सांप जैसा 100 Kg का Robot, 'चांद के उस पार' बनाएगा ठिकाना! Space में 'समुद्र' के रहस्य से उठेगा पर्दा
पृथ्वी के अलावा मंगल या फिर अन्य ग्रहों पर मौजूद रहस्यों को पता लगाने के लिए नासा ने एक खास रोबोट का परीक्षण कर रही है। ये रोबोट ग्रह की आंतरिक संरचना की जानकारी जुटाने में सक्षम है।

NASA snake-like robot: ब्रह्मांड में मौजूद ग्रहों तक पहुंचना कभी महज एक सपना था। ऐसे में उनकी आंतरिक संरचना को लेकर जिज्ञासा का कोई सवाल ही नहीं उठता। अब केवल इंसान की ग्रहों तक पहुंच ही संभव नहीं हुई, बल्कि ग्रहों कि उत्पत्ति कैसे हुई, ये भी जानने का प्रयास किया जा रहा है। नासा हाल ही में सांप के आकार में डिजाइन किए गए एक रोबोट का परीक्षण कर रही है, जिसे खासतौर पर ग्रहों का इंटरनल स्ट्रक्चर की जांच करने के लिए किया गया है।
सांप के आकार के रोबोट को लेकर नासा ने जानकारी शेयर की है। स्पेस एजेंसी का कहना है कि उसकी जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) की एक टीम सांप जैसे दिखने वाले रोबोट का परीक्षण कर रही है, जो एक दिन शनि के चंद्रमा एन्सेलेडस की सतह के अंदर मौजूद पानी के स्रोत का पता लगान में सक्षम होगा। ईईएलएस रोबोट को लेकर जेपीएल के एक बयान में कहा गया कि एक्सोबायोलॉजी एक्सटेंट लाइफ सर्वेयर पृथ्वी, चंद्रमा और सौर मंडल के अन्य ग्रहों को लेकर रिसर्च के लिए डिजाइन किया गया है।
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नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी ऐसे रोबोट के लिए 2019 में शुरू हुआ था। जब इसके लिए प्रोटोटाइप विकसित किया गया। जिसमें अब कई तरीके के संसोधन किए गए। बाद में साइंटिस्टस ने ईईएलएस के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का नियमित परीक्ष किया और उसमें कई अपडेट्स किए गए। अब नए अपडेटेड प्रोटाइप को ईईएलएस 1.0 नाम दिया गया है। ये 100 किलोग्राम वजन है और 4 मीटर लंबा है। ये सर्पिल आकार का रोबोट 10 पार्टों में बना है।
रोबोट में पहाड़ों, बर्फ या फिर चट्टान पर चढ़ने के लिए खास स्क्रू थ्रेड्स का उपयोग किया गया है, रोबोट इसी के माध्यम से आगे बढ़ेगा। अभी तक, रोबोट का परीक्षण रेतीली, बर्फीली और बर्फीली परिस्थितियों में किया गया है। इसमें जेपीएल का मार्स यार्ड भी शामिल है, जिसे मंगल जैसे इलाके के रूप में कार्य करने के लिए स्की रिसॉर्ट में स्थापित "रोबोट खेल का मैदान" के रूप में वर्णित किया गया है।
पृथ्वी और अन्य ग्रहों और गहरे अंतरिक्ष में खगोलीय पिंडों के बीच लंबे समय तक संचार अंतराल के कारण रोबोट का स्वायत्त संचालन महत्वपूर्ण है। दावा किया जा रहा है कि शनि के लिए एक रेडियो सिग्नल को एक दिशा में भेजने में इसे लगभग 83 मिनट लग सकते हैं।
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