इस्लामिस्ट, जिहादी और आतंकियों का गठजोड़! शेख हसीना को हटाकर बांग्लादेश को 'कंगाल पाकिस्तान' बनाने की साजिश

Bangladesh News: बांग्लादेश में छात्रों के प्रदर्शन के नाम पर चल रही आतंकवादी गतिविधियों की साजिश से आखिरकार पर्दा उठ गया है और 'एंटी-डिस्क्रीमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट' के 157 संयोजकों में से एक नाहिद इस्लाम ने 4 अगस्त 2024, यानि आज से 'पूर्ण असहयोग आंदोलन' शुरू करने की घोषणा की है।

नाहिद इस्लाम ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके मंत्रिमंडल को इस्तीफा देने के लिए कहा है, यानि एक आंदोलन, जो आरक्षण हटाने की मांग के साथ शुरू हुआ था, वो अब प्रधानमंत्री को हटाने की मांग के साथ बदल गया है।

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नाहिद इस्लाम की मांग से साफ साफ पता चलता है, कि इसका मकसद बांग्लादेश को अस्थिर और अराजकता की आग में झोंकना है, जहां देश की स्थिति इतनी ज्यादा भयावह हो जाए, कि शेख हसीना सरकार गिर जाए और देश का शासन कट्टर इस्लामवादियों और जिहादियों के हाथों में आ जाए।

3 अगस्त को प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आंदोलनकारी छात्रों से आरक्षण को आधार बनाकर हो रही हिंसा को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास गोनो भवन में प्रदर्शनकारियों से मिलने का आह्वान किया।

शेख हसीना ने कहा, कि "गोनो भवन के दरवाजे खुले हैं। मैं आंदोलनकारी छात्रों के साथ बैठना चाहती हूं और उनकी बात सुनना चाहती हूं। मैं कोई संघर्ष नहीं चाहती।"

उन्होंने अधिकारियों से हिरासत में लिए गए सामान्य छात्रों को रिहा करने के लिए भी कहा।

हालांकि, 'एंटी-डिस्क्रीमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट' के नेताओं ने प्रधानमंत्री शेख हसीना की मिलकर बात करने और समस्या का समधान निकालने के आह्वान को खारिज कर दिया है।

नाहिद इस्लाम ने कहा, कि छात्र और नागरिक किसी भी आपातकाल या कर्फ्यू को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने गोली चलाने और हमला करने के आदेशों को खत्म करने की मांग की और इस बात पर जोर दिया, कि 'असहयोग आंदोलन' के निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।

उन्होंने घोषणा की, कि अब उस "हत्यारी सरकार" के साथ बातचीत का कोई मौका नहीं है, और माफी का समय बीत चुका है। उन्होंने सरकार पर ब्लॉक छापे मारने, छात्रों को गिरफ्तार करने और उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाया और कहा, कि जब तक अख्तर हुसैन और आरिफ सोहेल जैसे राजनीतिक कैदी जेल में रहेंगे, वे समझौता नहीं करेंगे।

एक और छात्र नेता, अबू बकर मजूमदार ने प्रमुख स्थानीय बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम अलो से कहा, "अब बातचीत का वक्त नहीं है और फैसला सड़कों पर होगा।"

एक और छात्र नेता आसिफ महमूद ने सोशल मीडिया पोस्ट में इन भावनाओं को दोहराया, जिसमें कहा गया, कि कॉर्डिनिटर्स "हत्यारी सरकार" के साथ किसी भी तरह की बातचीत के लिए बैठने या अवामी लीग के साथ चर्चा करने के लिए तैयार नहीं हैं।

इसके अलावा, उन्होंने 'असहयोग आंदोलन' को लेकर 15 प्वाइंट्स के दिशा-निर्देश भी जारी किए।

1- सभी लोगों को टैक्स देना बंद कर देना चाहिए
2- सभी लोगों को बिलों को भरना बंद कर देना चाहिए
3- सभी सरकारी और निजी संस्थान, कार्यालय, कोर्ट और फैक्ट्रीज बंद रहेंगे, लेकिन कर्मचारियों को महीने के अंत में वेतन मिलते रहना चाहिए।
4. सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे।
5. प्रवासी बांग्लादेशी बैंकिंग चैनलों के माध्यम से कोई भी धन नहीं भेजेंगे।
6. सभी सरकारी बैठकों, सेमिनारों और कार्यक्रमों का बहिष्कार किया जाएगा।
7. बंदरगाह के कर्मचारी जहाजों से माल उतारना बंद कर दें
8- मिलें और कारखाने बंद रहेंगे। आरएमजी कर्मचारियों को काम पर नहीं जाना चाहिए।
9. सार्वजनिक परिवहन बंद रहेगा। कर्मचारियों को काम पर नहीं जाना चाहिए।
10. बैंक सिर्फ रविवार को अत्यावश्यक लेन-देन के लिए खुलेंगे।
11. पुलिस अपने स्टेशनों पर सिर्फ नियमित ड्यूटी करेगी, प्रोटोकॉल, दंगा या विरोध ड्यूटी से परहेज करेगी।
12. देश से कोई पैसा तस्करी करके बाहर नहीं ले जाया जाना चाहिए, और कोई भी विदेशी लेन-देन नहीं होना चाहिए।
13. बीजीबी (बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश) और नौसेना को छोड़कर, अन्य बल अपनी छावनियों में ही रहेंगे; बीजीबी और नौसेना अपने बैरकों और तटीय क्षेत्रों में रहेंगे।
14. नौकरशाह सचिवालय नहीं जाएंगे। डीसी या उपजिला अधिकारी अपने संबंधित कार्यालयों में नहीं जाएंगे।
15. लक्जरी सामान की दुकानें, शोरूम, होटल, मोटल और रेस्तरां बंद रहेंगे।

