अर्थशास्त्र में नोबेल जीतने वाले क्रेमर को बधाई का पहला संदेश फेक लगा था

वाशिंगटन। अर्थशास्त्र में 2019 का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले अमेरिकी अर्थशास्त्री माइकल क्रेमर को बधाई का पहला संदेश फेक लगा था। जो उन्हें स्काइप पर स्वीडन से उनके दोस्त ने भेजा था। क्रेमर को सोमवार को भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी और उनकी पत्नी एस्थर डुफलो के साथ अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया है।

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इन्हें वैश्विक गरीबी कम करने के इनके प्रयास के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। क्रेमर का कहना है कि उन्होंने इन वर्षों में देखा है कि अर्थशास्त्र एक अनुशासन में बदल रहा है, जिसमें शोधकर्ता जमीनी स्तर पर लोगों से अधिक जुड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक गरीबी को कम करने के लिए शोधकर्ता हर समय सीख रहे हैं कि क्या काम करता है और क्या नहीं करता है, और सरकार समस्याओं के समाधान में अधिक प्रभावी हो गई है।

दो बच्चों को माता-पिता हैं अभिजीत और एस्थर

दो बच्चों को माता-पिता हैं अभिजीत और एस्थर

अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेताओं में अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो कहते हैं कि वे किसी भी अन्य विवाहित जोड़े की तरह हैं जो बच्चों और काम को देखते हैं। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के इन शोधकर्ताओं के 5 और 7 साल की उम्र के दो बच्चे हैं। डुफ्लो ने कैंब्रिज के एमआईटी में सोमवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि उनके बच्चे विश्वास करते हैं कि वे ब्रह्मांड के केंद्र हैं, और वे अर्थशास्त्र जैसे वजनदार मामलों के बारे में "रसोई की टेबल पर बातचीत" को स्वीकार नहीं करते हैं।

स्वीडन से आए फोन को डुफ्लो ने उठाया था

स्वीडन से आए फोन को डुफ्लो ने उठाया था

अभिजीत और एस्थर का कहना है कि वह भी फोन पर ये सुनते ही आश्चर्य में रह गए, जब उन्हें बताया गया कि उन दोनों को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल के लिए चुना गया है। उस वक्त उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या बोलें। डुफ्लो बताती हैं, सोमवार की सुबह उन्हें फोन आया था। जिसपर कहा गया कि ये फोन स्वीडन से है और काफी जरूरी है। हालांकि पुरस्कार मिलने की बात सुनकर अभिजीत काफी खुश हुए लेकिन फिर सोने चले गए। उन्होंने कहा कि वह इतनी सुबह जागते नहीं हैं, इसलिए अगर सोए नहीं तो गड़बड़ हो सकती है।

अभिजीत को अब क्या है उम्मीद?

अभिजीत को अब क्या है उम्मीद?

बनर्जी कहते हैं कि उन्हें इस बात की उम्मीद है कि उनकी जीत से गरीबी पर शोध के लिए और दरवाजे खुलेंगे। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में ये दंपत्ति सालों से काम कर रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एस्थर डुफ्लो के साथ बाकी के दोनों विजेताओं को भी बधाई दी है। मैक्रों ने ट्वीट कर कहा, 'यह याद दिलाता है कि वर्तमान में फ्रांसीसी अर्थशास्त्री दुनिया में सबसे अच्छे हैं और यह दर्शाता है कि उस क्षेत्र में अनुसंधान मानव कल्याण पर एक ठोस प्रभाव डाल सकता है।'

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