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उत्तर कोरिया का लक्ष्य दुनिया का सबसे शक्तिशाली परमाणु फोर्स बनाना, किम जोंग का खतरनाक ऐलान

आधिकारिक तौर पर अमेरिका अभी भी उत्तर कोरिया को परमाणु संपन्न देश नहीं मानता है, क्योंकि अमेरिका को जापान और दक्षिण कोरिया को लेकर भी डर सता रहा है।

North Korea News: एक के बाद एक मिसाइलों का परीक्षण करने वाले उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने अपने ताजा ऐलान से पूरी दुनिया को दहशत में डाल दिया है। उत्तर कोरिया की सरकार मीडिया के मुताबिक, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने घोषणा की है, कि उनका अंतिम लक्ष्य दुनिया की सबसे शक्तिशाली परमाणु शक्ति हासिल करना है। उत्तर कोरियाई नेता की ये घोषणा अमेरिका के साथ साथ उसके सहयोगी देशों, खासकर जापान और दक्षिण कोरिया के लिए काफी ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है।

किम जोंग का बड़ा ऐलान

किम जोंग का बड़ा ऐलान

कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) की रिपोर्ट के मुताबिक, किम जोंग ने शनिवार को उत्तर कोरिया की सबसे बड़ी बैलिस्टिक मिसाइल, ह्वासोंग-17 के हालिया लॉन्च में शामिल दर्जनों सैन्य अधिकारियों को प्रमोशन दी है और इस मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उत्तर कोरिया को दुनिया का सबसे शक्तिशाली परमाणु देश बनाने की घोषणा की। अपने आदेश में किम जोंग ने कहा कि, उत्तर कोरिया और उसके लोगों की गरिमा और संप्रभुता की रक्षा के लिए एक परमाणु फोर्स का निर्माण कर रहा है और उन्होंने कहा कि, उनके देश का "अंतिम लक्ष्य इस सदी में दुनिया की सबसे शक्तिशाली सामरिक परमाणु शक्ति को हासिल करना है।" उन्होंने कहा कि, ह्वासोंग-17 एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम है और दुनिया का सबसे मजबूत रणनीतिक हथियार है। उन्होंने कहा कि, इस मिसाइल को कामयाबी के साथ लॉन्च कर उत्तर कोरिया ने आखिरकार दुनिया की सबसे मजबूत सेना बनाने की क्षमता का प्रदर्शन किया है।

कोरियाई वैज्ञानिकों की तारीफ

कोरियाई वैज्ञानिकों की तारीफ

उत्तर कोरिया ने इस साल दर्जनों मिसाइलों का परीक्षण किया है और 18 नवंबर को उत्तर करिया ने ICBM मिसाइल का परीक्षण किया था, जिसकी निंदा अमेरिका के साथ साथ संयुक्त राष्ट्र ने भी की थी, जिसमें भारत भी शामिल था। भारत ने भी उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर चिंता जताई थी। लेकिन, इन बातों से बेपरवाह किम जोंग उन ने देश के वैज्ञानिकों की भारी तारीफ की है और उन्होंने शनिवार को कहा कि, उत्तर कोरिया के वैज्ञानिकों ने "बैलिस्टिक मिसाइलों पर परमाणु हथियार लगाने की तकनीक के विकास में एक अद्भुत छलांग लगाई है"। हालांकि, अमेरिका ने पिछले हफ्ते कहा था, कि उत्तर कोरियाई मिसाइल अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम नहीं है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है, कि उत्तर कोरिया का लक्ष्य ही अमेरिका तक मार करने वाली इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइलों का निर्माण करना है और किम जोंग उन उसी लक्ष्य को हासिल करना चाहते हैं।

उत्तर कोरिया की क्षमता क्या है?

उत्तर कोरिया की क्षमता क्या है?

