Nepal PM Pushpa Kamal Dahal: नेपाल में दहल की जय-जय, प्रंचड मत से फिर साबित किया बहुमत
नेपाल में गठबंधन की सरकार बनने के 3 महीने बाद ही पीएम प्रचंड का साथ दे रही दूसरी पार्टियां पीछे हट गई थीं। प्रचंड ने 265 में से 172 सांसदों का समर्थ हासिल किया

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नेपाल में आज प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड का फ्लोर टेस्ट था जिसमें वो सफल हुए हैं। पीएम पुष्प कमल दहल ने विश्वास मत हासिल कर लिया है। प्रतिनिधि सभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी सीपीएन (माओवादी केंद्र) के नेता पुष्प कमल दहल को प्रधानमंत्री बनाने में निर्णायक भूमिका निभाने वाली सीपीएन-यूएमएल के सरकार से अपना समर्थन वापस लेने के बाद, प्रचंड को संसद में फिर से विश्वास मत साबित करना पड़ा। विधानसभा अध्यक्ष देवराज घिमिरे ने घोषणा की कि विश्वास मत के लिए पेश किए गए प्रस्ताव के पक्ष में 172 वोट पड़े और विरोध में 89 वोट पड़े।
172 सांसदों ने दिया समर्थन
प्रतिनिधि सभा के कुल 265 में से 262 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा लिया था। इसमें से 172 सांसदों ने प्रचंड के समर्थन में और 89 ने विरोध में अपना मत डाला। जबकि एक सांसद ने 'नो वोट' के पक्ष में अपना मत व्यक्त किया। प्रचंड को अपनी कुर्सी बचाने के लिए 138 सांसदों के समर्थन की जरूरत थी। प्रचंड की पार्टी CPN के पास फिलहाल 32 सीटें हैं। गठबंधन की सरकार बनने के 3 महीने बाद ही उनका साथ दे रही दूसरी पार्टियां पीछे हट गई थीं जिसके बाद उन्हें हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत साबित करना पड़ा।
ओली संग मिलकर बनाई सरकार
बता दें कि नेपाल के पीएम प्रचंड ने केपी ओली की पार्टी CPN-UML के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। इस दौरान दोनों ही पार्टियों में कई समझौते हुए थे। लेकिन पीएम प्रचंड ने वह समझौता तोड़ दिया। राष्ट्रपति चुनाव के दौरान प्रचंड ने ओली की जगह नेपाल कांग्रेस के उम्मीदवार को समर्थन दे दिया था। इससे ओली नाराज हो गए और उन्होंने गठबंधन तोड़ दिया।
प्रचंड ने दोबारा साबित किया बहुमत
इसके बाद प्रचंड को फिर से विश्वास मत साबित करना पड़ा जिसमें वे दोबार सफल हुए। दहल को नेपाली कांग्रेस, नेशनल इंडिपेंडेंट पार्टी, जनता समाजवादी पार्टी, सीपीएन समाजवादी पार्टी, जनमत पार्टी, डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट पार्टी, सिविल लिबरेशन पार्टी, राष्ट्रीय जन मोर्चा, आम जनता पार्टी और निर्दलीय सांसद ने विश्वास मत दिया। जबकि यूएमएल और आरपीपी सांसदों ने उनके खिलाफ मतदान किया जबकि नेमकिपा तटस्थ रहे।












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