बाली में शी जिनपिंग और नरेन्द्र मोदी के बीच हुआ था समझौता... चीन के दावे पर विदेश मंत्रालय का टिप्पणी से इनकार
Narendra Modi Xi Jinping News: चीन ने दावा किया है, कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पिछले साल बाली में जी20 देशों की बैठक के बाद आपसी बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को बहाल करने के लिए "आम सहमति" पर पहुंच गये थे।
ये पहला मौका है, जब दोनों देशों में से किसी एक देश की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच की गई मुलाकात में क्या बातचीत की गई थी, उसको लेकर कुछ बयान जारी किया गया है। हालांकि, भारत ने चीन के इस दावे को नकार दिया है।

चीन ने क्या दावा किया है?
पहली बार दोनों पक्षों की तरफ से संकेत दिए गये हैं, कि पिछले साल सितंबर महीने में बाली आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित, रात्रिभोज के मौके पर दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में कोई महत्वपूर्ण बातचीत शामिल थी।
यह दावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और उनके चीनी समकक्ष, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के केंद्रीय विदेश मामलों के आयोग के निदेशक वांग यी के बीच जोहान्सबर्ग में की गई एक बैठक के बाद जारी, चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में किया गया था, जहां दोनों सलाहकार एनएसए की ब्रिक्स बैठक में भाग ले रहे हैं।
आपको बता दें, कि वांग यी को एक बार फिर से चीन का विदेश मंत्री बना दिया गया है।
हालांकि, अजीत डोभाल और वांग यी के बीच ब्रिक्स सम्मेलन से इतर की गई बैठक के दौरान भारतीय पक्ष की तरफ से जो बयान जारी किया गया था, उसमें शी जिनपिंग और नरेन्द्र मोदी के बीच इस तरह की बातचीत को लेकर कोई बात नहीं की गई थी, बल्कि भारतीय बयान में एलएससी पर विवाद जारी होने पर ध्यान केन्द्रित किया गया था।
भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति में मंगलवार को कहा गया, कि "एनएसए ने बताया, कि साल 2020 से भारत-चीन सीमा के पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी पर स्थिति ने, रणनीतिक विश्वास और रिश्ते के सार्वजनिक और राजनीतिक आधार को कमजोर कर दिया है।"
अजीत डोभाल और वांग यी के बीच की ये बैठक 14 जुलाई को र्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) और आसियान क्षेत्रीय मंच के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान एस.जयशंकर और वांग यी के बीच की मुलाकात के कुछ दिनों के बाद हुई है।
लिहाजा, इन हाई प्रोफाइल बैठकों से इस बात पर अटकलें तेज हो गई हैं, कि क्या प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इस साल अगस्त में होने वाले केपटाउन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में या फिर इसी साल सितंबर महीने में दिल्ली जी20 शिखर सम्मेलन में मिलेंगे?
हालांकि अभी तक किसी भी नेता की उपस्थिति की पुष्टि नहीं हुई है। रूसी विदेश मंत्रालय ने 25 जुलाई को कहा है, कि अजीत डोभाल ने अपने रूसी समकक्ष जनरल निकोलाई पेत्रुशेव से भी मुलाकात की है और भारत-रूस सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर चर्चा की है।
क्रेमलिन ने पिछले हफ्ते घोषणा की थी, कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से नहीं बल्कि वर्चुअल भाग लेंगे।
आपको बता दें, कि अप्रैल 2020 में गलवाल घाटी में तनाव भड़कने के बाद नरेन्द्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक नहीं की गई है, हालांकि पिछले साल सितंबर में बाली जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान नरेन्द्र मोदी को शी जिनपिंग के पास जाते और कुछ मिनटों के लिए दोनों नेताओं को बातचीत करते हुए देखा गया था।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने उस समय इस मुलाकात से पल्ला झाड़ लिया था। हालांकि, चीनी एमएफए ने अपने बयान में दावा किया, कि बाली में दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में ज्यादा विस्तार से बात हुई थी।
चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है, कि "पिछले साल के अंत में, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधान मंत्री मोदी बाली में चीन-भारत संबंधों को स्थिर करने पर एक महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंचे थे।"
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है, कि ""दोनों पक्षों को, दोनों देशों के नेताओं के रणनीतिक निर्णय का पालन करना चाहिए, कि "वे एक-दूसरे के लिए खतरा पैदा नहीं करते हैं, और वे एक-दूसरे के लिए विकास के अवसर हैं।"
चीनी विदेश मंत्रालय की तरफ से दोनों नेताओं से द्विपक्षीय संबंधों की "शीघ्र" वापसी का आग्रह किया गया है।
भारत की चीनी दावे पर टिप्पणी से इनकार
वहीं, द हिन्दू की डिप्लोमेटिक अफेयर्स एडिटर सुहासिनी हैदर ने एक ट्वीट में कहा है, कि "भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन की इस दलील पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, कि शी जिनपिंग और मोदी के बीच इस तरह की कोई बातचीत हुई थी।"
उन्होंने आगे लिखा है, कि "16 नवंबर को एक ब्रीफिंग में विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कहा था, कि दोनों नेताओं ने जी20 में इंडोनेशियाई राष्ट्रपति द्वारा आयोजित रात्रिभोज के समापन पर केवल शिष्टाचार का आदान-प्रदान किया था।"












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