भारत-नेपाल पंचेश्वर बिजली संयंत्र परियोजना की डीपीआर को अंतिम रूप देंगे, 3 महीने में होगा तैयार
भारत और नेपाल सीमावर्ती महाकाली नदी पर प्रस्तावित 6,480 मेगावाट क्षमता की पंचेश्वर बिजली परियोजना से संबंधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को अंतिम रूप देने के लिए विशेषज्ञों की बैठक करने पर सहमत हो गए हैं।
द काठमांडू पोस्ट अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार और शुक्रवार को नेपाल के पोखरा में आयोजित पंचेश्वर विकास प्राधिकरण की गवर्निंग काउंसिल की बैठक के दौरान यह सहमति बनी।

रिपोर्ट में ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय के प्रवक्ता मधु भेटुवाल के हवाले से कहा गया है, "बैठक में विशेषज्ञों की टीम का कार्यकाल बढ़ाने का फैसला किया गया जो मार्च में समाप्त हो गया था।"
रिपोर्ट में नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय के प्रवक्ता मधु भेटुवाल के हवाले से कहा गया है कि इस बैठक में विशेषज्ञों के दल का मार्च में समाप्त हो चुका कार्यकाल आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
प्रवक्ता मधु भेटुवाल ने कहा, 'दोनों पक्ष डीपीआर पर मतभेदों को दूर करने और इसे अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए 10 दिनों के भीतर विशेषज्ञों के दल की अगली बैठक आयोजित करने पर भी सहमत हुए हैं।'
आपको बता दें कि पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना नेपाल और भारत की सीमा पर महाकाली नदी पर विकसित की जाने वाली एक द्वि-राष्ट्रीय जलविद्युत परियोजना है। इस परियोजना का विकास 1996 में नेपाल और भारत के बीच हस्ताक्षरित एकीकृत महाकाली संधि के अंतर्गत होना है।
इस परियोजना के तहत भारत और नेपाल में महाकाली नदी के दोनों छोर पर 3,240 मेगावाट के भूमिगत बिजलीघरों का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना से न सिर्फ बिजली पैदा होगी बल्कि यह परियोजना बाढ़ सुरक्षा सहित अन्य आकस्मिक लाभ मुहैया कराएगी। इतना ही नहीं, इस परियोजना से नेपाल में 130,000 हेक्टेयर भूमि और भारत में 240,000 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा भी उपलब्ध होगी।
इससे पहले कुछ विवादास्पद मुद्दों पर मतभेद के कारण पंचेश्वर परियोजना की पारस्परिक रूप से स्वीकार्य डीपीआर को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका था। प्रवक्ता भेटुवाल ने कहा कि इस संबंध में 500 से ज्यादा अनसुलझे मुद्दे थे जो अब घटकर 127 रह गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों की आगामी बैठक की तारीख अभी तय नहीं हुई है। यह बैठक पिछले महीने पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड की भारत यात्रा के दौरान तीन महीने के भीतर डीपीआर पूरा करने पर बनी सहमति के बाद पहला कदम है।












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