बहाए पैसे, दिए रोजगार, लेकिन हमास ने पलटकर किया वार.. आतंकी संगठन को दूध पिलाने की इजराइल को मिली सजा?

7 अक्टूबर को देश में हुए घातक हमले के बाद इजराइल ने हमास को नष्ट करने का संकल्प लिया है। हालांकि ये बेहद विंडबापूर्ण स्थिति है कि इजराइल अब उसी हमास को मिटाने में जुटा हुआ है जिसे उसने खुद ही पाल-पोसकर इतना ताकरवर बना दिया है।

वह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली इज़राइली सरकार थी जिसने जानबूझकर हमास को धन दिया और उसे वह शक्ति और मजबूति हासिल करने में मदद की जो आज उसके पास है। लेकिन सवाल उठता है कि इजराइल ने ऐसा क्यों किया और उसकी कैलकुलेशन कैसे गड़बड़ा गई?

Netanyahu helped fund Hamas

विशेषज्ञों के अनुसार, हमास को पालने के पीछे बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार का उद्देश्य फ़िलिस्तीनी राज्य के गठन को रोकना था। इजराइल ने गाजा निवासियों को पैसे दिए और उन्हें वर्क परमिट प्रदान करके इजराइल में बेहतर जीवन बिताने की एक झलक देकर शांति खरीदनी चाही।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सरकार द्वारा हमास को 'कतरी पैसा' देने के मुद्दे का उल्लेख सऊदी अरब के पूर्व खुफिया प्रमुख प्रिंस तुर्की अल-फैसल ने 20 अक्टूबर को एक संबोधन में सार्वजनिक रूप से किया था।

अल-फैसल की टिप्पणी 7 अक्टूबर को हमास के आतंकवादियों की हत्या के बाद आई थी, जिसमें हमास ने हमला कर एक हजार से अधिक इजरायलियों को मौत के घाट उतार दिया था और करीब 200 से अधिक को बंधक बना लिया था।

अल-फैसल के बयान ने कई लोगों को हैरान कर दिया, क्योंकि लोग इस विरोधाभास वाले बयान को समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर इजराइल हमास की आर्थिक मदद क्यों करेगा? हालांकि, यह भी सच है कि इजराइल ने सीधे तौर पर भले ही हमास को राक्षस नहीं बनाया मगर उसने निश्चित रूप से इसे पोषित करने में मदद की है।

फिलिस्तीन के निर्माण के खिलाफ हैं नेतन्याहू

यह बात वर्षों से स्पष्ट है कि नेतन्याहू सरकार एक स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राज्य के गठन के ख़िलाफ़ काम कर रही है। वेस्ट बैंक के भीतर इजरायली बस्तियों का निर्माण इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के दो-राज्य समाधान की गुंजाइश को नकार देता है।

वेस्ट बैंक पर फिलिस्तीनी प्राधिकरण का नियंत्रण है, जिसका नेतृत्व महमूद अब्बास करते हैं। दूसरा फिलिस्तीनी क्षेत्र गाजा, 2006 के चुनावों के बाद से हमास के नियंत्रण में है। उस चुनाव में हमास ने फ़िलिस्तीनी अथॉरिटी के फ़तह को अपदस्थ कर दिया था।

हाल ही में जुलाई में द जेरूसलम पोस्ट द्वारा रिपोर्ट की गई थी कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू फिलिस्तीनी राज्य के खिलाफ थे।

द जेरूसलम पोस्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने एक बंद कमरे में हुई बैठक में संसद समिति के सदस्यों से कहा, "एक संप्रभु राज्य स्थापित करने की फिलिस्तीनी उम्मीदों को खत्म किया जाना चाहिए।" नेतन्याहू की टिप्पणी तब आई जब वह एक ऐसे परिदृश्य की योजना पर चर्चा कर रहे थे जिसमें फिलिस्तीनी प्राधिकरण के शीर्ष पर महमूद अब्बास नहीं थे।

नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल को फिलिस्तीनी प्राधिकरण की जरूरत है और उसे इसे ढहने नहीं देना चाहिए। उनके मुताबिक यह एक अच्छा संतुलन है जिसे इजराइल वर्षों से स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। इजराइल चाहता है कि वेस्ट बैंक और गाजा के बीच शक्ति केंद्रों को अलग रखें। वह न तो फिलिस्तीनी प्राधिकरण को मजबूत होने देना चाहता है और न ही उसे ढहने देता है। और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि वह हमास को भी सहारा दे रहा था।

गाजा को लाखों डॉलर कैसे मिले?