छात्र नेताओं के दिशा-निर्देश का पालन होने का मतलब है, कि बांग्लादेश पूरी तरह से बंद हो जाएगा और देश में अराजकता की स्थिति बन जाएगी।

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कॉर्डिनेटर्स की तरफ से प्रधानमंत्री के वार्ता के आह्वान को अस्वीकार करने से कुछ घंटे पहले, अलकायदा से जुड़ी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक प्रचारक डेविड बर्गमैन ने छात्रों से प्रधानमंत्री के बातचीत के प्रस्ताव को खारिज करने का आह्वान किया था, जिससे यह संकेत मिलता है, कि पूरे आंदोलन को बर्गमैन के बॉस तारिक रहमान नियंत्रित कर रहा है, जो एक सजायाफ्ता आतंकवादी है और 2007 से यूनाइटेड किंगडम में स्व-निर्वासन में रह रहा है।

बर्गमैन के अलावा, बीएनपी ने अपने प्रोपेगेंडा फैलाने वाले तत्वों को पूरी तरह एक्टिव कर रखा है, जो लगातार गलत सूचनाएं फैला रहे हैं। जिसमें जॉन डैनिलोविच भी शामिल हैं, जो एक पूर्व अमेरिकी डिप्लोमेट हैं और कई वर्षों तक अलकायदा से जुड़ी पार्टी के लिए काम कर चुके हैं।

बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने एक बयान में अवामी लीग सरकार से "माफी मांगने और तुरंत इस्तीफा देने" का आह्वान किया है।

लंदन से, तारिक रहमान ने कथित तौर पर पार्टी के धनी सदस्यों से सरकार विरोधी आंदोलन को फंड करने और चल रहे छात्र विरोध के कॉर्डिनेटर्स के साथ लगातार बातचीत करने के लिए कहा है। 2008 में, अमेरिकी अधिकारियों ने तारिक रहमान पर वीजा प्रतिबंध लगा दिए थे।

लिहाजा, जब तथाकथित छात्र प्रदर्शनकारियों के 15-सूत्रीय निर्देशों को सावधानीपूर्वक देखा जाए, तो पता चलता है, कि उनका असली एजेंडा, बांग्लादेश की समृद्ध अर्थव्यवस्था को नष्ट करना और देश को पाकिस्तान जैसे दिवालिया राष्ट्र में बदलना है।

हाल ही में देश भर में हिंसा और आतंकवादी कृत्यों की लहर का अनुमान तब लगाया गया है, जब 1 अगस्त 2024 को बांग्लादेश सरकार ने जमात-ए-इस्लामी और उसके छात्र विंग, इस्लामी छात्र शिबिर पर प्रतिबंध लगा दिया है, और इन संस्थाओं को आतंकवाद विरोधी अधिनियम 2009 की धारा 18/1 के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया है।

वहीं, रूस के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र रॉसिस्काया गजेटा के अनुसार, रूस में भी जमात-ए-इस्लामी को आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है और रूस में उसपर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

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बांग्लादेश को अराजकता की आग में कौन झोंक रहा है?

बांग्लादेश के पत्रकार सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने यूरेशियन टाइम्स में लिखे एक आर्टिकिल में अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA और पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI ने बांग्लादेश को अस्थिर करने की पटकथा लिखी है। और इन तथाकथित छात्र विरोधों का असली चरित्र अब उजागर हो गया है और यह स्पष्ट है, कि बांग्लादेश को इस्लामवादी, जिहादी और आतंकवादी तत्वों के गठजोड़ से गंभीर खतरा है, जो देश को अस्थिर करना चाहते हैं।

शांतिपूर्ण बातचीत के प्रस्ताव को खारिज करना और विनाशकारी निर्देश जारी करना, एक ऐसे एजेंडे को उजागर करता है, जिसका मकसद अर्थव्यवस्था को अपंग बनाना और अराजकता को भड़काना है।

पत्रकार सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने लिखा है, कि ऐसे मौके पर बांग्लादेश के देशभक्तों को एक साथ आना चाहिए और देश की संप्रभुता और अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए एक निर्णायक और अडिग कार्रवाई करनी चाहिए। और अब नरमी बरतने का वक्त बीत चुका है, नहीं तो ये गठजोड़ देश को बर्बादी की आग में जला देगा।

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बांग्लादेश बनाम पाकिस्तान की इकोनॉमी

बांग्लादेश ने पिछले कुछ सालों में शानदार आर्थिक तरक्की की है, लेकिन उसकी तरक्की एंटी-बांग्लादेशी तत्वों को बर्दाश्त नहीं हो पा रही है। दूसरी तरफ, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट से जूझ रही है, पिछले वित्त वर्ष में पाकिस्तान में महंगाई दर 29% से ज्यादा हो गई है।

पिछले दिनों पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक कार्यक्रम में बांग्लादेश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए कहा था, कि "मैं काफी छोटा था जब...हमें बताया गया था कि यह (बांग्लादेश) हमारे कंधों पर बोझ है...लेकिन आज आप सभी जानते हैं कि वह 'बोझ' कहां पहुंच गया है (आर्थिक विकास के संदर्भ में)।"

2016 में, बांग्लादेश ने पहली बार पाकिस्तान को पीछे छोड़ दिया था, जिसकी प्रति व्यक्ति जीडीपी 1,659 डॉलर थी, जबकि पाकिस्तान की 1,468 डॉलर थी। तब से, बांग्लादेश ने अपनी बढ़त बनाए रखी है। 2023 में, पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय 1,471 डॉलर थी, जबकि बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय 2,528 डॉलर पहुंच चुकी है।

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