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नेपाल चुनाव रिजल्ट में बड़े उलटफेर की संभावना, नेपाली 'केजरीवाल' की जबरदस्त जीत, जानें नतीजे

पेशे से पत्रकार रह चुके रबी लामिछाने ने महज 6 महीने पहले ही अपनी राजनीतिक पार्टी'राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी' की स्थापना की थी और राजनीति में उतरने से ठीक पहले उन्होंने पत्रकारिता से इस्तीफा दे दिया था।
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Nepal Election Result: नेपाल में इस रविवार को खत्म हुए चुनाव के बाद अब वोटों की गिनती हो रही है और खबर लिखे जाने तक जो रूझान सामने आए हैं, उसमें जबरदस्त उलटफेर की संभावना बनती नजर आ रही है। अभी तक के रिजल्ट से संकेत मिल रहे हैं, कि ना सिर्फ नेपाल फिर से एक बार राजनीतिक अस्थिरता की तरफ बढ़ रहा है, बल्कि तमाम बड़े दलों के प्रति जनता में भारी असंतोष है। वहीं, महज 6 महीने पहले पार्टी बनाने वाले रबी लामिछाने, जिन्हें नेपाल का 'केजरीवाल' कहा जाता है, उनकी पार्टी को जबरदस्त वोट मिल रहे हैं। रबी लामिछाने की नई नवेली 'राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी' को उम्मीद के मुकाबले काफी ज्यादा सीटों पर जीत मिलती दिख रही है।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को शानदार सफलता

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को शानदार सफलता

पेशे से पत्रकार रह चुके रबी लामिछाने ने महज 6 महीने पहले ही अपनी राजनीतिक पार्टी'राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी' की स्थापना की थी और राजनीति में उतरने से ठीक पहले उन्होंने पत्रकारिता से इस्तीफा दे दिया था। रबी ने इसी साल 21 जून को अपनी पार्टी की स्थापना की थी और उन्होंने काफी आक्रामक चुनाव प्रचार किया और उसका नतीजा अब रिजल्ट में देखने को मिल रहा है। नेपाल में लोकसभा और सभी 7 प्रांतों में एक साथ चुनाल होते हैं और रबी ने इस बार सिर्फ लोकसभा में उम्मीदवार उतारे थे। उनकी पार्टी ने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था। नेपाल संसदीय चुनाव में प्रतिनिधि सभा के लिए 165 सीटों पर वोट डाले गये थे और सिर्फ 6 महीने पहले पार्टी की स्थापना करने वाले रबी की 'राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी' खबर लिखे जाने तक 11 सीटों पर काफी ज्यादा वोटों से आगे चल रही है। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रबी की पार्टी ने तमाम बड़े दलों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है और वो सरकार निर्माण में किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं।

कौन हैं रबी लामिछाने?

कौन हैं रबी लामिछाने?

रबि लामिछाने ने खोजी पत्रकारिता के दम पर पूरे नेपाल में अपना एक अलग फैनबेस बना लिया है। उनके नाम सबसे लंबे समय तक टॉक शो करने का रिकॉर्ड भी है। 21 जून 2022 को पूर्व पत्रकार रबि लामिछाने ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का गठन किया है। उनकी ताकत का अंदाजा इस बार से लगाया जा सकता है, कि उनसे डरकर पूर्व पीएम पुष्प दहल प्रचंड तक अपनी पसंदीदा सीट छोड़ चुके हैं। रबि चार साल पहले ही अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ चुके हैं मगर विपक्षी पार्टियों ने उनके विदेशी होने का मुद्दा जोरशोर के साथ उठाया था। हालांकि, अभी तक के चुनावी नतीजे बता रहे हैं, कि रबि पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

अभी तक के चुनावी नतीजे

अभी तक के चुनावी नतीजे

नेपाल में 61 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाला था और वोटों की गिनती जारी है। अभी तक के चुनावी नतीजों के मुताबिक इस बार के चुनावी रिजल्ट में भारी उलटफेर होने की संभावना है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक के रूझाने के मुताबिक, नेपाली कांग्रेस 3 सीटें जीत चुकी हैं और 48 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी सीपीएन-यूएमएल 1 सीट पर जीत चुकी है और 38 सीटों पर आगे है। सीपीएन माओवादी फिलहाल 12 सीटों पर आगे है, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 11 सीटों पर आगे चल रही है, वहीं 7 सीटों पर अन्य उम्मीदवार आगे हैं, जबकि राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी फिलहाल 6 सीटों पर आगे चल रही है। जिस तरह के चुनावी रूझान हैं, उससे साफ जाहिर होता है, कि बड़ी पार्टियां जनता का पूर्ण समर्थन लेने में नाकामयाब रही हैं और नेपाल फिर से राजनीतिक अस्थिरता की तरफ बढ़ रहा है।

