Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

म्यांमार की नोबेल विजेता नेता आंग सान सू की को 7 साल और जेल की सजा, कुल 33 साल रहना होगा जेल में

म्यांमार में साल 2020 में आम चुनाव करवाए गये थे, जिसमें आंग सान सू ची की पार्टी को एकतरफा जीत मिली थी और फरवरी 2021 में सेना ने सत्ता का तख्तापलट कर दिया था।

Myanmar News

Myanmar News: म्यांमार की एक सैन्य अदालत ने नोबेल पुरस्कार विजेता नेता आंग सान सू की को और सात साल की जेल की सजा सुनाई है, जिससे उनकी कुल जेल की अवधि बढ़कर अब 33 साल हो गई है। फरवरी 2021 में लोकतांत्रित सरकार का तख्तापलट करने के बाद म्यांमार की सेना जुंटा ने देश के तमाम नेताओं को जेल में बंद कर दिया था और लोगों के चुने हुए नेताओं के खिलाफ वो लगातार सजाओं का ऐलान कर रहा है। दूसरी तरह म्यांमार में लगातार विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं, जिसमें अभी तक हजार से ज्यादा लोकतंत्र समर्थकों की मौत हो चुकी है।

आंग सान सू की को फिर सजा

आंग सान सू की को फिर सजा

नोबेल अवार्ड से सम्मानित म्यांमार की लोकतांत्रिक नेता को एक फरवरी 2021 को सेना ने गिरफ्तार कर लिया था और उसके बाद से उनके खिलाफ 19 आरोप लगाए गये थे, जिसका सामना वो सैन्य अदालत में कर रही हैं। पिछले 18 महीने से उनके खिलाफ एक के बाद एक सजाओं का ऐलान किया जा रहा है, जिसकी आलोचना दुनियाभर के नेताओं ने की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पिछले हफ्ते उनकी रिहाई की मांग की थी। शुक्रवार को उन्हें अंतिम पांच आरोपों में सजा सुनाई गई है। सैन्य अदालत ने उन्हें भ्रष्टाचार के एक आरोप में दोषी पाया है। कोर्ट ने उन्हें सरकार के एक मंत्री के लिए हेलीकॉप्टर किराए पर लेने में नियमों का पालन नहीं करने का दोषी पाया है और सात सालों की सजा सुनाई है। उन्हें पहले ही 14 अलग-अलग आरोपों में दोषी ठहराया जा चुका है। जिसमें कोविड सार्वजनिक सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करना, वॉकी-टॉकी आयात करना और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन करना शामिल है।

सू ची की पार्टी पर भी मंडरा रहा खतरा

सू ची की पार्टी पर भी मंडरा रहा खतरा

कुल मिलाकर यही लगता है कि म्यांमार की सैन्य अदालत ने अब 77 साल की नोबल पुरस्कार से सम्मानित नेता आंग सान सू ची की पूरी जिंदगी जेल के अंदर ही खत्म करने की योजना पर बड़ी शिद्दत से काम कर रही है। अदालत के इस फैसले के बाद अब आंग सान सू ची की नेशनल लीग फार डेमोक्रेसी पार्टी के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। कुछ समय पहले म्यांमार की सैन्य सरकार ने नए चुनाव से पहले इसे भंग करने की बात कही थी। सेना ने 2023 में चुनाव कराने का वादा किया है।

सत्ता पर सेना का है कब्जा

सत्ता पर सेना का है कब्जा

आपको बता दें कि, म्यांमार में साल 2020 में आम चुनाव करवाए गये थे, जिसमें आंग सान सू ची की पार्टी को एकतरफा जीत मिली थी और उसके साथ ही देश में सैन्य शासन का अंत हो गया था। लेकिन, सेना के खिलाफ ये संघर्ष लंबा नहीं चल सका और पिछले साल एक फरवरी को सेना ने लोकतांत्रिक सत्ता का तख्तापलट कर दिया। वहीं, आंग सान सू ची समेत उनकी 'नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी' के तमाम बड़े नेताओं को सेना ने हिरासत में ले लिया था। उसके बाद से ही म्यांमार में सेना के खिलाफ भारी प्रदर्शन किए जा रहे हैं और अभी तक 1500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

कौन हैं आंग सान सू की?

कौन हैं आंग सान सू की?

आंग सान सू ची ने ही 90 के दशक में संघर्ष करना शुरू किया था और फिर उन्होंने देश को सेना के शासन से आजादी दिलाई थी और देश में लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना की थी, जिसके लिए उन्हें नोबल अवार्ड भी मिल चुका है, लेकिन 76 साल की हो चुकी आंग सान सू ची के खिलाफ अब म्यांमार की तानाशाह सेना बर्बरता कर रही है। आंग सान सू ची के खिलाफ म्यांमार की सेना दर्जनों मामलों में सुनवाई कर रही है और विश्लेषकों का कहना है कि, सेना नहीं चाहती है कि, वो जेल से कभी बाहर आ सकें, क्योंकि सेना को सिर्फ आंग सान सू ची से ही सबसे बड़ा खतरा है। म्यांमार के पत्रकारों के मुताबिक, म्यांमार की सेना आंग सान सू ची को कम से कम 100 से ज्यादा सालों की सजा सुना सकती है। हालांकि, आंग सान सू ची सेना द्वारा लगाए गये सभी आरोपों से इनकार कर चुकी हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+