Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

चंदा मामा हमें छोड़कर जा रहे हैं, और हम उन्हें जाने से नहीं रोक सकते हैं! जानिए पृथ्वी पर क्या पड़ेगा प्रभाव?

ब्रह्मांड में अद्भुत खगोलीय घटना घट रही है और वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि चंद्रमा लगातार हमारी पृथ्वी से दूर जा रहा है।

नई दिल्ली, अक्टूबर 02: चंदा मामा हमसे दूर जा रहे हैं। हर साल। हर साल हमारा चंद्रमा स्पष्ट रूप से पृथ्वी से दूर जा रहा है। हालांकि, जाने की रफ्तार इतनी कम है, कि उसे महसूस नहीं किया जा सकता है। लेकिन, रिसर्च में पता चला है कि चांद लगातार हमारी पृथ्वी से दूर जा रहा है और पृथ्वी से दूर जाते चंद्रमा को रोकने का कोई उपाय नहीं है, कम से कम इंसानों की शक्ति के बाहर की ये चीज है।

दूर जा रहे हैं चंदा मामा

दूर जा रहे हैं चंदा मामा

पृथ्वी से दूर जाते चांद को रोकने का कोई उपाय नहीं है, घड़ी को वापस करने का कोई उपाय नहीं है। गुरुत्वाकर्षण बल अदृश्य और अडिग हैं, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम क्या करते हैं या हम उनके बारे में कैसा महसूस करते हैं, वे चंद्रमा को साथ लेकर चलते रहेंगे और कुछ लाख सालों के बाद चंद्रमा इतनी दूर चला जाएगा कि वो आंखों के लिए तारा बन जाएगा, तारे जैसा बन जाएगा और फिर एक दिन गायब हो जाएगा।

पहले करीब था चांद

पहले करीब था चांद

जब चांद आज से करीब 4.5 अरब साल पहले बना था तो वो पृथ्वी के करीब हुआ करता था। चांद पृथ्वी के चारों तरफ तैरते हुए पत्थर के अलग अलग विशालकाय टुकड़ों से जुड़कर बना था और चट्टानी मलबों से मिलकर चांद का निर्माण हुआ था और तब से लेकर आज तक चांद पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगा रहा है और पृथ्वी पर चांद पर अलग अलग कहानियां बनाए जाते रहे हैं। वैज्ञानिकों को रिसर्च में पता चला है कि चंद्रमा आज की तुलना में पृथ्वी की परिक्रमा 10 गुना ज्यादा नजदीक से किया करता था और समय के साथ चंद्रमा धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है।

कैसे बना था चांद?

कैसे बना था चांद?

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मलबा पृथ्वी और मंगल के आकार की एक रहस्यमयी वस्तु के बीच टक्कर से आया था। ब्रह्मांडीय ओवन की वजह से पहले सारे चट्टान पिघले और फिर आपस में जुड़ते हुए एक पिघले चंद्रमा का निर्माण किया और फिर एक ठोस चांद का निर्माण हुआ, जो रात के वक्त आसमान में चमकता हुआ हमें नजर आता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि उस समय चंद्रमा प्रति वर्ष लगभग आठ इंच की दर से दूर जा रहा था। हमारा ग्रह और उसका चंद्रमा हमेशा इसी तरह अलग होने वाला था।

क्यों पृथ्वी से दूर जा रहा है चांद?

क्यों पृथ्वी से दूर जा रहा है चांद?

चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण उनकी आकार की तुलना जितना ही छोटा है, जिसकी वजह से दूसरे ग्रहों का गुरुत्वाकर्णण लगातार चांद को खींचता रहता है और चूंकी पृथ्वी की तुलना में उनका गुरुत्वाकर्णण ज्यादा है, लिहाजा धीरे-धीरे चांद उन ग्रहों की तरफ खिसकता जा रहा है। चूंकी हमारी पृथ्वी के बड़े हिस्से पर समुद्र हैं, इसीलिए समुद्र में उठने वाले और लगातार बदलते ज्वार के तौर पर चंद्रमा के दूर जाने का प्रभाव साफ तौर पर देखा जा सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, चंद्रमा समुद्र को अपनी तरफ खींचने की कोशिश करता है और समुद्र पीछे हट जाते हैं, जिससे चंद्रमा की गति अपनी कक्षा में बढ़ जाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर आप पृथ्वी की कक्षा में पृथ्वी की गति से ज्यादा गति में चक्कर लगाते हैं तो आप पृथ्वी की कक्षा से बाहर आसानी से चले जाते हैं।

