वैज्ञानिकों को मिला कुत्तों से इंसानों में पहुंचने वाला नया कोरोना वायरस

न्यूयॉर्क, 22 मई। इस बच्चे को 2018 में निमोनिया होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यदि वायरस के रोगजनक होने की पुष्टि हो जाती है तो यह आठवां कोरोना वायरस है जो इंसानों में बीमारी का कारण बनता है। साथ ही यह पहला कोरोना वायरस होगा जो कुत्ते से इंसानों में फैलता है।

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शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि क्या यह वायरस मनुष्यों के लिए एक गंभीर खतरा है या नहीं। अध्ययन यह साबित नहीं करता है कि क्या निमोनिया इसी वायरस के कारण हुआ था, जो कि लोगों के बीच फैलने में सक्षम नहीं हो सकता है। हालांकि अध्ययन के निष्कर्षों में वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह शोध इस दिशा में अधिक प्रकाश डाल सकता है कि वायरस कैसे इंसानों से मनुष्यों में पहुंच सकते हैं। यह अध्ययन गुरुवार को क्लीनिकल इंफेक्शियस डिसीज जर्नल में प्रकाशित हुआ था।

वायरस को समझने की जरूरत
ड्यूक विश्वविद्यालय में संक्रामक रोग महामारी वैज्ञानिक डॉ ग्रेगरी ग्रे ने कहा "मुझे लगता है कि यहां मुख्य संदेश यह है कि ये चीजें शायद पूरी दुनिया में हो रही हैं, जहां लोग जानवरों के संपर्क में आते हैं, और हम उन्हें नहीं उठा रहे हैं।" डॉ ग्रेगरी ग्रे जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के लेखकों में से एक है। उन्होंने कहा "हमें इन चीजों की तलाश करनी चाहिए। अगर हम उन्हें जल्दी पकड़ सकें और पता लगा सकें कि ये वायरस इंसान में पहुंचने में सफल हैं, तो हम महामारी बनने से पहले ही उन्हें कम कर सकते हैं।"

पूरी दुनिया में 7 कोरोना वायरस
वर्तमान में पूरी दुनिया में 7 कोरोना वायरस हैं जो इंसानों में संक्रमण फैला सकते हैं। सार्स-सीओवी-2, जिससे कोविड-19 फैलता है, के अतिरिक्त और कोरोना वायरस हैं जो सार्स, मर्स और सामान्य खांसी की वजह बनते हैं। ऐसा माना जाता है कि इनमें से बहुत से वायरस चमगादड़ में सबसे पहले मिले हैं लेकिन यह चमगादड़ से इंसानों में पहुंच सकते हैं। कभी-कभी यह वायरस चमगादड़ से सीधे इंसान में पहुंचते हैं और कभी यह दूसरे जानवरों को संक्रमित करते हैं और फिर मनुष्यों तक पहुंचते हैं।

वैज्ञानिक दशकों से ये बात जानते रहे हैं कि कोरोना वायरस कुत्तों में संक्रमण फैला सकते हैं लेकिन अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि कैनाइन (कुत्तों में पाया जाने वाला) कोरोना वायरस इंसानों को संक्रमित कर सकता है।

वायरस पर अभी और अध्ययन की जरूरत
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह वायरस इंसानों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। शोधकर्ता अभी तक यह साबित नहीं कर पाए हैं कि यह वायरस संक्रमित व्यकित में निमोनिया कर सकता है और उसे अस्पताल पहुंचा सकता है।

फ्लोरिया विश्वविद्यालय के एक वायरोलॉजिस्ट के मुताबिक "हमें सावधान रहना होगा, क्योंकि चीजें हर समय दिखाई देती हैं जो प्रकोप नहीं बनती हैं।"

हालांकि उन्होंने अध्ययन को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि हमें इसे गंभीरता से लेना चाहिए और इसकी खोज करनी चाहिए। अगर और मामले सामने आते हैं तो इसे खतरे की घंटी की तरह लेना चाहिए।

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