चंद्रमा पर चीन और अमेरिका के बीच होड़, हथियार बनाने वाली कंपनी की एंट्री, आर्बिट में बनाएंगे घर
नई दिल्ली, 10 जुलाई: सभी बड़े देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां दूसरे ग्रहों पर जीवन की तलाश कर रही हैं। इसके अलावा उनका मकसद ऐसे ग्रह को खोजना है, जिस पर आसानी से बस्तियां बनाकर इंसानों को वहां बसाया जा सके। इस लिस्ट में टॉप पर चंद्रमा और मंगल ग्रह का नाम है, जहां पर तेजी से रिसर्च की जा रही है। इसके लिए चीन और अमेरिका में कड़ी टक्कर चल रही है। हाल ही में चीन ने चंद्रमा के कई मिशन का ऐलान किया था, जिस पर अब अमेरिका ने हथियार निर्माता कंपनी नॉर्थरोप ग्रुमैन कॉर्प (Northrop Grumman Corp) से हाथ मिलाया है।

935 मिलियन डॉलर का खर्च
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नॉर्थरोप ग्रुमैन कॉर्प ने नासा का एक कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर लिया है, जो 935 मिलियन डॉलर का है। इसके तहत चंद्रमा के आर्बिट में रहने योग्य क्वार्टर बनाए जाएंगे। शुक्रवार को इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी गई। कंपनी के मुताबिक अंतरिक्ष यात्री इन्हीं क्वार्टर में रहेंगे। साथ ही हैबिटेशन एंड लॉजिस्टिक्स आउटपोस्ट में अनुसंधान करेंगे।

टेस्टिंग और अटैचमेंट की जिम्मेदारी
कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि नासा और उसके बीच एक कॉमर्शियल साझेदारी हुई है। जिसके तहत वो चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। साथ ही गेटवे का भी निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा सोलर प्रपल्शन मॉड्यूल के साथ क्वार्टर की टेस्टिंग और उसके अटैचमेंट की पूरी जिम्मेदारी नॉर्थरोप ग्रुमैन कॉर्प की होगी।

2024 में होगा रॉकेट लॉन्च
आपको बता दें कि आठ देशों ने नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत चंद्रमा की सतह पर दीर्घकालिक बस्तियों को आकार देने की कोशिश की जाएगी। नासा इसके लिए स्पेसएक्स के साथ मिलकर काम कर रहा है। साथ ही नवंबर 2024 में वो एक यान चंद्रमा पर भेज सकता है।

चीन भी कर रहा काम
रूस और चीन ने चंद्रमा मिशन के लिए हाथ मिलाया है। जिसके तहत वो एक ज्वाइंट इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन (ILRS) बनाएंगे। ये एक तरह की प्रयोगशाला होगी, जो चंद्रमा पर काम करेगी। दोनों देश अब चंद्रमा की सतह पर दीर्घकालिक, स्वायत्त और व्यापक वैज्ञानिक प्रयोग आधार के लिए अन्य सहयोगी देशों की तलाश कर रहे हैं। इससे जुड़े एक समझौते पर मार्च में दोनों देशों ने हस्ताक्षर भी किया था। जिसमें चंद्रमा और उसकी कक्षा दोनों में रिसर्च सेंटर का निर्माण शामिल है।












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