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इस देश का टीवी शो देखने पर किम जोंग लोगों को दे रहे हैं मौत की सजा, मानवाधिकार रिपोर्ट में खुलासा

North Korea Death Penalty: उत्तर कोरिया से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र की एक नई मानवाधिकार रिपोर्ट के मुताबिक, देश में विदेशी कंटेंट, खासकर दक्षिण कोरिया के लोकप्रिय टीवी शो और K-Drama देखने या शेयर करने वालों को मौत की सजा दी जा रही है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि किम जोंग-उन के शासन में व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर शिकंजा और कसता जा रहा है। निगरानी के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है और सजा और कठोर बना दी गई है। यह खुलासा बताता है कि उत्तर कोरिया किस तरह नागरिकों को बाहरी दुनिया से पूरी तरह काट कर रखना चाहता है।

North Korea Death Penalty

विदेशी कंटेंट पर कड़ी सजा

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी टीवी शो, फिल्मों और गानों को देखने या साझा करने जैसे अपराधों पर उत्तर कोरिया में मौत की सजा दी जा रही है। सबसे ज्यादा निशाने पर दक्षिण कोरियाई K-Drama और संगीत हैं, जिन्हें वहां 'खतरनाक सांस्कृतिक प्रभाव' माना जाता है।

2015 के बाद और सख्ती

रिपोर्ट में बताया गया कि 2015 के बाद से लागू किए गए नए कानूनों ने निगरानी और नियंत्रण को और कठोर बना दिया। इन कानूनों के तहत नागरिकों की निजी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। यहां तक कि मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस की भी गहन जांच की जाती है।

COVID-19 के बाद सजा में बढ़ोतरी

उत्तर कोरिया में महामारी के बाद सामान्य और राजनीतिक अपराधों के मामलों में मौत की सजा बढ़ गई है। जेम्स हीनन, जो उत्तर कोरिया के लिए UN मानवाधिकार कार्यालय के प्रमुख हैं, ने कहा कि विदेशी टीवी सीरीज साझा करने जैसे अपराधों के लिए पहले ही कई लोगों को फांसी दी जा चुकी है।

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सबसे प्रतिबंधित देश

14 पन्नों की इस रिपोर्ट में 300 से ज्यादा गवाहों और पीड़ितों के बयान दर्ज हैं, जिन्होंने देश से भागकर आजादी पाई। उनके मुताबिक, उत्तर कोरिया अब दुनिया का सबसे प्रतिबंधित देश बन चुका है, जहां नागरिकों को स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति और सूचना के अधिकार से पूरी तरह वंचित कर दिया गया है।

अंतरराष्ट्रीय चिंता

इस रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया का यह रवैया न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ भी है। वैश्विक समुदाय से उम्मीद की जा रही है कि वह उत्तर कोरिया पर दबाव बनाए ताकि वहां के नागरिकों को बुनियादी अधिकार मिल सकें।

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