म्यांंमार सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों की वापसी का बनाया मन
यंगून। म्यांमार सरकार अपने देश के रखाइन प्रांत से भाग कर बांग्लादेश देश गए रोहिंग्या मुसलमानों की वापसी की योजना में जुट गई है। विश्व समुदाय ने रोहिंग्या मुसलमानों पर हुए अत्याचार को लेकर म्यांमार की आलोचना के बाद अब खबर आ रही है कि आंग सान सरकार ने राष्ट्रीय सत्यापन प्रक्रिया शुरू कर फिर से इन्हें बसाने का मन बना लिया है। इससे ऐसा लग रहा है कि जो रोहिंग्या मुसलमान भारत में रह रहे हैं, उनको भी भविष्य में फिर से शांतिपूर्वक म्यांमार भेजा जा सकता है।

जल्द शुरू होगी प्रक्रिया
म्यांमार सरकार के सामाजिक कल्याण मंत्री यू विन मिट आइ जल्द ही बांग्लादेश की यात्रा करने वाले हैं जहां वे शेख हसीना सरकार से मिलकर इस समस्या से निपटने को लेकर चर्चा करेंगे। सूत्रों की मानें तो म्यांमार सरकार ने रोहिंग्या मुसलमान को फिर से बसाने के लिए एक पूरा रोडमेप भी तैयार कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक, रोहिंग्या शरणार्थियों के लौटने की प्रक्रिया म्यांमार और बांग्लादेश दोनों के बीच 1993 में हुए सिद्धांतों के आधार पर होगी।

बांग्लादेशी मुस्लिम नेता नहीं है साथ
दोनों देशों के बीच 1993 में आपसी सहमति के आधार सत्यापन प्रक्रिया तौंगप्यो लातवे और नगुआ गांव में शुरू की जाएगी। लोग समुद्री मार्ग और सड़क मार्ग के द्वारा इन गावों में पहुंचकर अपना सत्यापन कराएंगे। इसमें वे ही सत्यापन कर पा पाएंगे जो म्यांमार के रखाइन क्षेत्र में हिंसा का शिकार हो गए थे। हालांकि बांग्लादेश के मुस्लिम नेताओं ने इस प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार किया है।

अब तक 5 लाख रोहिंग्या मुस्लिम हो चुके हैं पलायन
म्यांमार सेना और रोहिंग्या मुसलमानों के बीच फैली हिंसा ने इस घटना पर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। म्यांमार के रखाइन प्रांत में भड़की हिंसा के बाद अब तक 5 लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान समुद्री रास्तों से बांग्लादेश में शरण ले चुके हैं। भारत समेत कई देश ने म्यांमार सरकार पर रोहिंग्याओं को फिर से बसाने का दबाव डाला है।












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