ओमिक्रॉन की बढ़ती चिंता के बीच बड़ी खुशखबरी, जल्द बाजार में आ सकती हैं कोरोना की दो दवाएं

कोविड 19 के खिलाफ बाजार में दो नई दवाओं के आने को लेकर वैज्ञानिक काफी उत्साहित हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट के साथ साथ कई और कोरोना वायरस वेरिएंट अभी सामने आ सकते हैं, लिहाजा ये दवाएं महत्वपूर्ण हैं।

नई दिल्ली, दिसंबर 07: दक्षिण अफ्रीका में मिले चायनीज कोरोना वायरस के नये ओमिक्रॉन वेरिएंट ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल रखा है और अभी तक इस बात की जानकारी मिलना बाकी है, कि ओमिक्रॉन वेरिएंट इंसानों के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है। लेकिन, वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीन कम असरदार साबित हो सकती हैं। इन सबके बीच एक अच्छी खबर आई है। रिपोर्ट है कि, कोविड-19 को लेकर जल्द दो बेहद असरदार दवाएं बाजार में आ सकती हैं।

कोविड के खिलाफ दवाएं

कोविड के खिलाफ दवाएं

अमेरिका से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन जल्द ही मर्क एंड रिजबैक बायोथेरेप्यूटिक्स द्वारा बनाई गई एक दवा को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे सकता है कोविड 19 को लेकर पहली दवा बाजार में आ सकती है। इस दवा का नाम ''मोलनुपिरवीर'' रखा गया है। इस दवा के बारे में सबसे बड़ा दावा ये किया गया है कि, कोविड 19 के लक्षण दिखने के पांच दिनों के अंदर इस दवा का सेवन करने से कोरोना वायरस से होने वाली मौत की संभावना 30 फीसदी कम हो जाती है, जो बहुत बड़ी राहत की बात है।

फाइजर ने भी बनाई दवा

फाइजर ने भी बनाई दवा

''मोलनुपिरवीर'' दवा के अलावा वैक्सीन बनाने वाली कंपनी फाइजर ने भी एक एंटी वायरल दवा बनाई है, जिसको लेकर दावा किया गया है कि, ये दवा और भी ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। एक अंतरिम विश्लेषण से पता चला कि, लक्षणों की शुरुआत के पांच दिनों के भीतर दवा लेने पर दवा 85% प्रभावी थी। अमेरिकी एफडीए इसे अगले 2 हफ्तों के भीतर मंजूरी दे सकती है। महामारी की शुरुआत के बाद से, वैज्ञानिकों ने इस तरह के सुविधाजनक दवाओं को बाजार में लाने की उम्मीद जताई थी, जो किस भी आम डॉक्टर के द्वारा मरीजों के इलाज में इस्तेमाल की जा सकती है और जो बिना किसी नियम कानून और बिना किसी सरकारी शर्तों के आम दवा दुकानों पर किसी आम दवाई की तरह बिक सके।

नई दवाओं से बड़ी उम्मीदें

नई दवाओं से बड़ी उम्मीदें

कोविड 19 के खिलाफ बाजार में दो नई दवाओं के आने को लेकर वैज्ञानिक काफी उत्साहित हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट के साथ साथ कई और कोरोना वायरस वेरिएंट अभी सामने आ सकते हैं, लिहाजा हमें नये दुश्मनों के खिलाफ दवाओं की एक व्यापक श्रृंखला को तैयार करनी होगी और शस्त्रागार को भी विस्तार देना होगा। खासकर तब, जब इस बात की आशंका ज्यादा हो, कि कोरोना के नये वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीन कम असरदार हो सकती हैं और वो इंसानी सुरक्षाचक्र को भेदने में सक्षम हो। दुनिया भर के शोधकर्ता नई दवाओं को डिजाइन कर रहे हैं, ताकि ये दवाएं कोरोना वायरस की मॉल्यूक्यूलर स्ट्रक्चर के कमजोर प्वाइंट को भेदकर उसे कमजोर सके। अमेरिकी सरकार के शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. एंथनी फाउची ने कहा कि, ''वायरस काफी ज्यादा चालाक है और हमें उससे हर हाल में आगे रहना होगा''। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि, ''एक या दो दवाओं से वायरस को नहीं हरा सकते हैं''।