बड़ी पार्टियों के खिलाफ असंतोष

बड़ी पार्टियों के खिलाफ असंतोष

नेपाल में संघीय और प्रांतीय चुनावों के नतीजे जैसे-जैसे आ रहे हैं, ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि नेपाल के मतदाताओं ने देश के बड़े राजनेताओं के प्रति अपना असंतोष स्पष्ट कर दिया है। शुरुआती नतीजे बताते हैं कि नेपाली कांग्रेस (एनसी) और सीपीएन-यूएमएल के बीच की 30 साल पहले की प्रतिद्वंद्विता अभी भी उतनी ही भयंकर है और इस बार नेपाल की राजनीति एक नए युग की शुरुआत देख सकती है। नेपाली राजनीति के कई बड़े बड़े धुरंधर वोटों की गिनती में काफी पीछे चल रहे हैं। माओवादी-सेंटर और यूनिफाइड सोशलिस्ट ने हर जगह खराब प्रदर्शन किया है। वहीं, शाही-दक्षिणपंथी दलों को भी उनकी अपेक्षा के अनुरूप वोट नहीं मिलते दिख रहे हैं। जबकि, प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा का पांच दलीय गठबंधन भी चुनावी परिणाम में पिछड़ता दिख रहा है। अभी तक के रूझान के मुताबिक, छोटी पार्टियों ने बड़ी पार्टियों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है और निर्दलीय उम्मीदवार भी बड़े दलों के उम्मीदवारों पर भारी साबित हो रहे हैं। माओवादी पार्टी के समर्थकों ने इस बार निर्दलीय और बागी उम्मीदवारों को वोट कर दिया है, जिससे माओवादी पार्टी को भयंकर नुकसान होता नजर आ रहा है। वहीं, केपी शर्मा ओली और उनके दक्षिणपंथी गठबंधन को भी तगड़ा नुकसान होता दिख रहा है।

निर्दलीय उम्मीदवारों की लहर?

निर्दलीय उम्मीदवारों की लहर?

हालांकि, इस वक्त तक के रूझान को देखते हुए फिलहाल इसे 'स्वतंत्र उम्मीदवारों' का लहर कहना जल्दबाजी होगा, लेकिन रबी लामिछाने की स्वतंत्र पार्टी और युवा निर्दलीय उम्मीदवार अब किंगमेकर की भूमिका में आते हुए दिखाई दे रहे हैं। नेपाल के राजनीतिक विश्लेषक पुनर्जन आचार्य ने अभी तक के रूझान को देखते हुए कहा कि, 'अभी तक के आंकड़ों से साफ है, कि आरएसपी के दमदार नतीजे बताते हैं कि मतदाता उन्हीं पुराने चेहरों से उब चुके हैं।' उन्होंने कहा कि, "यह भी स्पष्ट है कि यूएमएल ने पार्टी के अंदरूनी कलह के बाद भी उम्मीदों के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन किया है।"

बड़े दलों के प्रमुख चल रहे आगे

बड़े दलों के प्रमुख चल रहे आगे

नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रमुख राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में अपने दावेदारों के खिलाफ आसानी से बढ़त बना ली है। नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा वर्तमान में दादेलधूरा 1 में 6880 मतों से आगे चल रहे हैं। इसी तरह झापा-5 में सीपीएन यूएमएल अध्यक्ष केपी शर्मा ओली 8978 मतों के साथ सबसे आगे हैं। वहीं, राकांपा माओवादी केंद्र के अध्यक्ष पुष्पा कमल दहल ने अपने चुनाव में व्यापक बढ़त बना ली है। वहीं, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के कविंद्र बुरलाकोटि के 1424 मतों से आगे चल रहे हैं, जबकि CPN एकीकृत समाजवादी के अध्यक्ष माधव कुमार नेपाल के रौतहाट-1 में 7140 मतों से आगे चल रहे हैं।

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English summary
Big parties seem to be facing huge losses in the Nepal General Assembly elections and the new-born Rashtriya Swatantra Party seems to be coming in the role of kingmaker.
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