा, इटली, फ्रांस जैसे देशों में तापमान चरम पर पहुंच चुका है।
इस बीच वैज्ञानिकों का कहना है कि स्थलों के साथ-साथ अब महासागर भी उबल रहे हैं। उनके मुताबिक दुनिया भर की समुद्री सतह का तापमान रिकॉर्ड तोड़ ऊंचाई को छू चुका है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह हमारे ग्रह के स्वास्थ्य के लिए बुरी खबर है।

इस सप्ताह, औसत दैनिक वैश्विक समुद्री सतह का तापमान 20.96 डिग्री C तक पहुंच गया है, जो वर्ष के इस समय के औसत से कहीं अधिक है। साल 2016 में यह 20.95 सेल्सियस था जो कि अब तक का रिकॉर्ड था।
विशेषज्ञों के मुताबिक पानी का तापमान बढ़ने का असर आम लोगों को भले न पता हो लेकिन यह काफी गंभीर मुद्दा है। उनके मुताबिक पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करने में महासागर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। महासागर गर्मी सोखते हैं, उनकी वजह से पृथ्वी पर आधी ऑक्सीजन पैदा होता है।
वातरवरण की वजह से ही मौसम का मिजाज नियंत्रित होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्म पानी में ग्रीनहाउस गैसों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने की क्षमता कम होती है। इसका मतलब है कि अधिक कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल में रहेगा, जिससे हमारा ग्रह गर्म हो जाएगा।
धरती को गर्म करने वाली गैसों के हवा में ही रह जाने से मौसम और गर्म होता रहेगा जिससे ग्लेशियर और तेजी से पिघलेंगे। इससे समुद्री जल का स्तर और तेजी से बढ़ेगा। इससे जानवर और समुद्री जीवन भी बहुत अधिक प्रभावित होंगे।
महासागरों के गर्म होने का मतलब है कि इससे मछली और व्हेल जैसे समुद्री जीव भी संकट में घिरते जा रहे हैं क्योंकि वह ठंडे पानी की तलाश में निकल पड़ते हैं जिससे खाद्य श्रृंख्ला का संतुलन बिगड़ता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक महासागर के गर्म होने से मछलियों की प्रजातियां इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं।
शार्क जैसे जीवों पर भी इसका असर पड़ेगा। गर्म पानी उनके सामान्य जीवन को प्रभावित करेगी जिसकी वजह से वे अधिक आक्रमक हो सकते हैं। पिछले कुछ सालों में धरती का तापमान काफी तेजी से बढ़ा है। हालांकि समुद्र गर्म होने में लंबा वक्त लेते हैं।
ऐसी स्थिति तब है जब ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की वजह से गर्म होते हमारे ग्रह की 90 फीसदी गर्मी समंदर सोख ले रहे हैं। जाहिर है महासागर का बढ़ता तापमान बता रहा है कि उसकी गर्मी की सोखने की क्षमता की सीमा छू चुकी है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक एक सिद्धांत यह भी है कि समुद्र की गहराई में गर्मी जमा हो गई है और अब सतह पर आ रही है, जिसे अल नीनो से जोड़ा जा सकता है। अल नीनो तब होता है जब पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, और असामान्य रूप से गर्म और तूफानी मौसम की स्थिति पैदा करता है। बदले में इससे दुनिया भर का मौसम औसतन गर्म हो जाता है।
जैसा कि हम उपर ही बता चुके हैं कि इस समय समुद्र के तापमान ने 2016 में बनाए गए रिकॉर्ड को तोड़ दिया है जब अल नीनो अपने सबसे मजबूत स्तर पर था। इस साल एक और अल नीनो शुरू हो गया है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अभी भी कमजोर है।
वैज्ञानिकों ने संकेत दिया है कि समुद्र का तापमान और भी बढ़ने की आशंका है। हालांकि शोधकर्ता इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आने वाले महीनों में महासागर और कितने अधिक गर्म हो सकते हैं?












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