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Artemis II Mission: चांद पर इंसानों को कॉलोनी बसाएगा NASA! 2030 में पहुंचेगा चीन, भारत कहां खड़ा?- Explained

Artemis II Mission: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA एक बार फिर चंद्रमा की ओर लौट रही है, लेकिन इस बार मकसद सिर्फ जाना नहीं, बल्कि वहां लंबे समय तक रहना है। NASA ने अगले 10 सालों के लिए एक बड़ा प्लान बनाया है, जिसके तहत चंद्रमा पर परमानेंट बेस बनाने की तैयारी चल रही है।

क्या है Artemis Program?

NASA का यह मिशन Artemis Program के तहत चल रहा है। इसका मकसद इंसानों को फिर से चंद्रमा पर न सिर्फ भेजना बल्कि वहां लंबे समय तक रहने की व्यवस्था करना भी है। इसके जरिए NASA भविष्य में मंगल पर इंसान के बसने का रास्ता और वहां रहने के इंतजामों की तलाश करने के बारे में जुगाड़ तलाश रहा है।

Artemis II Mission

50 साल बाद इंसानों की वापसी

इस मिशन का अगला बड़ा कदम है Artemis II. दरअसल 1 अप्रैल को NASA के SLS रॉकेट ने चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के फ्लाईबाई मिशन पर भेजा। इस मिशन में, Reid Wiseman, Victor Glover, Christina Koch और Jeremy Hansen शामिल हैं। यह मिशन 10 दिन का है और 50 साल बाद इंसानों की चंद्रमा के आस-पास करव रहा है।

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56 साल पहले क्या लाए थे?

1969 में Apollo 11 के जरिए इंसान पहली बार चांद पर पहुंचा था। इसके बाद 1972 तक कई मिशन हुए, जिसमें 12 लोग चांद पर गए। इस मिशन के दौरान 382 किलो चंद्रमा की मिट्टी (samples) पृथ्वी पर लाई गई थी। लेकिन उस समय टेक्नोलॉजी सीमित थी, इसलिए ये मिशन आगे नहीं बढ़ पाए।

कम गुरुत्वाकर्षण का लालच?

NASA का लक्ष्य अब सिर्फ चंद्रमा को एक्सप्लोर करना नहीं बल्कि वहां रहना, काम करना और रिसर्च करना। NASA चंद्रमा को भविष्य का स्पेस लॉन्चपैड बनाना चाहता है। इसका सबसे बड़ा कारण है चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण। चंद्रमा पर पृथ्वी की तुलनाम सिर्फ 1/6 गुरुत्वाकर्षण (1/6 Gravity Force) बल लगता है और यही वजह है कि यहां से रॉकेट लॉन्च करना आसान और सस्ता होगा। जिससे आने वाले वक्त में मंगल ग्रह पर मिशन आसान होंगे और डीप स्पेस ट्रैवल तेज होगा।

चंद्रमा पर क्या है गेम चेंजर?

चंद्रमा पर जल-बर्फ (water ice) मिलने के संकेत हैं। जिनका इस्तेमाल ऑक्सीजन बनाने, रॉकेट ईंधन तैयार करने जैसे कामों में किया जा सकता है। यानी भविष्य में ईंधन पृथ्वी से नहीं, बल्कि चंद्रमा से ही मिल सकता है। जिससे वहां की मंगल यात्रा और ज्यादा मंगल हो सकती है।

Artemis II Mission

रोबोट के रहते क्यों जरूरी है मानव मिशन?

पहले वैज्ञानिकों ने रोबोट और सैटेलाइट भेजे, जैसे ऑर्बिटर और रोवर्स (रोवर्स भारत ने भी भेजे हैं) लेकिन जब लक्ष्य चंद्रमा पर रहना बन गया, तब इंसानों की जरूरत महसूस हुई तब इंसानों ने और ज्यादा तेजी से काम करना शुरू किया। यहां से इंसान आगे के मिशन तेजी के साथ काम कर सकता है और कठिन फैसले भी ले सकता है।

Artemis II मिशन कैसे काम करता है?

यह मिशन Free Return Trajectory पर आधारित है। मतलब, रॉकेट पहले पृथ्वी से दूर जाता है और फिर चंद्रमा की ग्रैविटी से घूमकर वापस आता है। इससे कम ईंधन लगता है और मिशन भी ज्यादा सुरक्षित रहता है।

इस मिशन में क्या टेस्ट हो रहा है?

Artemis II सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि टेस्ट मिशन है। जिसमें Orion कैप्सूल की क्षमता, नेविगेशन सिस्टम, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, कम्युनिकेशन के साथ Docking जैसे ऑपरेशन भी टेस्ट होंगे, जो भविष्य के स्पेस स्टेशन के लिए जरूरी हैं।

Apollo vs Artemis: क्या बदला?

Apollo Mission Artemis Mission
1
सिर्फ लैंडिंग स्थायी बेस बनाना
2
सीमित टेक्नोलॉजी एडवांस सिस्टम
3
एक बार का मिशन लगातार मिशन

ISS से क्या सीखा?

NASA पहले ही International Space Station पर 25 साल से इंसानों को स्पेस में रख चुका है। जिसमें वैज्ञानिकों ने स्पेस में रहना कैसे संभव है और लंबी अवधि के मिशन कैसे चलें इस पर काम होगा। अब यही मॉडल चंद्रमा पर लागू होगा।
न्यूक्लियर स्पेस मिशन का भविष्य NASA 2028 में Space Reactor-1 Freedom लॉन्च करने की तैयारी में है और यह होगा न्यूक्लियर एनर्जी से चलने वाला यान ज्यादा तेज और हाई स्किल्ड। आज की स्पेस रेस में सिर्फ अमेरिका नहीं है। इसमें बड़े खिलाड़ी, ISRO, चीन, जापान और यूरोप जैसे देश शामिल हैं। जिनमें चीन 2030 और भारत का प्लान 2040 तक चंद्रमा पर पहुंचने का है। भारत Artemis Accords का हिस्सा है और NASA के साथ मिलकर काम कर रहा है।

Artemis II Mission
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नई स्पेस रेस शुरू

अब चंद्रमा सिर्फ एक लक्ष्य नहीं, बल्कि भविष्य का स्पेस बेस है मंगल और आगे जाने का लॉन्चपैड है। Artemis II जैसे मिशन दिखाते हैं कि मानव अब सिर्फ पृथ्वी तक सीमित नहीं रहेगा।आने वाले सालों में यह तय होगा कि स्पेस की अगली सुपरपावर कौन बनेगी और जो स्पेस पर राज करेगा वहीं पृथ्वी का भी राजा होगा।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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