Modern slavery: भारत में 1.1 करोड़ लोग जबरिया मजदूरी की गिरफ्त में, दुनिया में सबसे ज्यादा-रिपोर्ट

भारत में जबरिया मजदूरी और जबरन शादी की समस्या दुनिया में सबसे ज्यादा है। ऑस्ट्रेलिया की एक संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक इसके चलते भारत में आधुनिक दासता के मामले विश्व में सबसे अधिक है।

Report on Modern slavery

दुनिया के 20 सबसे अमीर देश 'आधुनिक गुलामी' की चपेट में रह रहे विश्व के अनुमानित 5 करोड़ लोगों में से आधे से ज्यादा की जबरिया मजदूरी के लिए जिम्मेदार हैं। 'आधुनिक गुलामी' पर यह रिपोर्ट 'द वॉक फ्री फाउंडेशन' की ओर से बुधवार को जारी की गई है।

5 करोड़ लोग 'आधुनिक गुलामी' के शिकार-रिपोर्ट
'द वॉक फ्री फाउंडेशन' एक राइट्स ग्रुप है, जिसका फोकस 'आधुनिक गुलामी' पर रहता है। इसने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि 20 देशों के समूह में से 6 सदस्य राष्ट्रों में 'आधुनिक दासता' से पीड़ित सबसे अधिक लोग हैं। यह 'आधुनिक दासता' या तो जबरिया मजदूरी है या फिर जबरिया शादी।

भारत में 1.1 करोड़ लोग 'आधुनिक गुलाम'- द वॉक फ्री फाउंडेशन
भारत के लिए इस रिपोर्ट में जो सबसे बुरी स्थिति है, वह ये है कि 'आधुनिक गुलामी' की लिस्ट में 1.1 करोड़ के आंकड़े के साथ यह टॉप पर है। इसके बाद चीन में 58 लाख, रूस में 19 लाख, इंडोनेशिया में 18 लाख, तुर्की में 13 लाख और अमेरिका में 11 'आधुनिक गुलामी' के शिकार हैं।

इन देशों में 'आधुनिक गुलामी' सबसे कम
रिपोर्ट की मानें तो जिन देशों में 'आधुनिक गुलामी' का प्रचलन सबसे कम है, उनमें स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, जर्मनी, नीदरलैंड, स्वीडन, डेनमार्क, बेल्जियम, आयरलैंड, जापान और फिनलैंड शामिल हैं, जो जी20 के भी सदस्य हैं।'

यह देश भी पूरी तरह से समस्या से अछूते नहीं- रिपोर्ट
हालांकि इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 'फिर भी, इन देशों में भी हजारों लोगों को काम या शादी के लिए मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है। इनके उच्च स्तरीय आर्थिक विकास , लैंगिक समानता, सामाजिक कल्याण और राजनीतिक स्थिरता के साथ-साथ मजबूत क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम होने के बावजूद। '

जबरिया शादी भी समस्या का हिस्सा-रिपोर्ट
पिछले साल सितंबर में संयुक्त राष्ट्र के इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन और इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन और वॉक फ्री की ओर से आई एक रिपोर्ट के मुताबिक 2021 के आखिर में 5 करोड़ लोग 'आधुनिक गुलामी' झेल रहे थे। इनमें से 2.8 करोड़ लोग जबरिया श्रम करने को मजबूर थे तो 2.2 करोड़ लोगों को जबरिया शादी का सामना करना पड़ा था।

'आधुनिक गुलामी हमारे समाज के प्रत्येक पहलू में घुस गया है'
ऊपर जो 'आधुनिक गुलामी' की संख्या बताई गई थी, उसमें 2016 के आखिर के बाद से सिर्फ 5 वर्षों में 1 करोड़ ने लोग शामिल हो गए। वॉक फ्री की फाउंडर डायरेक्टर ग्रेस फॉर्रेस्ट ने एक बयान में कहा, 'आधुनिक गुलामी हमारे समाज के प्रत्येक पहलू में घुस गया है। ' 'यह हमारे कपड़ों के माध्यम से , हमारे इलेक्ट्रॉनिक्स के जरिए और हमारे भोजन में भी शामिल है।'

जबरिया मजदूरी के जिम्मेदार कौन?
उनके मुताबिक, 'यह सत्ता के लिए एक दर्पण की तरह है, जिससे पता चलता है कि किसी समाज में किसके पास ये है और किसके पास नहीं।' रिपोर्ट के मुताबिक इसे ग्लोबल सप्लाई चेन में भी देखा जा सकता है, जहां जी20 राष्ट्र 468 मिलियन डॉलर का सामान सालाना आयात करते हैं, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, पाम ऑयल, सोलर पैनल और टेक्सटाइल शामिल हैं, जिसे जबरिया श्रम के द्वारा उत्पादित होने का 'जोखिम' है।

160 देशों को सर्वे में शामिल करने का दावा
ऑस्ट्रेलिया स्थित वॉक फ्री ने अपनी 172 पन्नों की रिपोर्ट के बारे में कहा है कि उसने इसके लिए 160 देशों में हजारों लोगों का इंटरव्यू किया है और घरों में जाकर सर्वे किए हैं। इसमें किसी देश की दुर्बलता का भी आकलन शामिल है। इसके अनुसार 2021 के आखिर में आधुनिक दासता के सबसे ज्यादा विस्तार वाले देश उत्तर कोरिया, इरीट्रिया, मॉरिटानिया, सऊदी अरब और तुर्की थे।

रिपोर्ट में यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, पुर्तगाल और अमेरिका जैसे देशों के बारे में कहा गया है कि इन्होंने इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं, लेकिन यह भी आवश्यकता से कम हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 'जी20 की अधिकतर सरकारें अभी भी यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं कर पा रही हैं कि आयातित सामानों के उत्पादन में उन देशों में आधुनिक दासता शामिल न हो....'(तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

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