हमास के पास धन के कई स्रोत हैं, लेकिन कतर से प्राप्त धन मुख्य आधार है। कतर 2014 से गाजा निवासियों को करोड़ों डॉलर की सहायता दे रहा है। एक समय पर, कतर ने गाजा के एकमात्र बिजली संयंत्र को संचालित करने और हमास द्वारा संचालित सरकार में जरूरतमंद परिवारों और अधिकारियों का समर्थन करने के लिए प्रति माह 30 मिलियन डॉलर खर्च कर दिया था।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक कतर का पैसा, जो पहले फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता था, इजराइल के माध्यम से भेजा जाने लगा। कतर इजराइल को इलेक्ट्रॉनिक रूप से धन हस्तांतरित करता है। इजराइली और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के अधिकारी सूटकेस में नकदी को सीमा पार से गाजा ले जाते हैं।

रॉयटर्स ने कतर सरकार के एक अधिकारी के हवाले से कहा, "गाजा पट्टी को कतर की सहायता पूरी तरह से इजराइल, संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका के साथ समन्वित है।" गाजा में जरूरतमंद परिवार नकद प्राप्त करते हैं और एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते हैं, जिसकी एक प्रति इजराइल, कतर और संयुक्त राष्ट्र को जाती है।

इजराइल द्वारा दिए गए फंड के अलावा, दान और मित्र राष्ट्रों से समर्थन के लिए हमास एक वैश्विक वित्तपोषण नेटवर्क का यूज करता है। गाजा सुरंगों के माध्यम से या अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से नकदी भेजता है। इतना ही नहीं, इजराइल का कट्टर दुश्मन ईरान भी हमास को धन और हथियार देता है।

जेरूसलम पोस्ट ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू के हवाले से 2019 में लिखा, "जो कोई भी फिलिस्तीनी राज्य के खिलाफ है, उसे गाजा को धन हस्तांतरित करना चाहिए, क्योंकि वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी प्राधिकरण और गाजा में हमास के बीच अलगाव बनाए रखने से फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना को रोकने में मदद मिलती है।"

नौकरी और बेहतर जीवन की झलक

इजराइल का मानना था कि गाजा को धन भेजने से वह फिलिस्तीनी अथॉरिटी से कट जाएगा और पैसा लोगों के पास जाएगा, न कि उसके खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में उसका इस्तेमाल होगा।

गाजा में लोगों की मदद करने के लिए इजराइल का दूसरा कदम वर्क परमिट की पेशकश करना था। इजराइल आकर काम करने की अनुमति देने के बाद 2023 में ऐसे कामगारों की संख्या 20 हजार हो गई, जबकि 2012 तक यह संख्या महज 3 हजार थी।

हमास को समझने में चूके नेतन्याहू

ये ही वो दौर था जब गाजा के लोगों को इजराइल से अधिक पैसे कमाने का मौका मिला। पत्रकार ताल श्नाइडर का कहना है कि इजरायल द्वारा गाजा निवासियों को दिए जाने वाले वर्क परमिट की संख्या बढ़ाने के बारे में चर्चा में हमास को भी शामिल किया गया था, जिससे गाजा में धन का प्रवाह बना रहा।

इजराइल के प्रति हमास ने शांति को आड़ के रूप में इस्तेमाल किया। हमास को समझने में नेतन्याहू से बड़ी गलती हो गई। हमास किसी तरह इजराइल को भ्रम में रखने में कामयाब रहा।

इजराइल को धोखे में रखा

साल 2017 में हमास ने इजराइल पर अपना रुख नरम करके ध्यान भटकाने वाली रणनीति अपनाई। हमास नेता खालिद मेशाल ने 2017 में नीति दस्तावेज जारी किया, जिसमें पहली बार यहूदी राष्ट्र को मान्यता दिए बिना इजराइल के साथ फिलिस्तीनी राज्य को स्वीकार करने की इच्छा का संकेत दिया गया था। इसमें यह भी कहा गया कि हमास का संघर्ष यहूदियों के खिलाफ नहीं बल्कि 'जियोनिस्ट हमलावरों' के खिलाफ था।

ताल श्नाइडर लिखते हैं, "2014 के बाद से, नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकारों ने गाजा से पर आंखें मूंद ली।" इस बीच हमास अपने आतंकवादियों को प्रशिक्षित करता रहा। वह इजराइली खुफिया तंत्र को यह विश्वास दिलाता रहा कि हमास किसी भी हमले के लिए तैयार नहीं है और गाजावासियों को आर्थिक प्रोत्साहन उनके जीवन को सहारा दे रहा है।

हमास ने हथियारों की तस्करी और उन्हें छिपाने के लिए सुरंगों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया। इस पूरी अवधि में इजराइल गाजा में कतरी पैसा भेजता रहा और इसे मजबूत बनाता रहा।

इजराइल ने की थी भारी गलती

राजनीतिक वैज्ञानिक इयान ब्रेमर ने एक्स पर कहा, "यह महानतम गलती थी। इसमे भारी गलती और कुछ नहीं हो सकता था। हमास एक आतंकवादी संगठन था और है। इससे यह समझाने में मदद मिलती है कि क्यों इतने सारे इजराइली न केवल हमास को नष्ट करने के लिए बल्कि नेतन्याहू को पद से हटाने के लिए भी एकजुट हैं।''

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