दवाओं के शुरूआती प्रभाव

दवाओं के शुरूआती प्रभाव

कोविड 19 दवाओं के लिए मारामारी पिछले साल महामारी के शुरुआती दिनों में ही शुरू हो गई थी। फार्मास्युटिकल कंपनियों और एकेडमिक प्रयोगशालाओं में शोधकर्ताओं ने हजारों मौजूदा दवाओं की जांच करनी शुरू कर दी, कि क्या कोई SARS-CoV-2 के खिलाफ काम करता है, जो वायरस कोविड-19 का कारण बनता है। लेकिन, वैज्ञानिकों के हाथ में लंबी असफलताएं लगीं। पेट्री डिश में काम करने वाले एंटीवायरल जानवरों में परीक्षण में विफल रहे, और जिन दवाओं ने जानवरों में काम किया, वो इंसानों में प्रभाव नहीं दिखा पाए। यहां तक ​​कि जिन दवाओं ने परीक्षण के दौरान असर दिखाया, वो भी निराशाजनक साबित हुईं। फेविपिरवीर नामक फ्लू की दवा ने शुरुआती परीक्षणों में आशाजनक परिणाम दिए, जिससे कनाडा स्थित एपिली थेरेप्यूटिक्स ने 1,200 से अधिक वॉलेंटियर्स पर देर से परीक्षण शुरू किया। लेकिन 12 नवंबर को कंपनी ने निराश करते हुए कह दिया कि, गोली असर दिखाने में नाकाम साबित हुई है।

मोलनुपिरवीर पर रिसर्च

मोलनुपिरवीर पर रिसर्च

मर्क की नई दवा 'मोलनुपिरवीर' पर रिसर्च कोविड-19 के शुरूआती समय में ही शुरू कर दिया गया था। रिपोर्ट के मुकाबिक, 'मोलनुपिरवीर' को लेकर स्टडी साल 2019 में एमोरी यूनिवर्सिटी से जुड़ी एक एनजीओ ने शुरू किया था, जो वेनेजुएला के इक्वाइन इंसेफेलाइटिस वायरस के उपचार के लिए बनाया गया था। रिसर्चर्स के मुताबिक, जब 'मोलनुपिरवीर' वायरस से प्रभावित शरीर के अंदर जाता है, तो ये वायरस के आरएनए को तोड़ना शुरू कर देता है और ये दवा इतनी मात्रा में एंटीटोड बनाता है, जो नये वायरस के निर्माण को खत्म कर देता है, लिहाजा ये दवा कोविड-19 के खिलाफ काफी हद तक असरदार है।

मोलनुपिरवीर पर रिसर्च में क्या निकला

मोलनुपिरवीर पर रिसर्च में क्या निकला

अक्टूबर में दवा बनाने वाली कंपनी मर्क ने 'मोलनुपिरवीर' दवा को लेकर परीक्षण के प्रारंभिक परिणामों की घोषणा की थी। जिसमें कहा गया कि, दवा ने अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु के जोखिम को लगभग 50 प्रतिशत कम कर दिया है। जिसके बाद अमेरिकी सरकार ने कोविड-19 से होने वाली मौतों पर फौरन लगाम लगाने के लिए इस दवा के 2.2 अरब डॉलर की लागत से 31 लाख डोज खरीद लिए, लेकिन लेकिन परीक्षण के अंतिम विश्लेषण में दवा की प्रभावशीलता घटकर 30% रह गई। हालांकि, अब उम्मीद है कि, फाइजर के साथ साथ मोलनुपिरवीर दवा को भी मंजूरी मिल सकती है।

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