Sandeep Lamichhane: नेपाली क्रिकेटर संदीप लामिछाने दोषी, रेप का आरोप सिद्ध, सुनाई जाएगी सजा

नेपाल क्रिकेट टीम के खिलाड़ी संदीप लामिछाने को बड़ा झटका लगा है। लामिछाने नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी पाए गए हैं। काठमांडू डिस्ट्रीक कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है और संदीप को दोषी करार दिया है।

इस मामले पर सुनवाई रविवार से शुरू हुई थी और शुक्रवार को इसका फैसला आया। न्यायालय ने साफ किया कि घटना के समय लड़की नाबालिग नहीं थी। अगली सुनवाई में लामिछाने को सजा सुनाई जाएगी।

Sandeep Lamichhane convicted

न्यायाधीश शिशिर राज ढकाल की एकल पीठ ने रविवार को शुरू हुई अंतिम सुनवाई के समापन के बाद आदेश पारित किया। संदीप लामिछाने पर 17 वर्षीय नाबालिग लड़की से रेप का आरोप था। लड़की ने मेट्रोपॉलिटन पुलिस सर्कल, गौशाला में 22 वर्षीय क्रिकेटर के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।

हालांकि अदालत ने कहा कि 'सरकारी दस्तावेजों से पता चलता है कि पीड़िता की उम्र 18 से अधिक है लेकिन दोनों के बीच संबंध सहमति के आधार पर नहीं था।' कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि 'क्रिकेटर संदीप लामिछाने ने पीड़िता की खराब आर्थिक स्थिति का फायदा उठाया है।'

अदालत ने कहा कि हर्जाने और सजा पर फिर से सुनवाई की जाएगी। बलात्कार के आरोप लगने के बाद लामिछाने को नेपाल नेशनल क्रिकेट टीम के कैप्टन के पद से हटा दिया गया था। नेपाल क्रिकेट एसोसिएशन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया था, लेकिन बाद में उनका निलंबन वापस ले लिया गया।

संदीप लामिछाने ने नेपाल की ओर से अंतरराष्ट्रीय मैचों में हिस्सा भी लिया है। वह भारत की टी20 लीग आईपीएल में भी खेल चुके हैं। वह इस लीग में दिल्ली कैपिटल्स का हिस्सा रहे थे। लामिचेन फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। फिलहाल लामिछाने कैरेबियन प्रीमियर लीग में खेलने के लिए देश से बाहर त्रिनिदाद और टोबैगो में हैं।

12 जनवरी को पाटन हाई कोर्ट ने क्रिकेटर को रिहा करने का आदेश दिया था। लामिछाने द्वारा दायर समीक्षा याचिका का जवाब देते हुए, न्यायाधीश ध्रुव राज नंदा और रमेश दहल की संयुक्त पीठ ने शर्तों के साथ 2 मिलियन रुपये के जमानत बांड पर लामिछाने को रिहा करने का आदेश दिया।

काठमांडू जिला न्यायालय ने 4 नवंबर, 2022 को हिरासत की सुनवाई के बाद लामिछाने को सुंधरा स्थित केंद्रीय जेल भेजने का आदेश पारित किया था। लामिछाने ने आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था।

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