Donald Trump ने Kim Jong Un को 'रॉकेट मैन' से बताया 'स्मार्ट-Guy', कहा- 'हम घुल-मिल गए...वो कट्टरपंथी नहीं'
Donald Trump Kim Jong Un Relation: डोनाल्ड ट्रंप, 20 जनवरी को अमेरिकी के दूसरी बार राष्ट्रपति बन चुके हैं। इसके बाद, लगातार अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसी बीच, व्हाइट हाउस लौटने के बाद ट्रंप ने उत्तर कोरिया के 41 वर्षीय नेता किम जोंग उन को याद किया।
हाल ही में एक इंटरव्यू में उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन को ट्रंप ने 'स्मार्ट GUY' कहा और उनके साथ अपने संबंधों को याद किया। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह किम से फिर से संपर्क करने की योजना बना रहे हैं। उनके बयान ने एक बार फिर उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच संबंधों को चर्चा में ला दिया है।

आपको बता दें कि 2024 तक, अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। किम जोंग-उन ने कई बार अमेरिका पर 'दोहरे मापदंड' अपनाने का आरोप लगाया है। वहीं, अमेरिका उत्तर कोरिया को अपने सहयोगी देशों (दक्षिण कोरिया और जापान) के लिए बड़ा खतरा मानता है।
किम जोंग उन: धार्मिक कट्टरपंथी नहीं
ट्रंप ने कहा कि किम कोई धार्मिक कट्टरपंथी नहीं हैं। यह बयान उत्तर कोरिया के बारे में पश्चिमी देशों के नजरिए से हटकर है। किम को आमतौर पर एक सख्त तानाशाह के रूप में देखा जाता है, जिनका देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग है।
डोनाल्ड ट्रंप के साथ संबंध, रॉकेट मैन से बताया 'स्मार्ट-Guy'
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद, अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो गए। 2017 में दोनों नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी हुई। ट्रंप ने किम को 'रॉकेट मैन' कहा, जबकि किम ने ट्रंप को 'मानसिक रूप से विक्षिप्त' करार दिया। हालांकि, 2018 में अप्रत्याशित कूटनीति का दौर शुरू हुआ।
अपने कार्यकाल (2017-2021) के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने किम जोंग उन के साथ तीन ऐतिहासिक मुलाकातें कीं। यह पहली बार था, जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने उत्तर कोरियाई नेता से सीधी बातचीत की। ट्रंप ने किम को 'चतुर' और 'व्यावहारिक' नेता बताया। उन्होंने कहा कि हम दोनों के बीच अच्छी समझ है, और वह मुझे पसंद करते हैं। हालांकि, ट्रंप के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यह स्वीकार किया कि इन मुलाकातों से उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए कोई ठोस समझौता नहीं हो सका।
ट्रंप के साथ तीन मुलाकातें, ठोस समझौता नहीं
- सिंगापुर शिखर सम्मेलन (2018): किम जोंग-उन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच यह पहली मुलाकात थी। इसमें कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्त बनाने पर चर्चा हुई। हालांकि, कोई ठोस समझौता नहीं हो सका।
- हनोई शिखर सम्मेलन (2019): यह दूसरी बैठक थी, लेकिन वार्ता विफल रही क्योंकि दोनों पक्ष प्रतिबंध हटाने और परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्तों पर सहमत नहीं हो सके।
- डिमिलिटरीकृत जोन (DMZ) की मुलाकात: 2019 में ट्रंप DMZ गए और किम से मिले। यह किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की DMZ में उत्तर कोरियाई नेता से पहली मुलाकात थी।
उत्तर कोरिया की स्थिति
उत्तर कोरिया, जिसने कई परमाणु परीक्षण किए हैं, अपने हथियार कार्यक्रम को अपनी प्रतिष्ठा और ताकत का प्रतीक मानता है। उत्तर कोरिया का दावा है कि वह अमेरिका और दक्षिण कोरिया जैसे अपने दुश्मनों से सुरक्षा के लिए परमाणु हथियार विकसित कर रहा है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने इसे वैश्विक शांति के लिए खतरा बताते हुए कई प्रतिबंध लगाए हैं। 1953 में कोरियाई युद्ध के बाद से उत्तर और दक्षिण कोरिया तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति में हैं।
ट्रंप का दावा: रूस और चीन से समझौते के करीब थे
- ट्रंप ने याद किया कि उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने रूस और चीन के साथ एक हथियार नियंत्रण समझौता करने की कोशिश की थी।
- यह समझौता परमाणु हथियारों पर नई सीमाएं तय करने और चीन को बातचीत में शामिल करने का प्रयास था। ट्रंप ने कहा कि मैं इस समझौते के करीब था, लेकिन 2020 के चुनाव में हार ने इसे रोक दिया।
क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने किम जोंग उन को 'तानाशाह' बताते हुए कहा कि उत्तर कोरिया की नीतियों पर गंभीरता से विचार करना होगा। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उत्तर कोरिया को "परमाणु शक्ति" के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती और वाशिंगटन के साथ मिलकर निरस्त्रीकरण की कोशिशें जारी रहेंगी।
क्या किम जोंग उन संदेश भेज रहे थे?
ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह से कुछ दिन पहले, उत्तर कोरिया ने कई छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह किम का संदेश था, जिसमें उन्होंने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए दबाव बनाने की कोशिश की।
डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच संबंधों ने अमेरिका और उत्तर कोरिया के रिश्तों में नया मोड़ दिया। हालांकि, इन मुलाकातों से कोई ठोस परिणाम नहीं निकला, लेकिन यह कूटनीति का एक दुर्लभ उदाहरण था। अब देखना यह है कि ट्रंप की आगामी राजनीतिक योजनाओं और किम जोंग उन की रणनीतियों से भविष्य में इन संबंधों का क्या रूप बनता है।
एक नजर पुराने रिश्तों पर....
1950 से उत्तर कोरिया और अमेरिका की दुश्मनी!
उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच संबंध जटिल, तनावपूर्ण और समय-समय पर अस्थिर रहे हैं। इन संबंधों का मुख्य फोकस परमाणु हथियारों के विकास, सैन्य शक्ति प्रदर्शन और कूटनीतिक वार्ताओं पर रहा है। विशेष रूप से किम जोंग-उन के नेतृत्व में उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले।
उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच संबंध 1950-53 के कोरियाई युद्ध के बाद से खराब रहे हैं। उस युद्ध के दौरान अमेरिका दक्षिण कोरिया का समर्थन कर रहा था, जबकि उत्तर कोरिया को चीन और सोवियत संघ का समर्थन प्राप्त था। युद्धविराम के बाद से, दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक शांति समझौता नहीं हुआ, जिससे तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति बनी रही।
किम जोंग-उन का उदय और अमेरिका से संबंध
2011 में किम जोंग-उन के सत्ता में आने के बाद, उत्तर कोरिया ने अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को तेजी से बढ़ाया। यह अमेरिका के लिए चिंता का विषय बन गया।
परमाणु हथियार कार्यक्रम
किम जोंग-उन ने उत्तर कोरिया को परमाणु शक्ति बनाने का अपना लक्ष्य स्पष्ट किया। 2017 में उत्तर कोरिया ने इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का परीक्षण किया, जो अमेरिका तक पहुंच सकती है। इसी साल, उसने अपने सबसे शक्तिशाली परमाणु परीक्षण को अंजाम दिया।












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