'लूनर रिट्रीट' कहलाती है ये घटना

'लूनर रिट्रीट' कहलाती है ये घटना

जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA के एक खलोगीय वैज्ञानिक जेम्स ओ डोनोग्यू ने कहा कि, इस खगोलीय घटना को "लूनर रिट्रीट" कहा जाता है। उन्होंने कहा कि, ये खगोलीय घटना देखने और सुनने में काफी दिलचस्प लगता है, जैसे आप कल्पना कर रहे हों और चंद्रमा आराम से पृथ्वी के क्षेत्र से पलायन कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञनिकों ने कई स्रोतों के साथ मिलाकर बीमिंग लेजर्स का इस्तेमाल करते हुए 'लूनर रिट्रीट' को मापा है और पाया है कि पिछले कुछ सालों में चंग्रमा के पीछे हटने की दर में बदलाव आया है और इसकी वजह से चंद्रमा पर कई खगोलीय घटनाएं घटी हैं, जैसे चंद्रमा पर उल्काओं की बमबारी हो जाती है और पृथ्वी पर मौसम चक्र में भी परिवर्तन हो जाता है।

Recommended Video

    Ice Age क्या है ? ये कब आती है ? जानें इसके बारे में सब कुछ | वनइंडिया हिंदी
    चंद्रमा के दूर जाने का प्रभाव

    चंद्रमा के दूर जाने का प्रभाव

    वैज्ञानिकों ने कहा है कि, चंद्रमा के दूर जाने का प्रभाव पृथ्वी पर बहुत अच्छे से महसूस किया जाने लगा है। वैज्ञानिकों ने कहा कि चंद्रमा को हमसे दूर खींचने वाली ताकतें भी चंद्रमा के घूमने के दर को धीमा कर रही हैं, जिससे हमारे दिनों की लंबाई बढ़ रही है। शुरुआत में जब चंद्रमा हमारे करीब हुआ करता था और पृथ्वी तेजी से घूम रही थी, उस वक्त एक दिन सिर्फ चार घंटे का होता था। लेकिन, धीरे धीरे चंद्रमा पृथ्वी से जैसे जैसे दूर होता गया, धरती पर दिन की लंबाई बढ़ती चली गई। वहीं, समुद्री ज्वार में भी परिवर्तन महसूस किया जा रहा है।

    कब तक गायब हो जाएगा चंद्रमा?

    कब तक गायब हो जाएगा चंद्रमा?

    वैज्ञानिकों का कहना है कि ये पूरी तरह से साफ हो चुका है कि चंद्रमा लगातार हमारी पृथ्वी से दूर जाता रहेगा और धीरे धीरे पृथ्वी पर चंद्रमा के दूर जाने से होने वाला प्रभाव का भी घटना शुरू हो जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि धीरे धीरे चंद्रमा पृथ्वी पर अपना प्रभाव डालना बंद कर देगा और करीब 600 मिलियन साल के बाद चंद्रमा इतनी दूर से पृथ्वी का परिक्रमा करेगा कि उसे नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकेगा। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि उतनी दूरी पर जाने के बाद भी चंद्रमा पृथ्वी से ही बंधा रहेगा, लेकिन उसके बाद सूर्य ग्रहण या फिर चंद्र ग्रहण का दिखना बंद हो जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि उस स्थिति में आते आते चंद्रमा पर सूर्य का प्रभाव इतना ज्यादा बढ़ जाएगा कि धीरे-धीरे वो पिघलने लगेगा और कुछ अरब साल के बाद चंद्रमा गायब हो जाएगा।

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+