निज्जर हत्याकांड पर पहली बार भारतीय डिप्लोमेट का टीवी इंटरव्यू, कनाडा सरकार की खालिस्तान संबंधों पर खोली पोल
Nijjar killing Row: कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा ने एक बार फिर से कनाडा से खालिस्तान समर्थक आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के संबंध में अपने आरोप को साबित करने के लिए सबूत जारी करने का आग्रह किया है।
भारतीय उच्चायोग ने जस्टिन ट्रूडो से आग्रह किया है, कि उन्होंने भारत के खिलाफ जो आरोप लगाए हैं, उसके सबूत जारी करें और उन सबूतों को भारत के साथ शेयर करें। संजय कुमार वर्मा, कनाडा में भारत के वो उच्चायोग हैं, जिन्हें खालिस्तानियों ने अपने निशाने पर ले रखा है।

इस साल की शुरुआत में निज्जर की हत्या को लेकर भारत सरकार की संभावित संलिप्तता के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो के आरोप ने भारत और कनाडा के बीच के संबंध काफी खराब कर दिए हैं। भारत ने 2020 में निज्जर को आतंकवादी घोषित किया था और वो कनाडा में रह रहा था, जहां वो भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल था।
संजय कुमार वर्मा का पहला इंटरव्यू
कनाडा द्वारा आश्चर्यजनक आरोप लगाए जाने के बाद उच्चायोग संजय कुमार वर्मा का ने पहली बार टीवी पर इंटरव्यू दिया है, जिसमें संजय कुमार वर्मा ने सीटीवी न्यूज चैनल को बताया, कि भारत जस्टिन ट्रूडो के आरोपों का समर्थन करने के लिए किसी भी "विशिष्ट और प्रासंगिक" सबूत पर गौर करने के लिए तैयार है।
यह पूछे जाने पर, कि जस्टिन ट्रूडो के आरोपों के बाद "भारत जांच में सहयोग क्यों नहीं कर रहा", संजय कुमार वर्मा ने जवाब दिया, कि "दो प्वाइंट हैं। एक तो ये, कि जांच पूरी होने से पहले ही भारत को दोषी करार दे दिया गया.. क्या यह कानून का शासन है?"
संजय कुमार वर्मा का ये इंटरव्यू और पूरी बातचीत रविवार को प्रसारित की जाएगी, जिसमें संजय कुमार वर्मा से पूछा गया है, कि "भारत को कैसे दोषी ठहराया गया?"
इसपर उन्होंने जवाब दिया, कि "क्योंकि भारत को सहयोग करने के लिए कहा गया था और यदि आप सामान्य शब्दावली को देखें, जब कोई सहयोग करने के लिए कहता है, तो इसका मतलब है, कि आप पहले से ही दोषी हैं और बेहतर होगा, कि आप सहयोग करें। हमने इसे बहुत अलग-अलग व्याख्याओं में लिया, लेकिन हमने हमेशा कहा, कि अगर कुछ विशिष्ट और प्रासंगिक है और हमें बताया गया, तो हम उस पर गौर करेंगे।"
इससे पहले, इस महीने की शुरुआत में, द ग्लोब एंड मेल के साथ एक इंटरव्यू में, संजय कुमार वर्मा ने दोहराया था, कि न तो कनाडा और न ही उसके सहयोगियों ने निज्जर की हत्या से संबंधित कोई सबूत दिखाए हैं। वर्मा ने कनाडाई दैनिक को बताया था, कि "इस मामले में हमें जांच में सहायता के लिए कोई विशेष या प्रासंगिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।"
18 सितंबर को, जस्टिन ट्रूडो ने हाउस ऑफ कॉमन्स को बताया था, कि 18 जून को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में निज्जर की हत्या और भारतीय एजेंटों के बीच संभावित संबंध के "विश्वसनीय आरोप" थे।
इसके तुरंत बाद, दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। भारत ने भी शुरू में कनाडा के लिए अपनी वीज़ा सेवाओं को निलंबित कर दिया था, लेकिन एक महीने बाद एक चुनिंदा समूह के लिए इसमें ढील दे दी। बुधवार को, भारत ने कनाडाई नागरिकों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा जारी करना फिर से शुरू कर दिया है।
वहीं, वर्मा ने मामले में भारत की भूमिका से इनकार करते हुए सुझाव दिया, कि ट्रूडो के सार्वजनिक बयानों से कनाडाई पुलिस द्वारा हत्या की जांच को "नुकसान" पहुंचा था।
उन्होंने कहा, कि "सबूत कहां है? जांच का निष्कर्ष कहां है? मैं एक कदम आगे बढ़कर कहूंगा, कि अब जांच पहले ही दागदार हो चुकी है। जांच में भारत का एंगल उस वक्त आया है, जब ऊपरी स्तर से बार बार कहा गया, कि इसके पीछे भारत या भारतीय एजेंट हैं।"
आपको बता दें, कि ऐसे दावे किए गये हैं, कि भारतीय डिप्लोमेट्स के फोन कॉल रिकॉर्ड किए गये हैं।
जिसको लेकर वर्मा ने यह बताया, कि राजनयिकों के बीच कोई भी बातचीत "संरक्षित" है और इसे अदालत में सबूत के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है और न ही इसे सार्वजनिक रूप से जारी किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, "आप अवैध वायरटैप के बारे में बात कर रहे हैं और सबूतों के बारे में बात कर रहे हैं। दो राजनयिकों के बीच बातचीत सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों द्वारा सुरक्षित है।" उन्होंने कहा, कि "मुझे बताएं, कि आपने दो डिप्लोमेट्स की बातचीत को कैसे कैद किया। मुझे दिखाओ कि किसी ने आवाज की नकल तो नहीं की है?"
भारतीय दूत ने कहा कि दोनों पक्षों को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि किसी भी विवाद को संचार और संवाद के माध्यम से पेशेवर तरीके से निपटाया जाए।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत को उम्मीद है कि कनाडा "खालिस्तान समर्थकों पर लगाम लगाएगा"।
उन्होंने कहा, "अपनी धरती का इस्तेमाल उन कनाडाई नागरिकों के समूह को न करने दें, जो भारत को टुकड़े-टुकड़े करना चाहते हैं। जो भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देना चाहते हैं।" भारतीय उच्चायोग ने कहा, कि "यहां पर कुछ नियम, कुछ कानून होने चाहिए।"












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