टाइटैनिक देखने गई पनडुब्बी में सिर्फ 2 घंटे का बचा ऑक्सीजन, लोगों को बचाना अब क्यों है मुश्किल?
टाइटैनिक जहाज के मलबे को देखने के लिए लोगों को ले जाने वाली टाइटन पनडुब्बी रविवार दोपहर से ही लापता है। चिंता की बात ये है कि पनडुब्बी में अब कुछ घंटों का ही ऑक्सीजन बचा है।
टाइटैनिक देखने गए सबमरीन में 96 घंटे का लाइफ सपोर्ट ही रहता है। इस बात की जानकारी भी नहीं मिली है कि सबमरीन अभी भी पानी में ही है या सतह पर आ चुकी है।

US कोस्ट गार्ड ने बताया कि स्थानीय समयानुसार गुरुवार सुबह तक सबमरीन में ऑक्सीजन खत्म होने की आशंका है। कनाडा की तरफ से सर्च ऑपरेशन में शामिल एक एयरक्राफ्ट को सोनार-बॉय की मदद से कुछ आवाजें सुनाई दी हैं।
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ये उसी जगह के पास से रिकॉर्ड की गईं हैं, जहां टाइटैनिक का मलबा मौजूद है। आवाजें करीब 30 मिनट के अंतराल पर रिकॉर्ड हुईं। फिर 4 घंटे बाद सोनार ने दोबारा इन्हें डिटेक्ट किया।
इस बीच गहरे समुद्र के खोजकर्ता डॉ. डेविड गैलो ने इस बात पर जोर दिया है कि एक बार पनडुब्बी मिल जाने के बाद भी लोगों को बचाने में कई घंटे लग सकते हैं।
गैलो ने गुड मॉर्निंग ब्रिटेन से बात करते हुए कहा कि तीन अलग-अलग सोनार ने एक ही समय में अपने सेंसर में उन्हें सुना है और यह दो दिनों से अधिक समय तक चल रहा है। इस मामले में, मेरा मानना है कि शोर हर आधे घंटे में दोहराया जाता है।
डॉ गैलो ने कहा कि इस बिंदु पर, हमें यह मान लेना होगा कि वह पनडुब्बी है और तुरंत उस स्थान पर जाना होगा, उसका पता लगाना होगा और यह सत्यापित करने के लिए रोबोट को वहां ले जाना होगा कि पनडुब्बी कहां है।
डॉ गैलो ने कहा कि टीम को पूरी तरह से तैयार होकर जाना होगा और यह मान कर जाना होगा कि वह पनडुब्बी ही है क्योंकि इसे ढूंढने और इसे सतह तक लाने में काफी समय लगता है, सच कहें तो इसमें घंटों लगते हैं।
यह पूरी पनडुब्बी सुरक्षा की दृष्टि से अभेद्य है। यही वजह है कि उसमें बैठे लोग उसे खोल नहीं सकते हैं। ऐसे में उसे सतह पर लाकर ही लोगों को निकाला जा सकता है।
आपको बता दें कि लापता हुए सबमरीन की तलाश में अंडरवाटर रोबोट सहित अमेरिका और कनाडा के 3 सी130 हरक्यूलस एयरक्राफ्ट भेजे गए हैं। इसके अलावा एक पी-8 एयरक्राफ्ट और 2 कनाडाई सर्फेस शिप्स भी सर्च ऑपरेशन में शामिल हैं।












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