आधिकारिक तौर पर अमेरिका अभी भी उत्तर कोरिया को परमाणु संपन्न देश नहीं मानता है, क्योंकि अमेरिका को डर है, कि अगर वो उत्तर कोरिया को परमाणु सपन्न देश मान लेगा, तो फिर जापान और दक्षिण कोरिया भी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर सकते हैं। वहीं, कई ऑब्जर्वर का मानना है कि, उत्तर कोरिया के पास ऐसी मिसाइलें हैं, जो अमेरिका तक मार करने में सक्षम है। वहीं, जापान के रक्षा मंत्री ने पिछले दिनों कहा था, कि उत्तर कोरियाई मिसाइल अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम हैं। वहीं, दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया की मिसाइल क्षमता के खिलाफ मजबूत कदम उठाने का आह्वान किया है। जबकि, किम जोंग ने शनिवार को ह्वासोंग-17 परीक्षण में शामिल वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, सैन्य अधिकारियों से कहा कि, उन्हें उम्मीद है कि वे देश के न्यूक्लियर डेटरेंट का विस्तार करना और उसे मजबूत करना असाधारण रफ्तार से जारी रखेंगे।

ह्वासोंग-17 'मॉन्स्टर मिसाइल' की क्षमता

ह्वासोंग-17 'मॉन्स्टर मिसाइल' की क्षमता

अमेरिका के 38 नॉर्थ, जो उत्तर कोरिया की निगरानी करता है के अनुसार, Hwasong-17 ( ह्वासोंग-17) परमाणु-सशस्त्र उत्तर कोरिया की अभी तक की सबसे बड़ी मिसाइल है, और दुनिया में सबसे बड़ी रोड-मोबाइल, तरल-ईंधन वाली खतरनाक ICBM है। इसका व्यास 2.4 और 2.5 मीटर के बीच होने का अनुमान है। वहीं इसका कुल द्रव्यमान, जब पूरी तरह से ईंधन भर जाता है, 80,000 और 110,000 किलोग्राम के बीच होने की संभावना जताई जा रही है। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया की मानें तो देश के पहले के ICBM के विपरीत, Hwasong-17 को 11 एक्सल वाले एक ट्रांसपोर्टर, इरेक्टर, लॉन्चर (TEL) वाहन से सीधे लॉन्च किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिसाइल की स्पीड आवाज की रफ्तार से 22 गुना ज्यादा है। खबरों के मुताबिक, ये मिसाइल 69 मिनट में 1000 किमी (621 मील) की दूरी तय की और ये लॉफ्टेड ट्रेजेक्टरी से होते 6,041 किमी की ऊंचाई तक गई। आपको बता दें कि, लॉफ्टेड ट्रेजेक्टरी में मिसाइल अंतरिक्ष में काफी ऊपर तक जाती है और फिर अपने टारगेट को हिट करती है। कोरियायी प्रायद्वीप में बढ़ते अमेरिकी सेना के कारण उत्तर कोरिया लगातार मिसाइल परीक्षण कर रहा है।

बाइडेन प्रशासन को सीधी चुनौती

बाइडेन प्रशासन को सीधी चुनौती

किम जोंग उन का लेटेस्ट बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण सीधे तौर पर बाइडेन प्रशासन के लिए धमकी माना जा रहा है, जिन्होंने मिसाइल परीक्षण को लेकर उत्तर कोरिया को चेतावनी दी थी। वहीं, उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण का रूस ने समर्थन किया है और रूस के उप-विदेश मंत्री सर्गेई रियाबकोव ने कहा कि, "मॉस्को, कोरियाई प्रायद्वीप के प्रति एक राजनीतिक नजरिए को प्राथमिकता देता है और ऐसा लग रहा है, कि हाल के दिनों में अमेरिका और उसके सहयोगी किसी दूसरे विकल्प की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसा महसूस हो रहा है, कि उत्तर कोरिया के धैर्य का इम्तिहान लिया जा रहा है।" आपको बता दें कि, पिछले दो महीने से कुछ ज्यादा वक्त में उत्तर कोरिया 50 से ज्यादा मिसाइलें दाग चुका है और आशंका इस बात को लेकर है, कि उत्तर कोरिया बहुत जल्द परमाणु बम का परीक्षण कर सकता है।

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