नेपाल में हिन्दूवादी पार्टी बन सकती है किंगमेकर, क्या ओली हिन्दू राष्ट्र के वादे के साथ बनाएंगे सरकार?
अभी तक के चुनावी परिणाम से साफ है, कि किसी भी गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है और जिस तरह के ट्रेंड चल रहे हैं, उसके मुताबिक दोनों मुख्य गठबंधनों का रथ बहुमत के आंकड़ों से काफी पीछे ही रूक जाएगा।
Nepal Election Result: नेपाल लोकसभा चुनाव में अभी भी वोटों की गिनती चल रही है और अभी तक आए रूझानों के मुताबिक इस बार हुए संसदीय चुनाव में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलता हुआ नहीं दिख रहा है। हालांकि, अभी तक सभी सीटों के परिणाम सामने नहीं आए हैं, और वोटों की गिनती अभी भी जारी है, लेकिन उपलब्ध रुझानों से पता चलता है, कि देश "पूर्ण त्रिशंकु" संसद की ओर बढ़ रहा है। वहीं, ऐसे संकेत हैं, कि चुनाव पूर्व गठबंधनों में से कोई भी गठबंधन 275 सीटों वाले सदन में सरकार बनाने के लिए आवश्यक 50 प्रतिशत या 138 सीटों के बेंचमार्क को पार नहीं कर पाएगा। हालांकि, दोनों गठबंधनों ने लोगों से धैर्य बनाकर रखने को कहा है।

अभी तक के चुनावी रिजल्ट
नेपाली संसद के 275 सीटों के लिए 165 सीटों पर सीधा मतदान करवाया गया,जबकि बाकी सीटों पर समानुपाती चुनावी प्रणाली के जरिए सांसदों का चयन होता है। अभी तक 101 सीटों के परिणाम घोषित किए गये हैं, जिनमें से 58 सीटों पर नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को जीत मिल चुकी है। प्रधाननंत्री शेर बहादुर देउबा नेपाल कांग्रेस से आते हैं और गठबंधन में शामिल अन्य पार्टियों में से सीपीएन-माओवादी ने अभी तक 9 सीटों पर जीत दर्ज की है, वहीं, सीपीएन-सोशलिस्ट के खाते में 7 सीटें आ चुकी हैं, जबकि राष्ट्रीय जनमोर्चा और नेपाल समाजवादी पार्टी ने अभी तक 2-2 सीटों पर जीत हासिल की है।

विपक्षी गठबंधन का क्या है हाल
बात अगर विपक्षी गठबंधन की करें, तो पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपनी सीट पर जीत हासिल कर चुके हैं, लेकिन उनका गठबंधन अभी तक के रूझानों के मुताबिक, थोड़ा पीछे चल रहा है। माओवादी-सेंटर ने अभी तक 10 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट ने अभी तक 5 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं, केपी शर्मा ओली की सीपीएन-यूएमएल पार्टी ने अभी तक 15 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है, जबकि वो 29 सीटों पर आगे चल रही है। हालांकि, समानुपातिक वोटों की प्रणाली में केपी शर्मा ओली की पार्टी ने लगातार लीड बनाए रखा है और उनकी पार्टी सीपीएन-यूएमएल को अभी तक 3 लाख 65 हजार 505 वोट हासिल हुए हैं, जबकि नेपाली कांग्रेस को अभी तक तीन लाख 37 हजार 328 वोट मिले हैं, जबकि माओवादी सेंटर को अभी तक एक लाख 61 हजार 69 वोट मिले हैं।

नेपाल में गठबंधन की कैसी सरकार?
अभी तक के चुनावी परिणाम से साफ है, कि किसी भी गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है और जिस तरह के ट्रेंड चल रहे हैं, उसके मुताबिक दोनों मुख्य गठबंधनों का रथ बहुमत के आंकड़ों से काफी पीछे ही रूक जाएगा, लिहाजा संसद के त्रिशंकु रहने की ही संभावना है। ऐसी स्थिति में निर्दलीय सांसदों और कुछ छोटी पार्टियां किंगमेकर की भूमिका में आ सकती हैं, जिसमें सबसे आगे नाम राबी लामिछाने की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी है, जिसने अभी तक 7 सीटें जीत ली हैं और तीन सीटों पर पार्टी आगे चल रही है। आम तौर पर नेपाल में तीन बड़ी यूएमएल, नेपाली कांग्रेस और माओवादी सेंटर पार्टियों में से दो एक साथ मिलकर सरकार का गठन करते हैं। लेकिन इस बार का अनुमान उस दिशा में आगे बढ़ता नहीं दिख रहा है, क्योंकि यूएमएल और नेपाली कांग्रेस के गठबंधन की संभावना नहीं दिखती है। वहीं, माओवादी सेंटर, जिसने इन दो ध्रुवों के साथ वैकल्पिक रूप से गठबंधन किया है, उसे इतनी सीटें नहीं मिली हैं, कि वो किसी एक पार्टी को अपना समर्थन देकर उसकी सरकार बनवा दे। वहीं, नेपाल में आखिरी चुनाव परिणाम आने में अभी एक हफ्ते का वक्त और लग सकता है।

