नेपाल में नई सरकार बनते ही भारत के पहले प्रस्ताव को ठुकराया
काठमांडू। नेपाल ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई को फिर से मापने के लिए भारत की पेशकश को ठुकरा दिया है। 2015 में आए भूकंप के बाद भारत चाहता है कि माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई को एक बार फिर से मापा जाए, लेकिन नेपाल ने अपना सहयोग देने से मना कर दिया है। हालांकि, नेपाल के सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक गणेश भट्ट ने कहा कि इस मामले में भारत और चीन की मदद से महत्वपूर्ण आकंड़े प्रस्तुत कर सकते हैं।

भारत ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस प्रस्ताव को ठुकराने के पीछे चीन का हाथ है। सूत्रों के मुताबिक, नेपाल ने भारत के प्रस्ताव को इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि चोटी पर साइनो-नेपाल बॉर्डर लगती है। 2015 में आए भूकंप के बाद भारतीय विज्ञान मंत्रालय ने कहा कि इसकी चोटी को एक बार फिर से मापना चाहिए।
सर्वेक्षक मेजर जनरल गिरीश कुमार ने कहा कि नेपाल ने हमारे प्रस्ताव का जवाब नहीं दिया है, अब वे कह रहे हैं कि भारत या चीन को इसमें शामिल नहीं कर रहे हैं। कुमार के अनुसार, नेपाल को लगता है कि वे खुद ही माउंट एवरेस्ट को फिर से माप लेंगे। नेपाल में नई सरकार बनने के बाद उन्होंने भारत के पहले प्रस्ताव को ठुकराया है। एवरेस्ट की ऊंचाई मापने को लेकर गिरीश कुमार ने काठमांडू में हुई मीटिंग में नेपाली अधिकारियों से कहा कि क्या इसमें चीन मदद कर रहा है, तो उन्होंने इसका ढंग से जवाब भी नहीं दिया।
बता दें कि 2015 में नेपाल में 7.8 की तीव्रता से भूकंप आया था, जिसमें 8,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इस भूकंप की वजह से लाखों लोगों को पलायन होना पड़ा था।












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