मंगल ग्रह पर कैसा दिखता है सूर्यग्रहण? NASA के रोवर ने पहली बार रिकॉर्ड किया दुर्लभ वीडियो

नासा ने परसेवरेंस रोवर को पिछले साल फरवरी में मंगल ग्रह पर भेजा था और अब 2 अप्रैल को नासा के इस रोवर ने अपने नेक्स्ट जेनरेशन मास्टकैम-जेड कैमरे की मदद से सूर्यग्रहण के अद्भुत नजारे को रिकॉर्ड किया है।

वॉशिंगटन, अप्रैल 23: हमारी धरती के लिए सूर्य ग्रहण और चंद्रग्रहण अब एक सामान्य खलोलीय घटना बन गये हैं, लेकिन ग्रहण को लेकर अभी भी इंसानों में काफी उत्सुकता होती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है, कि अलग अलग ग्रहों पर सूर्य ग्रहण कैसा दिखता है। नासा ने पहली बार दुर्लभ वीडियो रिकॉर्ड किया है, जिसमें मंगल ग्रह पर सूर्य ग्रहण कैसा दिखता है, वो देखा जा रहा है।

मंगल ग्रह से कैसा दिखता है ग्रहण?

मंगल ग्रह से कैसा दिखता है ग्रहण?

नासा के परसेवरेंस रोवर ने पहली बार मंगल ग्रह से सूर्य ग्रहण को रिकॉर्ड किया है। नासा के परसेवरेंस रोवर ने मंगल के दो चंद्रमाओं में से एक फोबोस को सूर्य के आगे से गुजरते वक्त वीडियो को रिकॉर्ड किया है और नासा का ये वीडियो ना सिर्फ दुर्लभ है, बल्कि काफी ज्यादा आश्चर्य में डालने वाला है। क्योंकि, धरती से हम जो सूर्यग्रहण देखते हैं, वो मंगल ग्रह से दिखने वाले सूर्य ग्रहण से पूरी तरह से अलग है।

परसेवरेंस रोवर ने किया रिकॉर्ड

परसेवरेंस रोवर ने किया रिकॉर्ड

आपको बता दें कि, नासा ने परसेवरेंस रोवर को पिछले साल फरवरी में मंगल ग्रह पर भेजा था और अब 2 अप्रैल को नासा के इस रोवर ने अपने नेक्स्ट जेनरेशन मास्टकैम-जेड कैमरे की मदद से सूर्यग्रहण के अद्भुत नजारे को रिकॉर्ड किया है। वहीं, इस सौरमंडल के इस अद्भुत घटना को रिकॉर्ड करने के बाद नासा की तरफ से बयान जारी किया गया है। नासा ने कहा कि, हमारे रोवर्स का उपयोग मंगल ग्रह के ग्रहणों को देखने के लिए वैज्ञानिक कर रहे हैं और इस रोवर के जरिए मंगल ग्रह की चंद्रमाओं में आने वाले बदलावों को जानने में काफी मदद मिलती है।

नासा ने जारी किया वीडियो

नासा ने जारी किया वीडियो

नासा ने इस अद्भुत खगोलीय घटना का वीडियो जारी किया है और वीडियो में दिख रहा है, कि मंगल ग्रह का चंद्रमा फोबोस मंगल की तरफ धीरे धीरे आगे बढ़ रहा है और नासा ने कहा है कि, मंगल का ये चंद्रमा फोबोस लाखों सालो के बाद मंगल ग्रह से ही टकरा जाएगा। आपको बता दें कि, जिस तरह से पृथ्वी के पास एक उपग्रह है, उसी तरह से मंगल ग्रह के पास दो चंद्रमा होते हैं और उनमें से फोबोस सबसे बड़ा चंद्रमा है और ये एक दिन में तीन बार चंद्रमा की परिक्रमा करता है।

परसेवरेंस रोवर से कई खोज

परसेवरेंस रोवर से कई खोज

दरअसल, नासा पिछले कई सालों से मंगलग्रह को लेकर ज्यादा से ज्यादा जानकारियां हासिल करने की कोशिश कर रहा है और नासा मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश कर रहा है। जिसके लिए नासा परसेवरेंस रोवर की मदद से मंगल ग्रह पर प्राचीन जिंदगी और माइक्रोबियल जीवन के संकेतों की तलाश भी कर रहा है। नासा का ये रोवर लाल ग्रह के रेजोलिथ, चट्टान और धूल का अध्ययन और विश्लेषण कर रहा है, और नमूने एकत्र कर वापस धरती पर भेज रहा है। नासा ने अपने बयान में कहा है कि, मंगल ग्रह का ये चंद्रमा फोबोस मर चुका है और और लाखों सालो के बाद ये एक दिन मंगल ग्रह से टकरा जाएगा।

सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा

आपको बता दें कि, नासा के परसेवरेंस रोवर ने सूर्यग्रहण का जो वीडियो रिकॉर्ड किया है, वो करीब 40 सेकंड का है और पृथ्वी के सूर्यग्रहण से इसकी तुलना करें, तो ये काफी छोटा है। वहीं, मंगल ग्रह का चंद्रमा फोबोस, पृथ्वी के चंद्रमा से आकार में 157 गुना छोटा है। इससे पहले भी नासा मंगल ग्रह के चंद्रमा की तस्वीरें ले चुका है, लेकिन सूर्यग्रहण को लेकर ऐसा अद्भुत वीडियो पहली बार रिकॉर्ड किया गया है।

मंगल पर बनाया ऑक्सीजन

मंगल पर बनाया ऑक्सीजन

आपको बता दें कि, इससे पहले पिछले साल अप्रैल में मंगल ग्रह पर पहुंचने के कुछ दिनों बाद ही परसिवरेंस रोवर ने इतिहास रच दिया था। अंतरिक्ष एजेंसी ने अप्रैल 2021 में बताया था कि, 6 पहियों वाले रोवर ने मंगल ग्रह के वायुमंडल से कुछ कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन में बदल दिया था। नासा के स्पेस टेक्नोलॉजी मिशन डायरेक्टोरेट के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर जिम रेउटर ने कहा था कि, मंगल पर ऑक्सीजन को कार्बन डाइऑक्साइड में बदलने का यह पहला अहम कदम है।

लाल मिट्टी पर खिलाया फूल!

लाल मिट्टी पर खिलाया फूल!

वहीं, इस साल फरवरी महीने में नासा के इस रोवर ने मंगल ग्रह पर फूल जैसी आकृति की तस्वीर भेजी थी और इस तस्वीर को देखकर पहले तो वैज्ञानिकों को लगा कि यह कोई फूल है। जब जांच की तो पता चला कि यह एक पत्थर है, जिसका निर्माण बेहद ही रोचक तरीके से हुआ है। क्यूरियोसिटी की ओर से इस तरह की संरचनाओं की फोटो पहले भी वैज्ञानिकों को भेजी है। जिन्हें डायजेनेटिक क्रिस्टल क्लस्टर कहा जाता है। डाइजेनेटिक मतलब अलग-अलग खनिजों के मिलने से थ्री-डायमेंशनल आकार बनता है। इस फूल में कई खनिजों का मिश्रण है।

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