हिन्दू राष्ट्र के नाम पर समर्थन
नेपाल की फिलहाल स्थिति ये है, कि दोनों बड़े दलों को उस तीसरे दल से समर्थन लेने की जरूरत पड़ सकती है, जिसकी सबसे प्रमुख मांग ही नेपाल को फिर से हिन्दू राष्ट्र बनाने की है। अभी तक के चुनावी परणाम से निकली दो और बड़ी पार्टियां राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और राजशाही समर्थक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने अभी तक किस गठबंधन को समर्थन देना है, इसपर अपना रूख जाहिर नहीं किया है। ये दोनों पार्टियां अभी चुनावी रिजल्ट को समझने की कोशिश में है और अभी तक सिर्फ इतना ही कहा है, कि जो गठबंधन उनके मुद्दों को मानने के लिए तैयार होगा, वो उसे समर्थन देंगे। जिसमें राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी नेपाल को फिर से हिन्दू राष्ट्र बनाने की मांग के साथ चुनाव लड़ी है और केपी शर्मा ओली भी इस चुनाव में मंदिर-मंदिर घूमते दिखे हैं, जो पहले अकसर हिन्दू विरोधी बातें करते थे, लेकिन संभावना है, कि हिन्दू राष्ट्र बनाने के नाम पर केपी शर्मा ओली राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी का समर्थन हासिल कर सकते हैं और नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बनने की दिशा में अपना कदम आगे बढ़ा सकते हैं।

देउबा और प्रचंड में भी बातचीत
नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कल प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने पूर्व विरोधी और कम्युनिस्ट नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड से टेलीफोन पर बात की है और दोनों ने एक दूसरे को चुनावी जीत के लिए शुभकामनाएं दी हैं, लिहाजा नेपाल में अब सवाल उठ रहे हैं, कि क्या देउबा और प्रचंड अब तक के नफरत को भूलकर साथ आगे आ पाएंगे? इतना ही नहीं, काठमांडू टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, केपी शर्मा ओली ने भी प्रचंड से टेलीफोन पर बात की है। इन दोनों नेताओं ने पिछले लोकसभा चुनाव में साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और दो तिहाई बहुमत से जीत हासिल की थी, लेकिन सरकार बनाने के बाद ही दोनों कुत्ते-बिल्ली की तरह लड़ने लगे और गठबंधन टूट गया।

क्या नेपाल फिर बनेगा हिन्दू राष्ट्र?
कमल थापा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी-नेपाल 2013 में नेपाल की चौथी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और 24 सीटें जीती थी। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी, हिन्दुओं के मुद्दे के आधार पर चुनाव लड़ती है राजशाही समर्थक भावनाओं को भुनाने का काम करती है। इस पार्टी को नेपाल राजशाही का समर्थन प्राप्त है। ये पार्टी पहले 2015 में केपी शर्मा ओली के गठबंधन सरकार में शामिल हुई थी और फिर 2017 में पुष्प कमल दहल की सरकार में शामिल हो गई। उनकी पार्टी उसी वर्ष फिर से शेर बहादुर देउबा सरकार का हिस्सा बन गई, लिहाजा पार्टी के प्रमुख नेता कमल थापा को नेपाल की राजनीति में एक अवसरवादी चेहरा कहा जाने लगा है। लिहाजा, जब साल 2017 में नेपाल में फिर से लोकसभा के चुनाव हुए, तो पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा और जनता ने कमल थापा को बुरी तरह से नकार दिया। चुनाव में पार्टी को सिर्फ 3 सीटें मिली थीं और नेशनल पार्टी बनने के लिए जरूरी 3 प्रतिशत वोट हासिल करने में नाकाम हो गई थी। वहीं, इस बार इस पार्टी ने अभी तक 6 सीटें जीती हैं, लिहाजा इस बात की संभावना काफी कम है, कि संसद में किसी भी गठबंधन की तरफ से कमल थापा को ज्यादा सम्मान मिलेगा।












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