'3 मरीजों में एक की मौत', चीनी वैज्ञानिकों ने खोजा सबसे जानलेवा 'NeoCoV' कोरोना वायरस, मचा हड़कंप

वुहान यूनिवर्सिटी और चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज इंस्टीट्यूट ऑफ बायोफिजिक्स के रिसर्चर्स ने 'नियोकोव' कोरोना वायरस की खोज की है, जिसके बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है।

वुहान, जनवरी 28: चीन का वुहान शहर, जहां सबसे पहली बार कोरोना वायरस 2019 के आखिरी महीनों में मिला था, वहां के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के एक और, मगर सबसे ज्यादा खतरनाक और जानलेवा वेरिएंट को लेकर चेतावनी जारी की है। वुहान के वैज्ञानिकों ने कहा है कि, ये एक नये तरह का कोरोना वायरस है, जिसके संक्रमण का मृत्युदर सबसे ज्यादा है। वुहान वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि, इस नये कोरोना वायरस से संक्रमित तीन में से एक मरीज की मौत हो सकती है।

नये वायरस का नाम 'नियोकोव'

नये वायरस का नाम 'नियोकोव'

रिपोर्ट के मुताबिक 'नियोकोव' वायरस नया नहीं है और यह वायरस MERS-CoV वायरस से संबंध रखता है। यह वायरस साल 2012 और 2015 के बीच मध्य पूर्वी देशों में खोजा गया था और यह SARS-CoV-2 के ही समान है, जो मनुष्यों में कोरोनावायरस का कारण बनता है। जबकि NeoCoV को दक्षिण अफ्रीका में चमगादड़ों में खोजा गया था। हालांकि, इस नये प्रकार के कोरोना वायरस को अभी तक सिर्फ जानवरों में ही फैलता हुआ देखा गया है। बायोरेक्सिव वेबसाइट पर प्रीप्रिंट के रूप में प्रकाशित एक नए स्टडी से पता चला है कि NeoCoV और इसके करीबी रिश्तेदार PDF-2180-CoV मनुष्यों को संक्रमित कर सकते हैं और इसके संक्रमण करने की रफ्तार और इस वायरस से मृत्युदर काफी ज्यादा है।

वुहान के वैज्ञानिकों का दावा

वुहान के वैज्ञानिकों का दावा

वुहान यूनिवर्सिटी और चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज इंस्टीट्यूट ऑफ बायोफिजिक्स के रिसर्चर्स के मुताबिक, मानव कोशिकाओं में घुसपैठ करने के लिए इस वायरस को सिर्फ एक बार म्यूटेंट होने की जरूरत होगी। रिसर्च के निष्कर्षों में कहा गया है कि, नोवेल कोरोनावायरस एक जोखिम पैदा करता है क्योंकि यह ACE2 रिसेप्टर पर कोरोनावायरस से अलग तरीके से हमला करता है। लिहाजा, ना तो शरीर में मौजूद एंटीबॉडी और ना ही प्रोटीन मॉलीक्यूल के पास ही इतनी क्षमता होती है, कि वो इंसानी शरीर को NeoCoV से रक्षा कर सके। यानि, अगर NeoCoV वायरस अपना वेरिएंट बनाता है, तो फिर ये काफी आसानी से इंसानी शरीर पर हमला कर सकता है और शरीर में मौजूद एंटीबॉडी इस वायरस से शरीर को नहीं बचा सकते हैं, लिहाजा इंसानों का बचना काफी मुश्किल हो जाएगा।

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    काफी ज्यादा है मृत्युदर

    काफी ज्यादा है मृत्युदर

    कोरोना वायरस को लेकर अभी तक देखा गया है कि, ये वायरस काफी ज्यादा संख्या में इंसानों को संक्रमित जरूर करता है, लेकिन मृत्युदर काफी कम है। लेकिन, चीनी शोधकर्ताओं के दावे के मुताबिक, MERS परिवार के NeoCoV में कोरोना वायरस की तुलना में मृत्युदर काफी ज्यादा है और प्रत्येक तीन संक्रमित व्यक्ति में से एक की मृत्यु हो जाती है। इसके साथ ही इस नये कोरोना वायरस में भी फैलने की क्षमता वर्तमान कोरोना वायरस के समान ही होगी। वुहान के वैज्ञानिकों की इस रिपोर्ट के बाद रूसी स्टेट वायरोलॉजी एंड बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर के विशेषज्ञों ने भी गुरुवार को एक बयान जारी किया है, जिसमें इस नये कोरोना वायरस को लेकर जानकारी दी गई है।

    रूसी वैज्ञानिकों ने क्या दावा किया?

    रूसी वैज्ञानिकों ने क्या दावा किया?

    वुहान के वैज्ञानिकों ने जो दावा किया है, रूसी वैज्ञानिकों ने उस दावे को झुठलाया नहीं है और रूसी वैज्ञानिकों ने भी NeoCoV को खतरनाक कहा है। रूसी वैज्ञानिकों ने कहा कि, ''रूसी स्टेट वायरोलॉजी एंड बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर के पास चीन के वैज्ञानिकों ने NeoCoV पर जो रिसर्च की है, उसकी जानकारी है। हालांकि, अभी तक NeoCoV के पास इतनी क्षमता नहीं है, कि वो इंसानों के बीच फैले, हालांकि, इस वायरस को लेकर जो जोखिम हैं, उसको लेकर और ज्यादा जांच करने और सतर्क रहने की जरूरत है''।

    NeoCoV पर डब्ल्यूएचओ ने क्या कहा?

    NeoCoV पर डब्ल्यूएचओ ने क्या कहा?

    चीनी वैज्ञानिकों के दावे को लेकर डब्ल्यूएचओ ने कहा कि, 'नियोकोव' वायरस इंसानों में कैसे फैल सकता है और इससे संभावित खतरा इंसानों के लिए क्या है, इसपर विस्तार से जानने के लिए और ज्यादा रिसर्च किए जाने की जरूरत है। वहीं, डब्ल्यूएचओ के 'एनिमल हेल्थ', फुड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन और यूएन इनवायरोमेंट प्रोग्राम ने इस उभरते हुए 'नियोकोव' वायरस पर नजर रखना शुरू कर दिया है और इस वायरस के संभावित खतरे पर जानकारियों को जुटाना शुरू कर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने रूसी न्यूज एजेंसी 'टास' को बताया कि, 'क्या रिसर्च के दौरान पाया गया वायरस इंसानों के लिए जोखिम पैदा करेगा, इसे जानने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत होगी'। वहीं डब्ल्यूएच ने चीनी रिसर्चर्स को 'नियोकोव' पर रिसर्च करने के लिए धन्यवाद दिया है।

    जंगली जानवर होते हैं वायरस के स्रोत

    जंगली जानवर होते हैं वायरस के स्रोत

    रिसर्च में पाया गया है कि, जानवर, खासतौर पर जंगली जानवर 75 प्रतिशत से ज्यादा वायरस की उत्पत्ति के लिए जिम्मेदार होते हैं, जिनमें से कई वायरस पूरी तरह से नये होते हैं। कोरोना वायरस भी साधारणतया जानवरों में ही पाए जाते हैं, जिनमें चमगादड़ शामिल हैं, जिन्हें खासतौर पर वायरस के प्राकृतिक सोर्स के तौर पर पहचाना गया है।

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