UNGA: भारत का पलटवार, कहा- हम नए पाकिस्तान को सुनने आए थे लेकिन कुछ नहीं मिला
न्यूयॉर्क। भारत ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए संबोधन के दौरान लगाए गए आरोपों का करारा जवाब दिया है। 'राइट टू रिप्लाई' के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए संयुक्त राष्ट्र मिशन में भारत की दूत एनम गंभीर ने महासभा को 'नए पाकिस्तान' की सच्ची तस्वीर पेश करते हुए कुरैशी को आरोपों को मजबूती से नकार दिया। गंभीर ने कहा कि पाकिस्तान भले ही कहे कि उसने आतंकवाद पर नकेल कस दी है, लेकिन सच्चाई यही है कि आतंकी आज भी वहां खुले में घूम रहे हैं और लोगों को चुनाव तक लड़वा रहे हैं।
'जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा'
गंभीर ने सख्त लहजे में कहा कि हमें आज भी पुराना वाला पाकिस्तान ही सुनने को मिला है, नए पाकिस्तान का नाम सुनकर लगा था कि शायद कुछ नई चीजें सुनने को मिले लेकिन आज भी पाकिस्तान वो ही बातें कर रहा है, जो वो करता आया है। हम पाकिस्तान की नई सरकार से साफ-साफ कहना चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय झूठ बोल रहा है
गंभीर ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा यह कहकर भारत के खिलाफ निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं कि नई दिल्ली इस्लामाबाद में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। कुरैशी ने अपने भाषण में कहा था कि 2014 में पेशावर स्कूल पर हुए आतंकी हमले में भारत का कथित तौर पर हाथ था। 'पेशावर के स्कूल में आतंकी हमले की भारत ने निंदा की थी। भारतीय संसद के दोनों सदनों ने इस पर दुख जताते हुए मौन रखा था। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय पेशावर हमले में मारे गए बच्चों का अपमान कर रहा है।'
'हाफिज सईद पाकिस्तान में खुलेआम घूमता है'
गंभीर ने कहा कि क्या पाकिस्तान इस सच्चाई को नकार सकता है कि वह अपने यहां संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी सूची में शामिल 132 आतंकियों और 22 आतंकी संगठनों को अपने यहां पनाह दिए हुए है? क्या पाकिस्तान इस बात से इनकार करेगा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी हाफिज सईद पाकिस्तान में खुलेआम घूमता है, जहर उगलता है और चुनावों में उम्मीदवार खड़े करता है?
मानवाधिकार पर भी पाकिस्तान कर रहा है खोखली बातें
गंभीर ने कहा कि हमने यह भी देखा है कि 'नया पाकिस्तान' मानवाधिकार के बारे में बात करता है लेकिन ये बातें भी खोखली हैं। प्रिंसटन के अर्थशास्त्री आतिफ मियां के उदाहरण से इस बात को समझा जा सकता है। उन्हें इकनॉमिक अडवाइजरी काउंसिल से सिर्फ इसलिए हटा दिया गया क्योंकि वह 'अल्पसंख्यक' समुदाय से ताल्लुक रखते थे












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