ट्रंप ने किया मोदी को कॉल, भारतीय प्रधानमंत्री ने नहीं दिया भाव और काट दिया फोन! हुआ अब तक का सबसे बड़ा खुलासा
भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद (Tariff Dispute) और रूसी तेल खरीद पर बढ़ते तनाव के बीच जर्मन अखबार फ्रैंकफर्टर अलगेमाइन जितुंग (F.A.Z.) ने सनसनीखेज़ दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाल ही में चार बार फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मोदी ने किसी भी कॉल का जवाब नहीं दिया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं। अमेरिका का आरोप है कि भारत द्वारा रूस से सस्ते तेल की खरीद 'पुतिन की युद्ध मशीन' को मजबूत कर रही है। इसी बीच, ट्रंप प्रशासन भारत पर कृषि क्षेत्र में बाजार खोलने का दबाव बना रहा है, जिसका मोदी सरकार विरोध कर रही है।

ट्रंप को कॉल्स का जवाब क्यों नहीं मिला?
F.A.Z. का दावा है कि मोदी का यह रुख गहरी निराशा और रणनीतिक सावधानी दोनों को दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप की आम रणनीति-धमकी, दबाव और शिकायतें-भारत के मामले में असरदार साबित नहीं हो रही हैं। वियतनाम के साथ हुए विवाद का जिक्र करते हुए अखबार ने लिखा कि मोदी मीडिया स्टंट का हिस्सा बनने में रुचि नहीं रखते।
भारत पर नए अमेरिकी टैरिफ का खतरा
यदि स्थिति नहीं बदलती है, तो भारत को अमेरिका को अपने निर्यात पर 50% तक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है- जिसमें 25% व्यापार असंतुलन के कारण और 25% रूस से तेल खरीद की वजह से लगाया जा सकता है। एक्सपर्ट का मानना है कि इसका असर भारत की आर्थिक वृद्धि दर (Economic Growth Rate) पर पड़ेगा, जो 6.5% से घटकर 5.5% तक आ सकती है।
भारत में बदलता जनमत
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में जनता की भावना ट्रंप के खिलाफ बदल रही है। हालांकि, हाल ही में हुए प्यू रिसर्च सर्वे (Pew Research Survey) में हर दूसरा भारतीय ट्रंप पर भरोसा जताता दिखा था। बावजूद इसके, पाकिस्तान को लेकर ट्रंप के बयानों और पाकिस्तान आर्मी चीफ के साथ कथित व्हाइट हाउस लंच ने भारतीय सोशल मीडिया पर आक्रोश पैदा किया है।
चीन की ओर झुकाव?
रिपोर्ट में एक्सपर्ट मार्क फ़्रेज़ियर के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका की 'हिंद-प्रशांत रणनीति' टूट रही है। उनका मानना है कि भारत अब चीन के साथ साझा रणनीतिक हितों पर काम कर रहा है, ख़ासकर वैश्विक संस्थानों में अधिक प्रभाव हासिल करने के लिए। चीनी निवेश और तकनीक भारतीय उद्योग के विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं।












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